
राजधानी दिल्ली और आसपास के पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हवा की धीमी गति और मौसमी बदलावों के चलते वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई (AQI) 325-327 के आंकड़े को पार कर ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में प्रवेश कर गया है। दिल्ली के कई इलाकों में सुबह से ही आसमान में धुंध और स्मॉग की मोटी परत छाई हुई है, जिससे लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हो रही है। वायु प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का दूसरा चरण यानी ‘ग्रैप-2’ (GRAP Stage-II) तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले कई प्रमुख स्रोतों पर सीधी पाबंदी लगा दी गई है।
ग्रैप-2 लागू होने के साथ ही सबसे बड़ा झटका होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को लगा है। नए नियमों के तहत दिल्ली-एनसीआर के सभी होटलों, रेस्तरां, फूड स्टॉल्स और खुले भोजनालयों में कोयले और लकड़ी से चलने वाले पारंपरिक तंदूर के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि खाने-पीने के प्रतिष्ठानों को अब केवल बिजली या एलपीजी/पीएनजी (गैस-आधारित) उपकरणों का ही उपयोग करना होगा। खुले में लकड़ी, कोयला या बायोमास जलाना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। इसके अलावा, रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) को निर्देश दिया गया है कि वे सर्दियों में रात के समय सुरक्षा गार्डों को ठंड से बचाने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराएं, ताकि वे खुले में अलाव या कचरा न जलाएं।
दिल्ली-एनसीआर में हवा को और दूषित होने से बचाने के लिए कमर्शियल और आवासीय परिसरों में डीजल जनरेटर सेट्स (DG Sets) के नियमित संचालन पर सख्त प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। केवल सीएनजी, पीएनजी या ड्यूल-फ्यूल हाइब्रिड किट से चलने वाले जनरेटरों को ही निर्धारित उत्सर्जन मानकों के साथ चलाने की अनुमति होगी। हालांकि, अस्पतालों, मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं, रेलवे स्टेशनों और मेट्रो जैसी अति-आवश्यक जनसुविधाओं को इस प्रतिबंध से अस्थायी छूट दी गई है। वहीं, बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति के अलावा किसी को भी डीजल जनरेटर चलाने की नौबत न आए।
निजी वाहनों (कारों और दोपहिया वाहनों) के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने और सड़कों पर ट्रैफिक जाम घटाने के लिए ग्रैप-2 के तहत अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का आदेश दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि लोग सड़कों पर अपनी गाड़ियां निकालने के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। मुसाफिरों की सुविधा के लिए दिल्ली मेट्रो (DMRC) ने अपनी सभी लाइनों पर प्रतिदिन 40 अतिरिक्त फेरे (Daily Additional Trips) चलाने का ऐलान किया है ताकि स्टेशनों पर भीड़ न जुटे और लोग आसानी से आवागमन कर सकें। इसके साथ ही सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों के फेरों में भी इजाफा किया जा रहा है।
ग्रैप-2 के तहत आम नागरिकों, व्यापारियों और निर्माण एजेंसियों के लिए निम्नलिखित पाबंदियां प्रभावी हो गई हैं:
-
कोयला और लकड़ी का उपयोग: होटलों, रेस्टोरेंट और ढाबों में कोयले व लकड़ी से चलने वाले तंदूर और खुली भट्ठियों के संचालन पर पूरी रोक।
-
डीजल जनरेटर: अनधिकृत औद्योगिक व वाणिज्यिक डीजल जनरेटर सेट चलाने पर पाबंदी (इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर)।
-
धूल उड़ाने वाली खुली गतिविधियां: निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के बिना की जाने वाली खुली तोड़फोड़, खुदाई और रेत-सीमेंट की खुली आवाजाही पर रोक।
-
कचरा जलाना: सूखे पत्ते, कूड़ा, प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट को खुले में जलाने पर शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) और भारी जुर्माना।
-
गैर-पीयूसी वाहन: बिना वैध पीयूसी (PUCC) प्रमाणपत्र वाली गाड़ियों की पहचान कर चालान काटे जा रहे हैं।
सार्वजनिक परिवहन जैसे दिल्ली मेट्रो, डीटीसी और क्लस्टर बसें, सीएनजी व इलेक्ट्रिक ऑटो पूरी क्षमता के साथ संचालित होते रहेंगे। आवश्यक वस्तुएं, फल-सब्जी और दूध की आपूर्ति पर कोई रोक नहीं है। सीएक्यूएम (CAQM) ने नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी करते हुए अपील की है कि बुजुर्ग, बच्चे और सांस के मरीज सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें। जहां तक संभव हो, लोग घर से काम (WFH) करें, कारपूल अपनाएं और निजी वाहनों के बजाय मेट्रो या बसों का उपयोग करें। यदि आने वाले दिनों में मौसमी प्रतिकूलता के कारण एक्यूआई 400 के पार जाता है, तो ग्रैप का तीसरा चरण लागू कर निर्माण कार्यों और गैर-बीएस 6 डीजल गाड़ियों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
girls globe
