
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाए जाने वाले सुहागिनों के सबसे बड़े और पावन पर्व हरियाली तीज का उल्लास आज पूरे देश में देखने को मिल रहा है। सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और माता पार्वती तथा भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं। इस बार हरियाली तीज का यह पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार इस विशेष दिन पर अद्भुत और दुर्लभ शिव योग का निर्माण हो रहा है, जो पूजा के फल को कई गुना अधिक बढ़ा देता है। यदि आप भी आज हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं और पूजा के सही समय, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि के बारे में जानना चाहती हैं, तो यह विस्तृत जानकारी आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। आइए जानते हैं आज के दिन के सभी प्रमुख मुहूर्त, पूजा का शुभ तरीका और इस पर्व से जुड़ी खास बातें।
हरियाली तीज पर बन रहा है अत्यंत शुभ ‘शिव योग’ का महासंयोग
वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष हरियाली तीज के पावन अवसर पर ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से एक बेहद पवित्र ‘शिव योग’ बन रहा है, जिसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में की गई पूजा, साधना और व्रत का फल कभी भी निष्फल नहीं होता है तथा जातक के समस्त पापों और कष्टों का नाश होता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह योग इसलिए भी खास है क्योंकि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और इसी योग के प्रभाव से उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त हुआ था। इस दिन महिलाएं सोलह शृंगार करके पूरी आस्था के साथ माता गौरी का ध्यान करती हैं और अपने सुहाग की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं।
पूजन के लिए आज के 5 सबसे उत्तम और श्रेष्ठ मुहूर्त
दिनभर में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए कई शुभ समय ज्योतिषीय गणना के अनुसार तय किए गए हैं, जिनका पालन करके व्रत और पूजन को पूर्ण फलदायी बनाया जा सकता है। आज के दिन का सबसे पहला और सुबह का ब्रह्म मुहूर्त पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है, जिसमें स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके अलावा दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह का अभिजित मुहूर्त है, जो किसी भी नए कार्य और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ होता है। तीसरा महत्वपूर्ण मुहूर्त दोपहर का गोधूलि बेला और प्रदोष काल का समय है, जब माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ की संयुक्त पूजा करना सबसे अधिक फलवान माना जाता है। चौथा और पांचवां मुहूर्त शाम के समय का अमृत काल और चर चौघड़िया का समय है, जिसमें महिलाएं अपने घरों में विधिवत कथा सुन सकती हैं और सामूहिक रूप से पूजा संपन्न कर सकती हैं।
हरियाली तीज की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि
हरियाली तीज की पूजा हमेशा विधि-विधान और पूरी श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और नए वस्त्र धारण करके सोलह शृंगार करें, क्योंकि सुहागन महिलाओं के लिए यह शृंगार बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके बाद अपने घर के मंदिर या किसी स्वच्छ स्थान पर चौकी सजाकर उस पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। अब वहां भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा की थाली में मां पार्वती को अर्पित करने के लिए सुहाग की सभी वस्तुएं जैसे चूड़ियां, महावर, सिंदूर, बिंदी, आलता और नए वस्त्र सजाएं। इसके बाद भगवान गणेश का आह्वान करते हुए पूजन शुरू करें और फिर माता पार्वती व शिवजी को बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान हरियाली तीज की कथा का श्रवण अवश्य करें या स्वयं पढ़ें।
व्रत का समापन और इस पर्व का पौराणिक व सामाजिक महत्व
हरियाली तीज का यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन शाम को कथा सुनने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और अपने पति का आशीर्वाद प्राप्त करके व्रत का पारण करती हैं। इस पर्व का सांस्कृतिक महत्व भी बहुत अधिक है क्योंकि इस दिन महिलाएं पारंपरिक हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाकर उत्सव मनाती हैं। यह त्योहार प्रकृति के प्रति प्रेम और महिलाओं के आपसी सौहार्द का एक अनूठा प्रतीक है। आज के दिन सच्चे मन से शिव-पार्वती की आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है तथा वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं।
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