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त्योहारों से पहले आम आदमी को बड़ी राहत: खाने के तेल पर आयात शुल्क में 10% तक की भारी कटौती, नई दरें आज से लागू; जानिए कितना सस्ता होगा तेल

नई दिल्ली। आगामी त्योहारी सीजन यानी नवरात्रि, दशहरा और दीपावली से ठीक पहले केंद्र सरकार ने देश के आम उपभोक्ताओं, गृहणियों और व्यापारियों को महंगाई के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा तोहफा दिया है। रसोई के बजट को संतुलित करने और खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय ने विभिन्न खाद्य तेलों के आयात पर लगने वाले मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty – BCD) में 5% से लेकर 10% तक की कटौती करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, संशोधित नई दरें आज (24 सितंबर 2026) से देश भर के सभी बंदरगाहों और कस्टम चौकियों पर प्रभावी रूप से लागू कर दी गई हैं।

भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश है, जो अपनी कुल घरेलू खपत का 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से मंगाता है। पिछले कुछ महीनों से अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में सोयाबीन, पामोलिन और सनफ्लावर ऑयल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा था, जिसके चलते घरेलू खुदरा बाजारों में भी रिफाइंड और सरसों तेल के दाम लगातार चढ़ रहे थे। त्योहारों के दौरान मिठाई, नमकीन, स्नैक्स और पकवानों की भारी खपत के कारण खाद्य तेलों की मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे नाजुक समय में आयात शुल्क घटाने का यह रणनीतिक फैसला घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और खुदरा कीमतों में संभावित गिरावट लाने में गेम-चेंजर साबित होगा।

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत कच्चे खाद्य तेल (Crude Edible Oils) और परिष्कृत यानी रिफाइंड खाद्य तेल (Refined Oils) दोनों श्रेणियों के बेसिक कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है।

कच्चे और रिफाइंड तेलों की संशोधित शुल्क संरचना इस प्रकार है:

खाद्य तेल की श्रेणी (Edible Oil Type) पुराना आयात शुल्क नया संशोधित शुल्क (आज से प्रभावी) शुद्ध कटौती (%)
कच्चा सूरजमुखी तेल (Crude Sunflower Oil) 10% 0% (पूरी तरह शुल्क-मुक्त) 10% की कटौती
कच्चा पाम तेल (Crude Palm Oil – CPO) 10% 5% 5% की कटौती
कच्चा सोयाबीन तेल (Crude Soyabean Oil) 10% 5% 5% की कटौती
रिफाइंड सूरजमुखी तेल (Refined Sunflower) 32.5% 22.5% 10% की कटौती
रिफाइंड पाम तेल (RBD Palmolein) 32.5% 27.5% 5% की कटौती
रिफाइंड सोयाबीन तेल (Refined Soyabean) 32.5% 27.5% 5% की कटौती

इस शुल्क संशोधन में सबसे बड़ा लाभ कच्चे सूरजमुखी के तेल को मिला है, जिस पर 10 प्रतिशत के पूरे मूल सीमा शुल्क को समाप्त करके शून्य (Duty-Free) कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर भी सीमा शुल्क में सीधी 10% की भारी कटौती की गई है। इसके साथ ही, कच्चे और रिफाइंड तेलों के बीच ड्यूटी डिफरेंशियल (Duty Differential) को भी संतुलित रखा गया है ताकि देश के घरेलू तेल शोधन कारखानों (Refineries) का संचालन भी सुचारू रूप से चलता रहे।

आयात शुल्क घटने की खबर के बाद आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुकानों पर तेल के पैकेट और टिन कब तक सस्ते होंगे। कमोडिटी विश्लेषकों और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, आयात शुल्क में कमी का असर आने वाले 7 से 15 दिनों के भीतर खुदरा बाजार में दिखना शुरू हो जाएगा:

  1. आयात लागत में गिरावट: सीमा शुल्क घटने से बंदरगाहों पर आयातित तेल की लैंडेड कॉस्ट (Landed Cost) प्रति टन काफी कम हो जाएगी।

  2. प्रति लीटर ₹5 से ₹10 तक की संभावित राहत: खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के जानकारों का अनुमान है कि इस नीतिगत फैसले से खुदरा बाजार में सोयाबीन तेल, पामोलिन और सूरजमुखी तेल की प्रति लीटर कीमतों में ₹5 से लेकर ₹10 तक की कमी देखने को मिल सकती है।

  3. पुराने स्टॉक की निकासी: तेल कंपनियों और बड़े थोक व्यापारियों के पास पहले से जो पुराना आयातित स्टॉक मौजूद है, उसकी आपूर्ति सामान्य दरों पर होने के बाद जैसे ही नई दरों वाला शिपमेंट बाजारों में पहुंचेगा, खुदरा एमआरपी (MRP) में राहत मिलना तय है।

भारत सरकार के सामने एक तरफ जहां आम जनता को सस्ता तेल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू तिलहन उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा करना भी एक बड़ी प्राथमिकता है। देश में इस समय खरीफ तिलहन फसलों—विशेष रूप से सोयाबीन और मूंगफली—की कटाई और बाजार में आवक का समय नजदीक आ रहा है।

यदि विदेश से अत्यधिक सस्ता तेल बेरोकटोक आयात होता है, तो घरेलू मंडियों में सोयाबीन और सरसों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिरने का जोखिम रहता है। इसी संतुलन को साधने के लिए सरकार ने शुल्क को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय एक संतुलित कटौती का रास्ता चुना है ताकि विदेशी तेलों की आवक से केवल त्योहारी मांग की पूर्ति हो सके और स्थानीय किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य भी मिलता रहे। उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने सभी तेल प्रसंस्करण कंपनियों और ब्रांड्स को निर्देश दिया है कि वे सरकार द्वारा दी गई इस टैक्स कटौती का पूरा लाभ अंतिम उपभोक्ताओं तक तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर करें।