
भारतीय रेल से रोजाना करोड़ों यात्री अपने गंतव्य तक सफर करते हैं, लेकिन कई बार कुछ यात्रियों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतों से सहयात्रियों का सफर मुश्किल भरा हो जाता है। ट्रेन के कोच में तेज आवाज में गाने बजाना, बिना ईयरफोन के मोबाइल पर वीडियो देखना या देर रात तक लाउडस्पीकर पर फोन पर बातें करना आम शिकायतें बन चुकी हैं। इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय रेलवे ने सफर के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं। रेलवे के नियमों के मुताबिक, अगर कोई यात्री चलती ट्रेन में तेज आवाज में म्यूजिक बजाकर या शोर मचाकर दूसरों को परेशान करता है, तो उसके खिलाफ रेलवे एक्ट की धाराओं के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है और गंभीर मामलों में जेल की सजा भी हो सकती है।
रेल यात्रा के दौरान सभी यात्रियों को शांतिपूर्ण माहौल मिलना उनका कानूनी अधिकार है। रेलवे अधिनियम (Railway Act) की धारा 145 के तहत ट्रेन या स्टेशन परिसर में किसी भी तरह का उपद्रव करना, नशे की हालत में अशोभनीय व्यवहार करना या अन्य यात्रियों की शांति भंग करना गैरकानूनी माना गया है। यदि कोई यात्री अपने सहयात्रियों की आपत्ति के बावजूद तेज आवाज में संगीत बजाना जारी रखता है, मोबाइल का स्पीकर तेज रखता है या अभद्र भाषा का प्रयोग करता है, तो उसे कोच से उतारा जा सकता है। इसके साथ ही उस पर आर्थिक जुर्माना लगाने और मामले की गंभीरता को देखते हुए छह महीने तक की जेल भेजने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान है। रेलवे बोर्ड ने इस बाबत सभी जोनल कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सहयात्रियों को असुविधा पहुंचाने वाले किसी भी कृत्य पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
रेलवे के रात्रि यात्रा नियमों (Night Travel Rules) के तहत रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक का समय यात्रियों के विश्राम के लिए निर्धारित किया गया है। इस समयावधि में किसी भी यात्री को बिना ईयरफोन या हेडफोन के मोबाइल पर गाने सुनने या वीडियो देखने की सख्त मनाही है। इसके अलावा, रात 10 बजे के बाद कोच में तेज आवाज में फोन पर बात करना या समूह में बैठकर ऊंची आवाज में गपशप करना भी नियमों का खुला उल्लंघन माना जाता है। इस दौरान कोच की मुख्य लाइटें बंद कर केवल नाइट लैंप जलाने की अनुमति होती है, ताकि सोने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो। साथ ही, मिडिल बर्थ वाले यात्री रात 10 बजे से पहले या सुबह 6 बजे के बाद जबरन अपनी बर्थ नहीं खोल सकते, जिससे नीचे बैठे यात्रियों को परेशानी न पहुंचे।
रेलवे ने नियमों के क्रियान्वयन को प्रभावी बनाने के लिए ऑन-ड्यूटी स्टाफ की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है। ट्रेन में तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE), कोच अटेंडेंट और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों को यह सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है कि रात्रि के समय कोच में शांति व्यवस्था बनी रहे। यदि किसी कोच से लगातार शोर या तेज संगीत की शिकायत आती है और ऑन-ड्यूटी स्टाफ उस पर संज्ञान नहीं लेता, तो इसे उनकी लापरवाही माना जाएगा। टीटीई को अधिकार दिया गया है कि वे समझाने के बाद भी नियम तोड़ने वाले यात्रियों का चालान काट सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अगले स्टेशन पर आरपीएफ की मदद से उपद्रवी यात्री को ट्रेन से नीचे उतार सकते हैं।
यदि आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं और कोई यात्री तेज आवाज में गाना बजाकर, अभद्र व्यवहार कर या देर रात तक शोर मचाकर आपको परेशान कर रहा है, तो आपको चुपचाप सहने की जरूरत नहीं है। रेलवे ने ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय हेल्पलाइन नंबर 139 जारी किया हुआ है। आप तुरंत 139 पर कॉल करके या ‘RailMadad’ ऐप के जरिए अपनी पीएनआर (PNR) संख्या और बर्थ नंबर दर्ज कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। डिजिटल शिकायत दर्ज होते ही अगले स्टेशन या चलती ट्रेन में मौजूद आरपीएफ स्क्वॉड और टीटीई को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है, जो कुछ ही मिनटों में आपकी सीट पर पहुंचकर समस्या का समाधान करते हैं और दोषी यात्री पर नियमानुसार कार्रवाई करते हैं।
भारतीय रेलवे का यह कड़ा रुख किसी यात्री की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छीनने के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक नागरिक शिष्टाचार और जन-सुविधा को सुरक्षित रखने के लिए है। सार्वजनिक परिवहन में सफर करते समय हर नागरिक का यह दायित्व है कि वह अपने मनोरंजन से किसी बीमार, बुजुर्ग, बच्चे या अन्य थके हुए यात्री की नींद और आराम में खलल न डाले। यदि आप यात्रा के दौरान अपने पसंदीदा गाने या फिल्में देखना चाहते हैं, तो हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले ईयरफोन या हेडफोन का उपयोग करें और फोन पर जरूरी बात धीमी आवाज में ही करें। थोड़ी सी संवेदनशीलता और नियमों का पालन न केवल आपको भारी जुर्माने और कानूनी पचड़ों से बचाएगा, बल्कि पूरे सफर को हर किसी के लिए सुखद और यादगार बनाएगा।
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