
भागदौड़ भरी इस आधुनिक जिंदगी में हम सभी अक्सर अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों या करीबियों की परेशानियों को सुनते हैं और उन्हें ढाढस बंधाते हैं। लेकिन क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि किसी दूसरे का दुख दूर करते-करते या उन्हें दिलासा देते-देते आप खुद अंदर से बेहद थका हुआ, उदास और खालीपन से भरा हुआ महसूस करने लगें? अगर हां, तो सचेत हो जाइए। यह कोई आम शारीरिक थकान नहीं, बल्कि मनोविज्ञान की भाषा में इसे ‘इम्पैथी फटीग’ (Empathy Fatigue) या ‘कम्पाशेन फटीग’ कहा जाता है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें दूसरों के प्रति अत्यधिक सहानुभूति और संवेदना प्रकट करते-करते व्यक्ति खुद भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट जाता है।
हेल्थ और लाइफस्टाइल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जो लोग स्वभाव से बहुत ज्यादा संवेदनशील (Emotionally Sensitive) होते हैं, वे अनजाने में ही दूसरों के मानसिक बोझ को अपने सिर पर ले लेते हैं, जिससे उनकी खुद की मेंटल हेल्थ दांव पर लग जाती है।
क्यों और किन लोगों को सबसे ज्यादा शिकार बनाती है इम्पैथी फटीग?
इम्पैथी फटीग होने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं। सबसे पहला कारण यह है कि यदि आप अत्यधिक भावुक हैं, तो औरों का दर्द आपके दिलो-दिमाग पर बहुत जल्दी हावी हो जाता है। दूसरा, यदि आप दूसरों की मदद करने के बाद खुद को मानसिक रूप से रिकवर होने का पर्याप्त समय नहीं देते हैं, तो धीरे-धीरे आपके भीतर एक अजीब सा खालीपन पनपने लगता है। इसके अलावा, यदि आप खुद पहले से ही अपनी जिंदगी में कई तरह के तनावों या व्यक्तिगत परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो किसी और का रोना-धोना या नकारात्मक बातें आपके दिमाग पर अतिरिक्त बोझ डाल देती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन लोगों को अपनी जिंदगी में इमोशनल लिमिट यानी सीमाएं तय करना नहीं आता या जो किसी को ‘ना’ (No) नहीं कह पाते, वे इस मानसिक समस्या का सबसे पहला शिकार बनते हैं।
इन 6 बड़े लक्षणों से पहचानें कि कहीं आप भी तो इसके घेरे में नहीं हैं?
यदि आप इम्पैथी फटीग की गिरफ्त में आ रहे हैं, तो आपका शरीर और व्यवहार आपको कई तरह के संकेत देने लगता है। इसके मुख्य लक्षणों में व्यक्ति अचानक से अपनी भावनाओं के प्रति सुन्न हो जाता है और अपनों से ही खुद को डिस्कनेक्ट महसूस करने लगता है। ऐसे व्यक्ति को बहुत छोटी-छोटी बातों पर अचानक तेज गुस्सा या चिड़चिड़ापन आने लगता है और लाइफ के रोजमर्रा के छोटे काम भी पहाड़ जैसे भारी लगने लगते हैं। शारीरिक रूप से हर समय कमजोरी व थकान महसूस होना, लगातार सिरदर्द रहना, पेट में गड़बड़ी या अनिद्रा (Insomnia) की समस्या होना भी इसके बड़े लक्षण हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को अपने पसंदीदा कामों को करने में भी कोई मोटिवेशन नहीं मिलता और दूसरों की मदद करने के बावजूद मन में हमेशा एक नाउम्मीदी या अपराधबोध (Guilt) की भावना बनी रहती है।
मेंटल हेल्थ को तरोताजा रखने और इम्पैथी फटीग से बचने के बेहतरीन उपाय
इस गंभीर मानसिक स्थिति से खुद को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले आपको अपनी एनर्जी बचाने के लिए ‘इमोशनल बाउंड्री’ (इमोशनल सीमाएं) बनाना सीखना होगा। आपको यह समझना होगा कि आप हर किसी की समस्या को अकेले हल नहीं कर सकते। यदि आप डॉक्टर, नर्स, सोशल वर्कर या काउंसलर जैसे केयरगिविंग वाले किसी प्रोफेशन में हैं, तो काम के बीच-बीच में छोटे मानसिक ब्रेक जरूर लेते रहें। ऑफिस के सहकर्मियों या दोस्तों के साथ लंच के दौरान हमेशा गंभीर या भारी-भरकम विषयों पर चर्चा करने से बचें और माहौल को जितना हो सके हंसी-मजाक वाला और हल्का-फुल्का रखें।
अगर किसी गंभीर या दुखद बातचीत के दौरान आपको अपने जबड़े में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ या सीने में भारीपन जैसा महसूस होने लगे, तो तुरंत उस जगह से हट जाएं और कुछ देर के लिए खुली व ताजी हवा में वॉक करें। इसके अलावा, आपके जीवन में कम से कम एक ऐसा मजबूत रिश्ता (चाहे वो कोई सच्चा दोस्त हो, लाइफ पार्टनर हो या थेरेपिस्ट हो) जरूर होना चाहिए, जहां आपको खुद को मजबूत दिखाने की जरूरत न पड़े और आप अपना दिल खोलकर रख सकें। डिजिटल मीडिया पर बहुत ज्यादा दुखद खबरें, क्राइम शो या नकारात्मक कंटेंट देखना कम करें और उसकी जगह रील्स में जानवरों के फनी वीडियोज या कॉमेडी क्लिप्स देखें। जब भी तनाव ज्यादा बढ़े, तो तुरंत अपने चेहरे पर ठंडे या गुनगुने पानी के छींटे मारें, इससे शरीर की ‘वेगस नर्व’ (Vagus Nerve) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, जो हमारे मस्तिष्क, हृदय और पाचन तंत्र के बीच सिग्नलों को शांत करने का काम करती है।
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