
भारतीय रेल में सफर के दौरान अगर पैंट्री कार का वेंडर या स्टेशन का कोई स्टॉल संचालक आपसे ‘रेल नीर’ (Rail Neer) या पानी की सीलबंद बोतल पर एमआरपी से एक रुपया भी ज्यादा वसूलने की कोशिश करे, तो बिल्कुल चुप न बैठें। अक्सर देखा जाता है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में वेंडर 15 रुपये की पानी की बोतल के बदले यात्रियों से 20 रुपये मांगते हैं और ठंडा पानी देने या खुले पैसे न होने का बहाना बनाकर खुलेआम ओवरचार्जिंग करते हैं। यदि कोई यात्री विरोध करता है, तो वेंडर बदसलूकी पर उतर आते हैं। लेकिन अब यात्रियों की जेब पर डाका डालने वाले इन बेईमान वेंडरों और केटरिंग ठेकेदारों पर भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी (IRCTC) ने बेहद सख्त चाबुक चलाना शुरू कर दिया है। रेलवे के कड़े नियमों के मुताबिक, ओवरचार्जिंग की शिकायत साबित होने पर वेंडर का लाइसेंस रद्द होने के साथ-साथ संबंधित केटरिंग कांट्रैक्टर पर 1 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है।
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे और वाणिज्यिक निरीक्षकों को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि ट्रेनों और प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले सभी खाद्य और पेय पदार्थों की एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) की निगरानी की जाए। ‘ऑपरेशन थर्स्ट’ (Operation Thirst) जैसे अभियानों के जरिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) लगातार अनधिकृत और लोकल ब्रांड्स की नकली पानी की बोतलें बेचने वाले सिंडिकेट्स पर भी नकेल कस रहा है। एक जागरूक रेल यात्री के तौर पर आपको यह समझना जरूरी है कि रेलवे में पानी की बोतल की वास्तविक तय कीमत क्या है और ओवरचार्जिंग होने पर आप चलती ट्रेन में बैठे-बैठे वेंडर की हेकड़ी कैसे निकाल सकते हैं।
भारतीय रेलवे की आधिकारिक केटरिंग शाखा आईआरसीटीसी द्वारा उत्पादित पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर ‘रेल नीर’ की 1 लीटर की बोतल का आधिकारिक मूल्य पूरे देश में एक समान ₹15 (पंद्रह रुपये) निर्धारित है। यदि ट्रेन में या किसी प्लेटफॉर्म पर रेल नीर के 500 मिलीलीटर (आधा लीटर) की बोतल बेची जा रही है, तो उसकी अधिकतम खुदरा कीमत ₹10 तय की गई है।
रेलवे के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि यदि किसी ट्रेन की पैंट्री में रेल नीर की अनुपलब्धता के चलते रेलवे द्वारा स्वीकृत अन्य ब्रांड्स (जैसे बिसलेरी, किनले, एक्वाफिना आदि) की बोतलें बेची जा रही हैं, तो भी वेंडर यात्री से बोतल पर मुद्रित एमआरपी से अधिक रकम नहीं वसूल सकता। अक्सर वेंडर “बोतल बहुत ठंडी है” या “चिलिंग चार्ज अलग से लगेगा” का कुतर्क देकर ₹20 वसूलते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और रेलवे नियमों के तहत कूलिंग या चिलिंग के नाम पर एमआरपी से ₹1 भी अतिरिक्त मांगना गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है।
आईआरसीटीसी की केटरिंग पॉलिसी के तहत ओवरचार्जिंग को ‘जीरो टॉलरेंस’ अपराध माना गया है। यदि कोई पैंट्री कार वेंडर या स्टॉल संचालक यात्री से तय दर से अधिक पैसे वसूलता पकड़ा जाता है, तो उस पर चरणबद्ध तरीके से भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है:
-
पहली बार पकड़े जाने पर: केटरिंग ठेकेदार पर ₹25,000 से लेकर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जाता है।
-
बार-बार शिकायत मिलने पर: जुर्माने की राशि बढ़ाकर सीधे ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) कर दी जाती है।
-
गंभीर उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई: यदि किसी पैंट्री ठेकेदार की ट्रेनों में ओवरचार्जिंग की लगातार शिकायतें दर्ज होती हैं, तो रेलवे उसका ठेका तुरंत प्रभाव से निरस्त (Terminate) कर देता है और उस कंपनी को भविष्य के सभी रेलवे टेंडरों के लिए तीन साल तक ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है।
-
वेंडर की गिरफ्तारी: अधिक पैसे वसूलने वाले वेंडर का आईडी कार्ड जब्त कर उसे अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतारकर आरपीएफ के हवाले कर दिया जाता है, जहां रेलवे एक्ट की संबंधित धाराओं में उस पर कानूनी मुकदमा चलता है।
यदि ट्रेन में कोई वेंडर आपसे ₹15 के बदले ₹20 मांगे, तो घबराने या विवाद में पड़ने के बजाय शांत रहकर इन 4 कानूनी व डिजिटल हथियारों का उपयोग करें:
-
पक्का बिल (POS Machine Bill) मांगें: सबसे पहले वेंडर से कहें कि वह आपको पीओएस मशीन से प्रिंटेड बिल दे या डिजिटल क्यूआर कोड से ₹15 का ही भुगतान ले। रेलवे का सख्त नियम है—‘नो बिल, नो पेमेंट’ (No Bill, Free Food/Drink)। यदि वेंडर बिल देने से मना करता है, तो आप नियमानुसार भुगतान करने से इनकार कर सकते हैं।
-
रेल मदद पोर्टल या ऐप (Rail Madad): अपने मोबाइल में railmadad.indianrailways.gov.in खोलें या रेल मदद ऐप का उपयोग करें। ‘Complaints’ में जाकर ‘Catering & Vending Services’ चुनें और उप-श्रेणी में ‘Overcharging’ सिलेक्ट करें। अपना पीएनआर (PNR) नंबर, ट्रेन नंबर और कोच संख्या दर्ज करें। शिकायत दर्ज होते ही 15 से 30 मिनट के भीतर चलती ट्रेन में मौजूद ट्रेन सुपरिंटेंडेंट (TS) या कैटरिंग इंस्पेक्टर आपकी सीट पर पहुंचकर समस्या का समाधान करेंगे।
-
हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल: यदि आपके पास इंटरनेट नहीं है, तो तुरंत अपने फोन से 139 डायल करें। भाषा चुनकर केटरिंग वेंडर द्वारा अधिक पैसे मांगे जाने की लाइव शिकायत दर्ज कराएं। कॉल ऑपरेटर को वेंडर का नाम या उसकी वर्दी पर लगा आईडी बैच नंबर जरूर बताएं।
-
सोशल मीडिया ‘X’ (ट्विटर) पर लाइव पोस्ट: यदि वेंडर बदसलूकी करे, तो उसकी एक छोटी सी वीडियो क्लिप या तस्वीर खींचें और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर @RailMinIndia, @IRCTCofficial और संबंधित रेलवे जोन (जैसे @NorthernRailway) को टैग करते हुए पीएनआर और ट्रेन नंबर के साथ पोस्ट कर दें। सोशल मीडिया सेल ऐसी शिकायतों पर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से एक्शन लेती है।
ओवरचार्जिंग के साथ-साथ ट्रेनों में एक और बड़ा खतरा नकली और असुरक्षित पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर का है। कई अवैध हॉकर स्टेशनों पर चलती ट्रेनों में ‘रेल नीर’ से मिलते-जुलते नामों वाली बोतलें (जैसे Neer Rail, Real Neer, Rail Pure आदि) बेचते हैं। ये लोग अक्सर इस्तेमाल की जा चुकी पुरानी बोतलों में नलों का गंदा पानी भरकर उन्हें फेविक्विक या हीट से सील कर देते हैं।
सफर के दौरान पानी खरीदते समय हमेशा बोतल की सील अच्छी तरह चेक करें और सुनिश्चित करें कि उस पर स्पष्ट रूप से ‘Rail Neer’ और भारतीय मानक ब्यूरो का ISI मार्क छपा हो। पानी पीने के बाद खाली बोतल को बीच से मरोड़कर (Crush करके) ही डस्टबिन में फेंकें, ताकि अवैध वेंडर उसका दोबारा इस्तेमाल न कर सकें। अपनी सेहत और अपनी जेब की सुरक्षा के लिए नियमों को जानें, ओवरचार्जिंग का डटकर विरोध करें और रेलवे के डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर भारतीय रेल को स्वच्छ व पारदर्शी बनाने में अपना योगदान दें।
girls globe