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डिजिलॉकर की आड़ में साइबर ठगों का बड़ा जाल: आधार और पैन कार्ड चुराने के लिए बनाए फर्जी ऐप्स

डिजिटल इंडिया मिशन के तहत भारत सरकार का ‘डिजिलॉकर’ (DigiLocker) देश के करोड़ों नागरिकों के लिए सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन का आरसी और शैक्षणिक डिग्रियों जैसे महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। लेकिन अब साइबर अपराधियों और अंतरराष्ट्रीय हैकर्स ने इसी सरकारी पहचान का दुरुपयोग करते हुए भोले-भाले नागरिकों के संवेदनशील दस्तावेजों में सेंधमारी करने का नया तरीका निकाला है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In और सुरक्षा शोधकर्ताओं ने देश भर के मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए एक जरूरी सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटरनेट पर आधिकारिक डिजिलॉकर के हूबहू दिखने वाले फर्जी ऐप्स, क्लोन वेबसाइट्स और खतरनाक एपीके फाइल्स तेजी से फैलाई जा रही हैं। इन जाली ऐप्स का इंटरफेस, रंग-रूप और लोगो बिल्कुल सरकारी डिजिलॉकर जैसा ही तैयार किया गया है, ताकि आम नागरिक बिना किसी संदेह के अपने सबसे गोपनीय सरकारी दस्तावेज इनमें अपलोड कर दें। यदि कोई व्यक्ति गलती से भी इन जाली प्लेटफॉर्म्स पर अपने दस्तावेजों की जानकारी या आधार नंबर दर्ज कर देता है, तो उसका संपूर्ण डिजिटल पहचान डेटा सीधे साइबर अपराधियों के विदेशी सर्वर्स तक पहुंच जाता है, जिससे पहचान की चोरी (Identity Theft) और बड़े वित्तीय घोटालों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

एक बार जब किसी नागरिक का आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस इन जाली ऐप्स के डेटाबेस में चला जाता है, तो साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल कई गैर-कानूनी और आपराधिक गतिविधियों के लिए करते हैं:

  • फर्जी बैंक खाते और लोन: आपके चुराए गए पैन कार्ड और आधार डेटा की मदद से फर्जी कागजात तैयार कर ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स से पर्सनल लोन उठा लिए जाते हैं। लोन की ईएमआई न चुकाए जाने पर असली नागरिक का सिबिल स्कोर बर्बाद हो जाता है और बैंक रिकवरी एजेंट्स के फोन आने लगते हैं।

  • म्यूल बैंक अकाउंट्स (Mule Accounts): साइबर ठग देश भर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाने के लिए आपके दस्तावेजों पर बिना आपकी जानकारी के फर्जी बैंक खाते खोल देते हैं, जिससे पुलिस की जांच में असली पीड़ित ही मुख्य आरोपी के रूप में नामजद हो जाता है।

  • फर्जी सिम कार्ड जारी कराना: आपके आधार कार्ड की प्रति का दुरुपयोग करके दर्जनों अवैध सिम कार्ड सक्रिय कर लिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल संगठित अपराध, फिरौती और आतंकी फंडिंग जैसे गंभीर मामलों में किया जाता है।

  • ब्लैकमेलिंग और फिरौती: कुछ जाली ऐप्स फोन में इंस्टॉल होते ही स्पाइवेयर की तरह काम करते हैं और डिवाइस की फोटो गैलरी और निजी फाइल्स को चुराकर यूजर से पैसों की उगाही शुरू कर देते हैं।

किसी भी नागरिक के लिए यह पहचानना बेहद आसान है कि उसके फोन में मौजूद डिजिलॉकर ऐप असली है या किसी हैकर का बिछाया हुआ जाल। गूगल प्ले स्टोर या ऐप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड करते समय इन 5 महत्वपूर्ण बातों की जांच अवश्य करें:

  • डेवलपर का नाम (Developer Name): असली डिजिलॉकर ऐप के नीचे डेवलपर के रूप में हमेशा “National eGovernance Division, Government of India” (NeGD) लिखा होता है। यदि डेवलपर के स्थान पर किसी निजी कंपनी, व्यक्ति का नाम, या कोई अन्य अजीब स्पेलिंग (जैसे Digital Locker Corp, Govt Tech Apps आदि) लिखी हो, तो वह 100% फर्जी ऐप है।

  • डाउनलोड्स की संख्या (Total Downloads): भारत सरकार के असली डिजिलॉकर ऐप को अब तक 10 करोड़ (100 Million+) से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। यदि आप जो ऐप देख रहे हैं उसके डाउनलोड्स केवल कुछ हजार या कुछ लाख ही हैं, तो समझ जाएं कि वह हाल ही में बनाया गया क्लोन ऐप है।

  • आधिकारिक वेबसाइट का डोमेन (.gov.in): डिजिलॉकर की एकमात्र अधिकृत और वैध वेबसाइट https://www.digilocker.gov.in है। भारत सरकार की सभी आधिकारिक वेबसाइट्स के अंत में ‘.gov.in’ अनिवार्य रूप से होता है। यदि आपको ‘.com’, ‘.org’, ‘.net’, ‘.in’ या किसी अन्य एक्सटेंशन वाली वेबसाइट पर डिजिलॉकर के नाम से लॉगिन करने या ऐप डाउनलोड करने को कहा जाए, तो वह फर्जी लिंक है।

  • अनावश्यक परमिशन की मांग: असली डिजिलॉकर ऐप केवल जरूरी बुनियादी अनुमतियां मांगता है। यदि कोई ऐप आपसे फोन की ‘एक्सेसिबिलिटी सर्विस’, आपके पूरे कॉन्टैक्ट्स की लिस्ट, कॉल लॉग्स या व्हाट्सएप मैसेज पढ़ने की अनुमति मांगता है, तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें क्योंकि सरकारी ऐप को इन चीजों की कभी आवश्यकता नहीं होती।

  • थर्ड पार्टी APK लिंक्स से दूरी: व्हाट्सएप, टेलीग्राम या एसएमएस पर अक्सर ऐसे संदेश आते हैं जिनमें लिखा होता है कि ‘डिजिलॉकर का नया अपडेटेड वर्जन पाने के लिए इस लिंक से ऐप इंस्टॉल करें’। सरकार कभी भी किसी थर्ड-पार्टी लिंक या चैट मैसेज के जरिए एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए नहीं कहती।

हैकर गिरोह नागरिकों को भ्रमित करने के लिए ‘टाइपो-स्क्वैटिंग’ (Typosquatting) तकनीक का बड़े पैमाने पर सहारा लेते हैं। इसमें वे असली वेबसाइट के नाम से मिलती-जुलती फर्जी स्पेलिंग वाले डोमेन रजिस्टर करा लेते हैं—जैसे digiloker.in, digi-locker-gov.com, या digilockerapp.net।

सर्च इंजन पर जब कोई आम यूजर जल्दी में डिजिलॉकर सर्च करता है, तो ये हैकर्स गूगल पर स्पॉन्सर्ड ऐड (Sponsored Ads) चलाकर अपनी फर्जी वेबसाइट को सर्च परिणामों में सबसे ऊपर दिखा देते हैं। यूजर बिना यूआरएल की जांच किए उस लिंक पर क्लिक कर देता है और वहां मौजूद फर्जी लॉगिन पेज पर अपना आधार नंबर और सिक्योरिटी पिन दर्ज कर देता है। जैसे ही यूजर डेटा सबमिट करता है, वह जानकारी साइबर ठगों के सर्वर पर सुरक्षित हो जाती है और यूजर का मोबाइल फोन हैकर्स के रडार पर आ जाता है।

यदि आपको थोड़ा भी अंदेशा है कि आपने गलती से किसी अनधिकृत या संदिग्ध डिजिलॉकर ऐप को अपने फोन में इंस्टॉल कर लिया है, तो बिना घबराए तुरंत निम्नलिखित सुरक्षा कदम उठाएं:

  • ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल करें: सबसे पहले मोबाइल का इंटरनेट (Mobile Data / Wi-Fi) बंद करें। फोन की ‘Settings’ में जाकर ‘Apps’ सूची से उस संदिग्ध ऐप का सारा कैश व डेटा क्लियर करें और उसे फोन से परमानेंट अनइंस्टॉल कर दें।

  • आधार बायोमेट्रिक्स को तुरंत लॉक करें: अपनी पहचान का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच सक्रिय करें। यूआईडीएआई (UIDAI) के आधिकारिक पोर्टल myaadhaar.uidai.gov.in पर जाएं या आधिकारिक ‘mAadhaar’ ऐप का उपयोग करके अपनी ‘Biometrics Lock’ सुविधा को तुरंत चालू कर दें। एक बार बायोमेट्रिक्स लॉक हो जाने के बाद कोई भी व्यक्ति आपके फिंगरप्रिंट या आइरिस डेटा से आधार प्रमाणीकरण नहीं कर पाएगा।

  • डिजिलॉकर का वास्तविक पिन और पासवर्ड बदलें: किसी सुरक्षित कंप्यूटर या किसी अन्य विश्वसनीय डिवाइस पर आधिकारिक वेबसाइट (digilocker.gov.in) पर जाकर अपना 6 अंकों का सिक्योरिटी पिन और पासवर्ड तुरंत बदल लें।

  • बैंक खातों और सिबिल रिपोर्ट पर रखें नजर: अपने बैंक खाते के लेन-देन पर ध्यान दें। अपने बैंक को सूचित करें कि आपके दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका है। इसके साथ ही हर महीने अपनी मुफ्त क्रेडिट/सिबिल रिपोर्ट चेक करें ताकि पता चल सके कि आपके पैन नंबर पर कोई अज्ञात लोन खाता तो सक्रिय नहीं हुआ है।

  • साइबर पोर्टल पर तुरंत दर्ज कराएं शिकायत: डेटा चोरी या संदिग्ध ऐप की शिकायत दर्ज कराने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाएं या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) पोर्टल के ‘TAFCOP’ मॉड्यूल पर जाकर जांचें कि आपके नाम पर कितने मोबाइल नंबर पंजीकृत हैं; यदि कोई अनजान नंबर दिखे तो उसे पोर्टल से तुरंत ब्लॉक कराएं।