
कुदरत ने इंसान को जो सबसे अनमोल और खूबसूरत तोहफा दिया है, वह है नींद। नींद केवल दिनभर की शारीरिक थकान मिटाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी चेतना और जीवन ऊर्जा को नया जीवन देने का एक बहुत बड़ा आयाम है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद से जूझ रहे लोगों के लिए एक शांत और सुकून भरी नींद पाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं लगता। इस समस्या से पार पाने के लिए हमें नींद और ध्यान (Meditation) के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू को गहराई से समझना होगा। जब हम ‘सजगतापूर्ण विश्राम’ की स्थिति में पहुंचते हैं, तो यह हमें भीतर से तरोताजा कर गहरी नींद की ओर ले जाता है। हमारे जीवन में ऊर्जा के मुख्य रूप से चार स्रोत होते हैं— भोजन, नींद, श्वास और आसपास का वातावरण। इनमें से नींद हमारी ऊर्जा को फिर से रीचार्ज करने का सबसे मजबूत माध्यम है।
चेतना की 4 अवस्थाएं और ‘तुरीय’ का अद्भुत आध्यात्मिक रहस्य
नींद केवल ऊर्जा का जरिया ही नहीं, बल्कि हमारी चेतना की एक बेहद महत्वपूर्ण स्थिति भी है। भारतीय दर्शन के अनुसार, हमारी चेतना रोज 4 अवस्थाओं से होकर गुजरती है— जागरण (जागना), स्वप्न (सपने देखना), सुषुप्ति (गहरी नींद) और तुरीय। पहली दो अवस्थाओं यानी जागने और सपने देखने से हम पूरी तरह वाकिफ होते हैं। लेकिन गहरी नींद की अवस्था में हमारी सजगता (Awareness) खत्म हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति गहरी नींद के दौरान भी भीतर से सजग रह सके, तो उसे चेतना की चौथी अवस्था यानी ‘तुरीय’ का अनुभव होता है। तुरीय वह अवस्था है जहां परम विश्राम और पूर्ण सजगता एक साथ मौजूद रहते हैं। ध्यान के नियमित अभ्यास से ही इस दिव्य अवस्था को हासिल किया जा सकता है।
हमारे शरीर के 3 स्तर: स्थूल, सूक्ष्म और ‘कारण शरीर’ का विज्ञान
अनिद्रा और नींद के बाद भी लगने वाली थकान के मूल कारण को समझने के लिए शास्त्रों में बताए गए शरीर के 3 स्तरों को जानना जरूरी है:
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स्थूल शरीर (Physical Body): यह वह शरीर है जिसे हम देख और छू सकते हैं। यह पांच तत्वों से बना है और रक्त, मांस, अस्थि, मज्जा आदि पर टिका है।
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सूक्ष्म शरीर (Subtle Body): यह विचारों, भावनाओं और कल्पनाओं से बनता है। जब हम सपने देख रहे होते हैं, तब हमारा सूक्ष्म शरीर ही सक्रिय होता है। इसी वजह से सपनों में हम बिना शारीरिक इंद्रियों का इस्तेमाल किए रंग देख सकते हैं, खुशबू सूंघ सकते हैं और स्पर्श महसूस कर सकते हैं।
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कारण शरीर (Causal Body): यह हमारे शरीर का तीसरा और सबसे गहरा स्तर है, जो केवल विशुद्ध ऊर्जा का रूप है। जब हम गहरी नींद (सुषुप्ति) में होते हैं, तब हम अपने कारण शरीर से जुड़े होते हैं। यही कारण शरीर हमारी पूरी ऊर्जा, उत्साह और स्फूर्ति का मुख्य स्रोत है। यही वजह है कि गहरी नींद से उठने के बाद हम पूरी तरह ऊर्जावान महसूस करते हैं।
भरपूर सोने के बाद भी क्यों बनी रहती है थकान?
अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि 8 घंटे सोने के बाद भी उन्हें सुस्ती और थकान महसूस होती है। इसका कारण हमारे सूक्ष्म शरीर में छिपी अति-सक्रियता है। दिनभर का तनाव, चिंता और ओवरथिंकिंग हमारे सूक्ष्म शरीर में उथल-पुथल मचाते हैं, जिससे नींद का ज्यादातर समय गहरे विश्राम में जाने के बजाय डरावने या लगातार सपने देखने में बीत जाता है। ऐसे में हम ‘कारण शरीर’ के संपर्क में नहीं आ पाते और शरीर को अपेक्षित ऊर्जा नहीं मिल पाती। इस मानसिक बोझ और सपनों की उलझन को खत्म करने के लिए ध्यान सबसे कारगर जरिया साबित होता है।
ध्यान क्या है? जानिए ध्यान के 3 स्वर्णिम नियम
सरल शब्दों में कहें तो ‘सजगतापूर्ण विश्राम’ ही ध्यान है। ध्यान का मतलब आंखें बंद करके जबरन कुछ सोचना या किसी चीज को पाना नहीं है, बल्कि अपने ‘कारण शरीर’ यानी उस परम शून्यता से जुड़ना है जो ऊर्जा का अटूट भंडार है। ध्यान में उतरने के 3 मूलभूत नियम हैं:
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पहला नियम – अप्रयत्न (Effortlessness): किसी भी काम को करने के लिए प्रयास की जरूरत होती है, लेकिन विश्राम के लिए किसी प्रयास की जरूरत नहीं होती। ध्यान में कोई जोर-जबरदस्ती या कोशिश नहीं करनी होती, बस शांत हो जाना होता है।
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दूसरा नियम – अचाह (Desirelessness): ध्यान में बैठते समय मन में यह भाव होना चाहिए कि ‘मुझे इस वक्त कुछ भी नहीं चाहिए’।
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तीसरा नियम – अकिंचन (Nothingness): इस बात को स्वीकार करना कि ‘मैं इस क्षण कुछ भी नहीं हूं’। न अमीर, न गरीब, न ज्ञानी, न अज्ञानी। जब आप इन तीनों नियमों को अपनाते हैं, तो ध्यान अपने आप घटित होने लगता है।
नींद का न्यूरोसाइंस: मेलेटोनिन, ब्रेन वेव्स और रिलैक्सेशन मोड
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ध्यान हमारी नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) को सुधारने में बेहद मददगार है। ध्यान करने से शरीर में ‘मेलेटोनिन’ (Melatonin) नाम के हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो हमारी नींद के चक्र को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, ध्यान करने से मस्तिष्क में ‘अल्फा’ और ‘थीटा’ तरंगें सक्रिय होती हैं, जो दिमाग को गहरे विश्राम की ओर ले जाती हैं। ध्यान से तनाव बढ़ाने वाला ‘कोर्टिसोल’ (Cortisol) हार्मोन कम होता है और शरीर का ‘पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ (Parasympathetic Nervous System) एक्टिव हो जाता है, जिससे मन शांत होता है और सहज ही गहरी नींद आ जाती है।
अनिद्रा (Insomnia) की समस्या से मुक्ति पाने के आसान और अचूक उपाय
अगर आप भी रात में देर तक करवटें बदलते रहते हैं या अनिद्रा के शिकार हैं, तो ‘योग निद्रा’ (Yoga Nidra) और ‘गाइडेड मेडिटेशन’ (Guided Meditation) आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं।
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रात को सोने से पहले का ध्यान: सोने से ठीक 15 से 20 मिनट पहले किया गया ध्यान आपके तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और दिमाग में चल रहे विचारों के बवंडर को रोक देता है।
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भ्रामरी प्राणायाम और श्वास क्रियाएं: प्राणायाम के जरिए जब शरीर में ‘प्राण शक्ति’ का स्तर बढ़ता है, तो नकारात्मक सोच अपने आप दूर हो जाती है। भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क की नसों को सुकून देकर अनिद्रा को जड़ से समाप्त करने में मदद करता है।
ध्यान अवचेतन मन (Subconscious Mind) में जमा दिनभर के कचरे की सफाई कर देता है। नियमित ध्यान के अभ्यास से न केवल जल्दी और गहरी नींद आती है, बल्कि अगली सुबह आप एक नई ऊर्जा, उत्साह और ताजगी के साथ जागते हैं।
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