
भारत सरकार द्वारा देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार (Drug Trafficking) को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए लगातार ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) में ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ एक बहुत बड़ा और निर्णायक सैन्य व खुफिया अभियान चलाया है, जिसका नाम ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ (Operation Trishul) रखा गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा की है कि इस बड़े ऑपरेशन के तहत पूर्वोत्तर के तीन प्रमुख राज्यों में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की गई है। इस कार्रवाई से लगभग 100 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क (Hawala Network) का पर्दाफाश हुआ है, जिससे ड्रग्स माफियाओं में भारी हड़कंप मच गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत की गई इस कार्रवाई की मुख्य बातें क्या हैं और सरकार का ‘नशा मुक्त भारत’ का विजन क्या है।
पूर्वोत्तर राज्यों में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी, 100 करोड़ के हवाला कारोबार का पर्दाफाश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने देश में ड्रग्स के अवैध कारोबार और इसके जरिए चलने वाले वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ एक और ऐतिहासिक और बड़ा प्रहार किया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों और पूर्वोत्तर राज्यों—असम, मिजोरम और मणिपुर—की स्थानीय पुलिस ने मिलकर ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
इस बड़े अभियान के तहत 23 अक्टूबर को एक साथ 38 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने लगभग 100 करोड़ रुपये के अवैध हवाला लेनदेन का पर्दाफाश किया है। ड्रग्स के इस काले कारोबार से जुड़ी अवैध गतिविधियों पर नकेल कसते हुए अधिकारियों ने कुल 1424 बैंक खातों को तुरंत प्रभाव से फ्रीज (सीज) कर दिया है, ताकि आरोपी इन पैसों का इस्तेमाल न कर सकें। इसके अलावा, इस सिंडिकेट से जुड़ी लगभग 17.82 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों और अचल संपत्तियों को भी सरकार द्वारा कुर्क कर लिया गया है।
ड्रग्स कार्टेल के 18 शातिर तस्कर गिरफ्तार, भारी मात्रा में नकदी और विस्फोटक बरामद
इस व्यापक अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई को मुस्तैदी से आगे बढ़ाते हुए कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स कार्टेल से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं, जो लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
गिरफ्तारी और छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों के हाथ कई अहम सुराग और सामग्रियां लगी हैं। अधिकारियों ने इस दौरान 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये की नगदी भी बरामद की है। हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी इस बात का संकेत देती है कि यह ड्रग्स कार्टेल केवल तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार राष्ट्रविरोधी और आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब इन सभी आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, ताकि इस सिंडिकेट के अन्य बड़े चेहरों और मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ के जरिए चल रहा था अवैध नशीले पदार्थों का गंदा खेल
खुफिया एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आई है कि यह खतरनाक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स कार्टेल मुख्य रूप से भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के बीच स्थित कुख्यात ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ (Death Triangle Corridor) के रास्ते अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी को अंजाम दे रहा था। इस दुर्गम इलाके का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से सीमाओं के पार ड्रग्स और हथियारों की आवाजाही कर रहे थे।
केंद्र सरकार और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस ने आपसी बेहतरीन तालमेल और अत्याधुनिक सर्विलांस का इस्तेमाल करते हुए इस खतरनाक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस शानदार सफलता के लिए सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों और तीनों राज्यों की पुलिस टीमों को बधाई दी है। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि मोदी सरकार ने ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के जरिए ड्रग्स के खिलाफ एक और घातक प्रहार किया है और भारत तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक कि इस ड्रग्स कार्टेल के ताबूत में आखिरी कील नहीं ठोक दी जाती।
31 दिसंबर 2029 तक देश को पूरी तरह ‘नशा मुक्त’ बनाने का कड़ा संकल्प
गृह मंत्री अमित शाह ने देश के नाम अपने संदेश में एक बार फिर से इस बात को दोहराया कि केंद्र सरकार का मुख्य लक्ष्य आने वाले कुछ वर्षों में देश को पूरी तरह से नशामुक्त करना है। सरकार ने एक ठोस रोडमैप तैयार करते हुए यह संकल्प लिया है कि 31 दिसंबर 2029 तक देश से हर एक ड्रग नेटवर्क और तस्कर गिरोह का पूरी तरह से सफाया कर दिया जाएगा।
गृह मंत्रालय इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी छूट दी गई है। इसके साथ ही, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ ने भी अब तक देश के 35 करोड़ से अधिक नागरिकों तक अपनी पहुंच बना ली है। इस जन-जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को नशे के इस भयानक दलदल से सुरक्षित रखना और उन्हें सही दिशा दिखाना है। ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ जैसी सख्त कार्रवाइयों से यह साफ जाहिर होता है कि सरकार देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शने के मूड में नहीं है।
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