दिल्ली के जंतर-मंतर पर 17 दिनों से भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं सोनम वांगचुक

नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भीषण गर्मी के बीच पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। कभी 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा मिलने पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खुलकर धन्यवाद करने वाले वांगचुक आज केंद्र सरकार की नीतियों के धुर विरोधी बन चुके हैं। जंतर-मंतर पर इस समय ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे इस बड़े आंदोलन में वांगचुक एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं, जहां वे देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

लद्दाख की स्वायत्तता और वादों से यू-टर्न पर भाजपा से नाराजगी

सोनम वांगचुक के इस तीखे रुख के पीछे लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार के साथ चल रहा पुराना विवाद है। साल 2020 के चुनावी घोषणापत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लद्दाख के जनजातीय समाज के हितों की रक्षा के लिए इसे संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत लाने का प्रमुख वादा किया था। वांगचुक का आरोप है कि सरकार ने इस वादे से पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है। लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा, संवैधानिक सुरक्षा उपाय और अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर साल 2025 में भी वांगचुक ने लेह में 21 दिनों का लंबा अनशन किया था, जिसके दौरान भड़की हिंसा के बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया था और मार्च 2026 में 6 महीने बाद उन्हें रिहाई मिली थी।

केंद्र सरकार के गंभीर आरोप: अरब स्प्रिंग और भड़काऊ बयानों का दावा

दूसरी ओर, केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन के तरीकों पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, 2025 में लेह स्थित भाजपा कार्यालय पर हुए हमलों और हिंसक झड़पों के लिए सीधे तौर पर वांगचुक के भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार ठहराया गया था। केंद्र का तर्क था कि जब सरकार ‘एपेक्स बॉडी लेह’ और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस’ (KDA) के साथ उच्चाधिकार प्राप्त समिति के माध्यम से लद्दाख के मुद्दों पर सक्रिय बातचीत कर रही थी, तब वांगचुक ने जानबूझकर अनशन जारी रखा। सरकार ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने जनता को गुमराह करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए ‘अरब स्प्रिंग’ और नेपाल के ‘जेन जेड’ (Gen Z) हिंसक छात्र आंदोलनों का भड़काऊ संदर्भ देकर भीड़ को उकसाया और हिंसा भड़कते ही खुद एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ‘करो या मरो’ का संकल्प

लद्दाख के मूल मुद्दों के साथ-साथ अब देश के राष्ट्रीय शिक्षा विवाद में कूदने के अपने फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए 18 वर्षीय युवाओं के रोल मॉडल सोनम वांगचुक ने कहा कि पिछले 40 सालों से शिक्षा उनके दिल के सबसे करीब रही है। जब देश का युवा परीक्षाओं में धांधली और लचर व्यवस्था को लेकर सड़कों पर रो रहा हो, तो वे मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। 28 जून 2026 से जारी इस अनशन को लेकर उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा, “मुझे दुख है कि मुझे दोबारा इस कठिन रास्ते पर बैठना पड़ रहा है। यह आसान नहीं है, इस भीषण गर्मी में अनशन से मेरी मौत भी हो सकती है, लेकिन जब तक देश के युवाओं को न्याय नहीं मिलता और लद्दाख से किए गए वादे पूरे नहीं होते, मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा।”