
भारतीय कॉर्पोरेट जगत के वित्तीय परिणामों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के आंकड़ों पर गौर करें तो देश की दिग्गज तेल और गैस कंपनियों ने मिलकर बाकी तमाम कंपनियों के शानदार प्रदर्शन पर पानी फेर दिया है। स्थिति यह है कि यदि इन तीन प्रमुख तेल कंपनियों के आंकड़ों को कुल मुनाफे की गिनती से बाहर कर दिया जाए, तो बाकी 211 कंपनियों का संयुक्त मुनाफा बढ़ने के बजाय सीधे 17% अधिक उछाल दर्ज करता।
किन तेल कंपनियों की वजह से बिगड़ी तस्वीर
इस पूरे वित्तीय समीकरण को बिगाड़ने में देश की तीन सबसे बड़ी तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों की मुख्य भूमिका रही है। इन चुनिंदा सरकारी और गैर-सरकारी दिग्गजों के मुनाफे में आई गिरावट या सुस्त रफ्तार का असर सीधे तौर पर बाजार के कुल आंकड़ों पर पड़ा है। जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मार्जिन में कमी और रिफाइनिंग कारोबार पर पड़े दबाव के कारण इन कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। यही वजह है कि जब पूरे बाजार का समग्र मूल्यांकन किया जाता है, तो इन दिग्गजों का भारी-भरकम कारोबार बाकी सभी सेक्टरों की अच्छी ग्रोथ को दबा देता है।
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