
देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने वैवाहिक विवादों (Marital Disputes) से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी अपने पति के कार्यस्थल (Workplace) या उसके उच्च अधिकारियों के पास जाकर शिकायत करती है, विवाद खड़ा करती है या उसके चरित्र पर झूठे आरोप लगाती है, तो इसे कानूनी रूप से ‘मानसिक क्रूरता’ (Mental Cruelty) माना जाएगा। पीठ ने कहा कि ऐसी हरकतें पति की सामाजिक प्रतिष्ठा, नौकरी और मानसिक शांति को बुरी तरह प्रभावित करती हैं, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक (Divorce) का एक वैध आधार है।
मामले की पृष्ठभूमि: उच्च अधिकारी से शिकायत बनी विवाद की वजह
यह मामला एक पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा था, जिसमें पत्नी ने वैवाहिक कलह के चलते पति के ऑफिस जाकर उसके वरिष्ठ अधिकारियों (Senior Officers) से लिखित शिकायतें की थीं और सहकर्मियों के सामने उसके चरित्र पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके चलते पति को अपने कार्यस्थल पर काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और उसकी पेशेवर छवि खराब हुई। निचली अदालत और हाई कोर्ट से होते हुए जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो शीर्ष अदालत ने पति की तलाक की अर्जी को सही ठहराते हुए पत्नी के इस रवैये को क्रूरता की श्रेणी में रखा।
अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘सम्मान से जीने का अधिकार पति को भी है’
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा:
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पेशेवर जीवन पर असर: वैवाहिक विवादों को घर तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। पति के नियोक्ता (Employer) या दफ्तर में जाकर शिकायतें करने का उद्देश्य केवल उसे नीचा दिखाना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना होता है।
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प्रतिष्ठा की हानि: किसी भी व्यक्ति के लिए उसकी सामाजिक और पेशेवर साख बेहद अनमोल होती है। बिना पुख्ता सबूतों के ऑफिस में हंगामा करना किसी भी व्यक्ति के सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार का हनन है।
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तलाक का आधार: इस प्रकार का व्यवहार वैवाहिक रिश्ते को उस मोड़ पर ले आता है जहां से साथ रहना असंभव हो जाता है, इसलिए पीड़ित पक्ष तलाक पाने का हकदार है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय: पत्नियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का अहम संदेश
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वैवाहिक विवादों में कार्यस्थल को हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर पत्नी को पति से कोई कानूनी शिकायत या भरण-पोषण (Maintenance) से जुड़ा विवाद है, तो उसके लिए कानून और अदालत के दरवाजे खुले हैं। लेकिन ऑफिस या कार्यस्थल पर जाकर पति की छवि खराब करना कानूनी रूप से गलत है और इसका खामियाजा मुकदमे में भुगतना पड़ सकता है।
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