दिल्ली मेट्रो में फर्श पर बैठने, खाना खाने या महिला कोच में घुसने पर कितना चालान? DMRC के कड़े नियम और पेनाल्टी की पूरी लिस्ट

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) देश की सबसे बड़ी और आधुनिक रैपिड ट्रांजिट प्रणालियों में से एक है, जिसमें रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं। सफर को सुरक्षित, सुगम और सभी के लिए सुविधाजनक बनाए रखने के लिए दिल्ली मेट्रो रेलवे (संचालन एवं रखरखाव) अधिनियम, 2002 (Delhi Metro Railway Act, 2002) के तहत सख्त नियम बनाए गए हैं। अक्सर जानकारी के अभाव में या लापरवाही के चलते यात्री मेट्रो के भीतर फर्श पर बैठ जाते हैं, कोच में खाना खाने लगते हैं, या पुरुष यात्री आरक्षित महिला कोच में प्रवेश कर जाते हैं। फ्लाइंग स्क्वॉड और सुरक्षा जांच दल ऐसे उल्लंघनों पर तुरंत जुर्माना वसूलते हैं। यात्रा के दौरान किसी भी तरह की कानूनी व वित्तीय परेशानी से बचने के लिए डीएमआरसी के प्रमुख नियमों और पेनाल्टी दरों को जानना बेहद जरूरी है।

मेट्रो कोच में लंबी दूरी तय करते समय कई यात्री सीट न मिलने पर फर्श पर बैठ जाते हैं, जबकि कुछ लोग यात्रा के दौरान ही स्नैक्स या खाना खाने लगते हैं। डीएमआरसी के नियमों के अनुसार, कोच के फर्श पर बैठना अन्य यात्रियों के आवागमन में बाधा पैदा करता है और आपातकालीन स्थिति में निकासी को प्रभावित करता है। वहीं कोच के भीतर खाना खाने या कुछ पीने से गंदगी फैलने और दुर्गंध का खतरा रहता है।

  • फर्श पर बैठना (Sitting on the floor): दिल्ली मेट्रो अधिनियम की धारा 59 के तहत उपद्रव (Nuisance) की श्रेणी में आता है। इसके लिए यात्री पर ₹200 का जुर्माना लगाया जाता है।

  • खाना खाना और गंदगी फैलाना (Eating/Littering/Spitting): मेट्रो के भीतर खुलेआम भोजन करना, कचरा फेंकना या थूकना प्रतिबंधित है। ऐसा करते पाए जाने पर ₹200 का जुर्माना लगाया जाता है और यात्रा टिकट या स्मार्ट कार्ड जब्त किया जा सकता है।

दिल्ली मेट्रो की हर ट्रेन का पहला कोच (चलने की दिशा में) विशेष रूप से महिला यात्रियों के लिए आरक्षित होता है।

  • नियम: इस कोच में केवल महिला यात्री और उनके साथ 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे ही सफर कर सकते हैं। किसी भी वयस्क पुरुष यात्री का इसमें प्रवेश पूरी तरह वर्जित है।

  • जुर्माना: यदि कोई पुरुष यात्री महिला कोच में यात्रा करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर धारा 64 के तहत ₹250 का जुर्माना लगाया जाता है। इसके साथ ही उसे अगले स्टेशन पर कोच से उतार दिया जाता है और यदि वह बहस या विरोध करता है, तो सीआईएसएफ (CISF) या दिल्ली मेट्रो पुलिस के हवाले किया जा सकता है।

मेट्रो परिसर में बिना वैध टिकट या टोकन के यात्रा करना दंडनीय अपराध है। यदि कोई यात्री ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन (AFC) गेट फांदकर या किसी अन्य अवैध तरीके से सिस्टम में प्रवेश करता है, तो पकड़े जाने पर:

  • यात्री पर ₹50 का सांकेतिक जुर्माना और साथ ही मेट्रो नेटवर्क का अधिकतम किराया (Maximum Fare) वसूला जाता है।

  • इसके अलावा, यदि कोई यात्री तय दूरी या स्टेशन से आगे अनाधिकृत रूप से यात्रा करता है, तो अतिरिक्त दूरी का किराया और अंतर शुल्क लिया जाता है। समय सीमा (Time Limit) से अधिक समय तक स्टेशन परिसर में रुके रहने पर भी प्रति घंटे के हिसाब से ओवरस्टे पेनल्टी लागू होती है।

डीएमआरसी परिसर और ट्रेनों के भीतर सुरक्षा व मर्यादा बनाए रखने के लिए विभिन्न उल्लंघनों पर तय जुर्माने का ब्योरा इस प्रकार है:

  • शराब पीकर यात्रा करना या अभद्र व्यवहार (Drunkenness & Misbehaviour): ₹500 तक का जुर्माना और टिकट/पास की जब्ती।

  • मेट्रो ट्रैक पर चलना या अनाधिकृत प्रवेश (Walking on Tracks): ₹500 तक का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल।

  • आपत्तिजनक या खतरनाक सामग्री ले जाना (Dangerous Goods): ₹5,000 तक का जुर्माना और 4 साल तक का कारावास।

  • मेट्रो संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या पोस्टर चिपकाना (Defacing Property): ₹1,000 तक का जुर्माना या 6 महीने की जेल।

  • इमरजेंसी अलार्म का दुरुपयोग (Misuse of Alarm/PEB): बिना वैध आपात स्थिति के इमरजेंसी बटन दबाने पर ₹1,000 का जुर्माना या 1 वर्ष की जेल।

दिल्ली मेट्रो में सफर करते समय हमेशा निर्दिष्ट सीटों का उपयोग करें और दिव्यांग, बुजुर्ग तथा गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को खाली छोड़ें। मेट्रो कोच के भीतर हेडफोन लगाकर ही संगीत सुनें ताकि अन्य यात्रियों को असुविधा न हो। स्टेशन परिसर और ट्रेन के भीतर स्वच्छता बनाए रखें तथा किसी भी नियम उल्लंघन या संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में 24×7 DMRC हेल्पलाइन 155370 या सुरक्षा हेल्पलाइन 1511 पर तुरंत सूचित करें।