
भारतीय रेल से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या प्रीमियम ट्रेनों में टिकट बुक करते समय मिलने वाला खाना अनिवार्य है या फिर इसे छोड़कर टिकट की कीमत कम कराई जा सकती है। जब हम राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस या देश की आधुनिक सेमी-हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में टिकट बुक करते हैं, तो अक्सर किराए का बिल देखकर जेब पर अतिरिक्त बोझ महसूस होता है। बहुत से यात्री ऐसे होते हैं जो घर से बना शुद्ध और पसंदीदा खाना साथ ले जाना पसंद करते हैं, या फिर उन्हें रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले भोजन का स्वाद और मेन्यू पसंद नहीं आता। वहीं कई मुसाफिर ऐसे भी होते हैं जो सफर के दौरान उपवास पर होते हैं या स्वास्थ्य कारणों से बाहर का तला-भुना खाना खाने से परहेज करते हैं। ऐसे यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी (IRCTC) ने एक बेहद काम की सुविधा दी है, जिसे अक्सर लोग ‘सीक्रेट सेटिंग’ या ‘नो-फूड ऑप्शन’ (Opt-Out of Catering) कहते हैं। यदि आप टिकट बुकिंग के समय इस विकल्प का सही इस्तेमाल करते हैं, तो आपके टिकट के कुल किराए में से कैटरिंग चार्ज सीधे घटा दिया जाता है और आपका कन्फर्म टिकट सैकड़ों रुपये सस्ता हो जाता है।
रेलवे के नियमों के अनुसार कैटरिंग चार्ज हटाने की यह छूट हर ट्रेन पर लागू नहीं होती, बल्कि केवल उन्हीं प्रीमियम ट्रेनों में मिलती है जहां किराया संरचना में कैटरिंग चार्ज पहले से अंतर्निहित या बंडल किया गया होता है। सामान्य मेल, एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में खाना टिकट किराए का अनिवार्य हिस्सा नहीं होता; वहां पेंट्री कार से खाना लेना या न लेना यात्री की मौके पर मर्जी पर निर्भर करता है। लेकिन वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और दुरंतो एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में टिकट बुकिंग सिस्टम डिफ़ॉल्ट रूप से भोजन का शुल्क जोड़ लेता है। रेलवे बोर्ड के संशोधित सर्कुलर के मुताबिक इन सभी प्रीमियम ट्रेनों के यात्रियों को यह कानूनी अधिकार दिया गया है कि वे बुकिंग के समय चाहें तो भोजन सेवा से बाहर निकलने यानी ‘ऑप्ट-आउट’ करने का विकल्प चुन सकते हैं। यदि कोई यात्री इस विकल्प को सक्रिय करता है, तो सिस्टम उसके टिकट से नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम की चाय या रात के खाने का पूरा शुल्क तुरंत हटा देता है, जिससे बेस फेयर, रिजर्वेशन चार्ज, सुपरफास्ट सरचार्ज और जीएसटी के अलावा कोई अतिरिक्त कैटरिंग टैक्स नहीं जुड़ता।
आईआरसीटीसी के पोर्टल पर टिकट सस्ता कराने की यह प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सीधी है, लेकिन जल्दबाजी में बुकिंग करने के चक्कर में अधिकांश यात्री इस चेकबॉक्स या ड्रॉपडाउन मेनू को अनदेखा कर देते हैं। जब आप IRCTC Rail Connect ऐप या आधिकारिक वेबसाइट irctc.co.in पर लॉगिन करके अपनी ट्रेन और क्लास (जैसे चेयर कार, एग्जीक्यूटिव क्लास, 3AC, 2AC या 1AC) का चयन करते हैं, तो पैसेंजर डिटेल्स (Passenger Details) भरने वाला पेज खुलता है। इस पेज पर जब आप यात्री का नाम, उम्र और जेंडर दर्ज करते हैं, तो ठीक उसके नीचे ‘Food Choice’ या ‘Catering Preference’ का एक सेक्शन दिखाई देता है। आमतौर पर यहां ‘Veg’ (शाकाहारी) और ‘Non-Veg’ (मांसाहारी) के विकल्प दिखाई देते हैं, लेकिन इसी ड्रॉपडाउन लिस्ट में सबसे ऊपर या नीचे स्पष्ट अक्षरों में ‘No Food’ का विकल्प भी मौजूद रहता है। जैसे ही आप ‘No Food’ पर क्लिक करते हैं, सिस्टम समझ जाता है कि आपको यात्रा के दौरान रेलवे की खानपान सेवा नहीं चाहिए। इसके बाद जब आप पेमेंट गेटवे पर आगे बढ़ते हैं और फेयर ब्रेकअप (Fare Breakup) देखते हैं, तो वहां ‘Catering Charges’ का कॉलम पूरी तरह शून्य (₹0.00) दिखाई देगा।
वंदे भारत, शताब्दी या राजधानी ट्रेनों में कैटरिंग का चार्ज यात्रा की कुल दूरी, यात्रा के समय और कोच की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग तय होता है। उदाहरण के तौर पर यदि आप वंदे भारत या शताब्दी एक्सप्रेस के एसी चेयर कार (CC) में सफर कर रहे हैं और आपकी यात्रा में केवल मॉर्निंग टी और ब्रेकफास्ट शामिल है, तो आपको लगभग 120 से 150 रुपये की छूट मिल जाती है। वहीं यदि यात्रा दोपहर या रात के मुख्य भोजन (लंच या डिनर) के समय की है, तो चेयर कार में 200 से 250 रुपये और एग्जीक्यूटिव क्लास (EC) में 300 से 350 रुपये तक की सीधी बचत होती है। अगर बात राजधानी या दुरंतो जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों की करें, जहां सफर 24 से 30 घंटे का होता है और रास्ते में दो बार खाना और दो बार नाश्ता दिया जाता है, तो 2AC और 3AC के टिकट पर प्रति यात्री 350 से 500 रुपये तक और 1st AC में 500 से 700 रुपये तक का कैटरिंग चार्ज कम हो जाता है। यदि एक परिवार के चार सदस्य मिलकर सफर कर रहे हैं और वे घर का खाना ले जाना पसंद करते हैं, तो सिर्फ एक राउंड ट्रिप में वे 2,000 से 3,000 रुपये तक की बड़ी बचत बहुत आसानी से कर सकते हैं।
यह एक बेहद महत्वपूर्ण और तकनीकी नियम है जिसे हर रेल यात्री को जानना आवश्यक है। आईआरसीटीसी के मौजूदा नियमों के मुताबिक एक बार जब आपका टिकट ‘No Food’ विकल्प के साथ फाइनल बुक हो जाता है, तो आप बाद में ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर उसे दोबारा ‘With Food’ में नहीं बदल सकते। यानी चार्ट बनने से पहले ऑनलाइन सिस्टम आपको अपनी फूड चॉइस बदलने की अनुमति नहीं देता। इसलिए टिकट बुक करते समय ही यह पक्का कर लें कि आपको रास्ते में भोजन की आवश्यकता पड़ेगी या नहीं। हालांकि यदि किसी यात्री ने गलती से या जल्दबाजी में ‘No Food’ चुन लिया और सफर के दौरान उसे तेज भूख लग जाए, तो रेलवे उसे भूखा नहीं रखता। ट्रेन के भीतर ऑन-ड्यूटी पेंट्री स्टाफ या ऑन-बोर्ड कैटरिंग अटेंडेंट से संपर्क करके अतिरिक्त भोजन की मांग की जा सकती है, बशर्ते ट्रेन की पेंट्री कार में अतिरिक्त मील पैकेट उपलब्ध हों। लेकिन ध्यान रहे कि चलती ट्रेन में ऑन-बोर्ड खाना ऑर्डर करने पर रेलवे आपसे न केवल तय खाने का दाम वसूलेगा बल्कि उस पर 50 रुपये प्रति मील का अतिरिक्त ‘सर्विस चार्ज’ (Service Charge) भी वसूलेगा। इसलिए समझदारी इसी में है कि अगर घर से खाना नहीं ला रहे हैं तो पहले ही सोच-समझकर फैसला लें।
‘नो फूड’ का विकल्प चुनने का एक और बड़ा फायदा यह है कि आप रेलवे के पारंपरिक और सीमित मेन्यू में बंधने के बजाय आईआरसीटीसी के ‘ई-कैटरिंग’ (E-Catering) नेटवर्क का लाभ उठा सकते हैं। आईआरसीटीसी ने ‘Food on Track’ ऐप और 1323 हेल्पलाइन के जरिए देश भर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर नामी रेस्टोरेंट्स और ब्रांड्स जैसे हल्दीराम, बीकानेरवाला, डॉमिनोज, सबवे और स्थानीय प्रसिद्ध ढाबों के साथ साझेदारी की है। जब आप टिकट में ‘No Food’ चुनकर अपने 300-400 रुपये बचा लेते हैं, तो आप उसी बचे हुए पैसे से अपनी सीट पर गरमा-गरम, ताजा और अपनी पसंद का मनचाहा ब्रांडेड खाना ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। यह खाना आपकी सीट पर ट्रेन रुकने के समय सीधे डिलीवरी बॉय द्वारा पहुंचा दिया जाता है। इस तरह न केवल आपका टिकट सस्ता होता है, बल्कि आपको सफर में अपनी मनपसंद थाली, पिज्जा या दक्षिण भारतीय व्यंजन का लुत्फ उठाने की पूरी आजादी भी मिल जाती है। कुल मिलाकर आईआरसीटीसी का ‘No Food’ विकल्प बजट के प्रति सजग और सेहत के प्रति जागरूक मुसाफिरों के लिए एक बेहतरीन वरदान साबित हो रहा है।
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