
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय, जिन्हें अनंत महाराज के नाम से भी जाना जाता है, द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया गया। इस बयान के सामने आने के बाद राज्यभर में भारी रोष देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बेहद कड़ा और त्वरित कदम उठाते हुए सांसद अनंत महाराज को इसी साल फरवरी महीने में प्रदान किया गया प्रतिष्ठित ‘बंगा विभूषण’ राजकीय सम्मान तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि सांसद की ऐसी टिप्पणियां इस सर्वोच्च राजकीय सम्मान की गरिमा, प्रतिष्ठा और उसकी मूल भावना के बिल्कुल विपरीत हैं, इसलिए इसे तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाता है। इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि राष्ट्रीय नायकों के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
नेताजी के अपमान पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने अपनी सख्त मंशा जाहिर करते हुए साफ कर दिया है कि बंगाल की पवित्र धरती पर देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस मामले में पूरी तरह से ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से या सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय नायकों की छवि को धूमिल करने की कोशिश करे, उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि नेताजी जैसे अमर सेनानी का अनादर करने वालों को जनता के सामने माफी मांगनी चाहिए और कानून के हाथ सभी के लिए समान रूप से लंबे हैं।
क्या है पूरा विवाद और क्यों गरमाई सियासत
यह पूरा विवाद तब भड़का जब बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज ने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए बेहद विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने नेताजी को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं। उत्तर बंगाल के कूचबिहार क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले और राजबंशी समुदाय के बड़े नेता माने जाने वाले अनंत महाराज के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उत्तर बंगाल के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राष्ट्रीय नायक के सम्मान की रक्षा की गुहार लगाई थी। हालांकि, विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे तमाम आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने यह भी घोषणा की है कि राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में ‘नेताजी सुभाष सेवा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे ताकि नई पीढ़ी को उनके बलिदान से जोड़ा जा सके।
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