
भारतीय सिनेमा जगत के महान और बेबाक अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) के अचानक हुए निधन ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। गोवा स्थित अपने आवास पर अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस बीच चिकित्सा विशेषज्ञों और अस्पताल के सूत्रों ने उनके निधन के असली चिकित्सीय कारणों (Medical Reasons) का खुलासा किया है, जिससे यह पता चलता है कि उनके दिल की आंतरिक कार्यप्रणाली में अचानक किस प्रकार की गंभीर तकनीकी और जैविक गड़बड़ी आई थी। डॉक्टरों के अनुसार, दिग्गज अभिनेता को एक गंभीर और तीव्र कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) आया था, जिसके पीछे हृदय की विद्युत प्रणाली (Electrical System of the Heart) में उत्पन्न हुई अचानक रुकावट मुख्य वजह बनी। इस दुखद और चौंकाने वाली घटना के बाद से चिकित्सा जगत और उनके प्रशंसकों के बीच दिल से जुड़ी बीमारियों को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
चिकित्सा विज्ञान की भाषा में जब हम दिल के दौरे (Heart Attack) और कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) की बात करते हैं, तो दोनों में एक बारीक और बहुत बड़ा अंतर होता है। हार्ट अटैक आमतौर पर कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज के कारण रक्त संचार रुकने से होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल के अपने इलेक्ट्रिकल सिस्टम (Electrical System) के फेल होने या उसमें अचानक खतरनाक शॉर्ट-सर्किट जैसी गड़बड़ी आने की स्थिति है। हमारे दिल को लगातार एक तय रिदम और रफ्तार से धड़कने के लिए प्राकृतिक रूप से विद्युत संकेतों (Electrical Impulses) की आवश्यकता होती है, जो साइनस नोड द्वारा नियंत्रित होते हैं। जब किसी गंभीर स्थिति में इन वैद्युत आवेगों में अचानक भारी असंतुलन या वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन (Ventricular Fibrillation) जैसी घातक स्थिति पैदा हो जाती है, तो दिल की मांसपेशियां पंप करना बंद कर देती हैं और दिल की धड़कन अचानक पूरी तरह से रुक जाती है, जिससे मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है।
गोवा के अस्पताल के सूत्रों और चिकित्सा दल द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जब नाना पाटेकर को अचेतन अवस्था में अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। कार्डियक इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत डॉक्टरों ने लगभग 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR – Cardiopulmonary Resuscitation) और आधुनिक डीफिब्रिलेटर मशीनों के जरिए उनके दिल को दोबारा सक्रिय करने और विद्युत प्रणाली को पटरी पर लाने की भरसक कोशिश की। लेकिन दिल की धड़कन और उसकी आंतरिक वैद्युत व्यवस्था इतनी बुरी तरह से ठप हो चुकी थी कि शरीर ने चिकित्सा प्रयासों का कोई जवाब नहीं दिया। डॉक्टरों का यह मानना है कि जब कार्डियक अरेस्ट अत्यधिक तीव्र और गंभीर होता है, तो कई बार समय पर अस्पताल पहुंचने के बावजूद मरीज को बचाना बेहद कठिन हो जाता है, क्योंकि मस्तिष्क तक खून का दौरा कुछ ही पलों में बंद हो चुका होता है।
नाना पाटेकर का यूं अचानक दुनिया से चले जाना इस बात की कड़वी सच्चाई है कि दिल की बीमारियां और कार्डियक अरेस्ट बिना किसी पूर्व चेतावनी के किसी को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं, भले ही इंसान ऊपर से कितना भी फिट और सक्रिय क्यों न दिखाई दे। आधुनिक जीवनशैली का तनाव, काम का अत्यधिक दबाव, अनियमित खानपान और कई बार छुपे हुए कार्डियक रिस्क समय के साथ शरीर के इस नाज़ुक इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित करते रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि 40 की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित रूप से ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) और लिपिड प्रोफाइल जैसे बुनियादी हृदय परीक्षण करवाते रहना चाहिए ताकि किसी भी छुपे हुए खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके। भारतीय सिनेमा के ‘क्रांतिवीर’ और एक महान इंसान के रूप में हमेशा याद रखे जाने वाले नाना पाटेकर का यह जाना फिल्म जगत के लिए एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता, लेकिन उनका यह जीवन और अंत हमें अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहने का एक बड़ा संदेश दे गया है।
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