
सनातन धर्म में शक्ति स्वरूपा मां आदिशक्ति भगवती दुर्गा की आराधना के नौ दिन अत्यंत पवित्र, ऊर्जावान और कल्याणकारी माने जाते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में भक्तजन घटस्थापना यानी कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेते हैं और अखंड ज्योति प्रज्वलित कर माता के नौ विभिन्न स्वरूपों की उपासना करते हैं। शास्त्रों और वास्तु विज्ञान में स्पष्ट उल्लेख है कि देवी दुर्गा का वास उसी स्थान पर होता है जहां पूर्ण शुद्धि, सात्विकता और अनुशासन का वातावरण हो। अक्सर लोग नवरात्र के पहले दिन की सुबह तक तैयारियों में उलझे रहते हैं, जिसके चलते शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करने में देरी हो जाती है या पूजा की कोई आवश्यक सामग्री छूट जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा की अधूरी तैयारी या अशुद्धि साधना में विघ्न उत्पन्न कर सकती है। यदि आप भी अपने घर में मां अंबे की असीम कृपा, सुख-शांति और समृद्धि की कामना रखते हैं, तो प्रतिपदा तिथि यानी नवरात्र के पहले दिन से पूर्व ही इन 5 प्रमुख कार्यों को समय रहते पूरा कर लें।
नवरात्र शुरू होने से कम से कम एक दिन पहले घर के कोने-कोने की विधिवत सफाई कर लें। पूजा स्थल और मंदिर की विशेष रूप से धुलाई करें और भगवान की सभी मूर्तियों व विग्रहों को गंगाजल अथवा पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार से ही देवी लक्ष्मी और मां दुर्गा का आगमन होता है, इसलिए दरवाजे के सामने किसी भी प्रकार का कूड़ा-कचरा, पुराने टूटे जूते-चप्पल या जाले न रहने दें। सफाई के उपरांत पूरे घर में, विशेषकर प्रवेश द्वार और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में गंगाजल छिड़ककर नकारात्मक ऊर्जा को निष्कासित करें। मुख्य द्वार पर आम या अशोक के ताजे पत्तों का तोरण यानी वंदनवार बांधना और हल्दी-कुमकुम से स्वास्तिक बनाना मां भगवती के स्वागत का सबसे शुभ संकेत माना जाता है।
नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक घर में पूर्ण सात्विक माहौल रहना अनिवार्य है। व्रत शुरू होने से पहले रसोईघर की अच्छी तरह सफाई करें और वहां रखे प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन, बासी अन्न या किसी भी तरह के नशीले पदार्थों को घर से पूरी तरह बाहर कर दें। यदि आप नौ दिनों तक उपवास रखने जा रहे हैं, तो सेंधा नमक, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, मखाना और व्रत में इस्तेमाल होने वाले शुद्ध मसालों का अलग से डिब्बा तैयार करके रख लें। यह सुनिश्चित करें कि व्रत का भोजन बनाने के लिए उपयोग होने वाले बर्तन पूरी तरह स्वच्छ हों और उन्हें सामान्य भोजन पकाने वाले बर्तनों से अलग रखा जाए। यह शुद्धि आपके मन और तन दोनों को साधना के लिए तैयार करती है।
घटस्थापना हमेशा शास्त्र सम्मत शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में ही की जाती है, जो अक्सर बहुत सीमित समय के लिए होता है। ऐसे में यदि पहले दिन सुबह-सुबह सामग्री ढूंढी जाए, तो मुहूर्त निकल जाने का भय रहता है। इसलिए एक दिन पहले ही मिट्टी का कलश या तांबे-पीतल का लोटा, जौ (जवारे) बोने के लिए मिट्टी का चौड़ा पात्र, साफ छनी हुई खेत या उपजाऊ मिट्टी, जटा वाला नारियल, लाल कलावा (मौली), आम के पांच या सात पत्ते, गंगाजल, रोली, अक्षत, सुपारी, लौंग, इलायची, कपूर, धूपबत्ती, शुद्ध देसी घी, हवन सामग्री और माता रानी की नई लाल चुनरी खरीदकर एक जगह सुरक्षित रख लें। सामग्री की यह पूर्व तैयारी आपको पूजा के समय मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में मदद करती है।
यदि आपके घर में नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है, तो इसकी तैयारी में कोई जल्दबाजी न करें। पीतल या मिट्टी के बड़े दीपक को पहले से साफ करके सुखा लें। अखंड ज्योति के लिए कलावे (सूती धागे) की मोटी और लंबी बाती पहले से तैयार कर लें ताकि बीच में बाती बदलने या बुझने का कोई जोखिम न रहे। इसके साथ ही दीपक को हवा के झोंकों से बचाने के लिए कांच की चिमनी (लैंप कवर) की व्यवस्था जरूर कर लें। पूजा के नौ दिनों के लिए पर्याप्त मात्रा में गाय का शुद्ध देसी घी या तिल का तेल पहले से लाकर रख लें। शास्त्रों में माना गया है कि अखंड ज्योति का बीच में बुझना अमंगलकारी होता है, इसलिए पहले से की गई मजबूत व्यवस्था इस संकट से बचाती है।
हिंदू सनातन परंपराओं के अनुसार, नवरात्र के पावन दिनों में व्रत रखने वाले साधकों के लिए बाल कटवाना, दाढ़ी-मूंछ बनवाना और नाखून काटना पूरी तरह वर्जित माना गया है। शास्त्रों में इन नौ दिनों को तपस्या और संयम का काल माना गया है, जिसमें शारीरिक श्रृंगार और शरीर के अंगों को काटने-तराशने से परहेज करने का विधान है। इसलिए यदि आपको हेयरकट कराना है या शेविंग व नाखून साफ करने हैं, तो घटस्थापना की सुबह से पहले ही यह कार्य निपटा लें। इसके अलावा, कलश स्थापना से पूर्व ही यह भी मानसिक संकल्प कर लें कि इन नौ दिनों के दौरान क्रोध, कलह, झूठ और किसी की निंदा से दूर रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे। जब आपकी बाहरी और आंतरिक दोनों तैयारियां पूर्ण होंगी, तभी मां दुर्गा की साधना फलीभूत होगी और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होगा।
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