
विदेश में रहकर नौकरी करने वाले और विशेष रूप से अमेरिका में बसने का सपना देखने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक बेहद चिंताजनक और बड़ी खबर सामने आ रही है। अमरीका में ट्रंप प्रशासन के दोबारा सत्ता में आने के बाद से अप्रवासन नीतियों को लेकर लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिसका सीधा असर अब एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों के जीवनसाथी यानी स्पाउज पर पड़ने वाला है। अमेरिका के गृह मंत्रालय यानी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने अपनी नई रेगुलेटरी एजेंडा सूची में एक ऐसा प्रस्ताव फिर से शामिल किया है, जिससे हजारों भारतीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस नए संभावित प्रस्ताव के तहत ट्रंप प्रशासन एच-4 वीजा धारकों को मिलने वाले ईएडी (H-4 EAD) यानी वर्क परमिट को पूरी तरह से समाप्त करने की योजना पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव आने वाले समय में कानूनी रूप से लागू हो जाता है, तो अमेरिका में रह रहे उन हजारों कुशल पेशेवर प्रवासियों के जीवनसाथी कानूनी रूप से काम करने के अधिकार से वंचित हो जाएंगे, जो लंबे समय से ग्रीन कार्ड के इंतजार में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रहे हैं। आइए इस पूरे मसले की गहराई से समीक्षा करते हैं और जानते हैं कि इसका भारतीय परिवारों पर क्या असर होगा।
पूरे विवाद को बेहतर ढंग से समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एच-4 ईएडी क्या है और इसे कब लागू किया गया था। साल 2015 में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाते हुए उन एच-4 वीजा धारकों को काम करने की अनुमति दी थी, जिनके पति या पत्नी के पास वैध एच-1बी वीजा है और जिनका आई-140 (I-140) अप्रूव हो चुका है। इस नियम के आने से मुख्य रूप से उन हजारों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और उच्च शिक्षित परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली थी, जिन्हें अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड मिलने में दशकों की लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ता है। इस वर्क परमिट के सहारे एच-1बी धारकों के स्पाउज अमेरिका में रहकर स्वतंत्र रूप से नौकरी कर सकते थे, अपना बिजनेस शुरू कर सकते थे और अपने परिवार की आजीविका में बराबरी का आर्थिक सहयोग दे सकते थे। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन के इस नए कदम ने उस व्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं, जिससे प्रवासी समुदाय में भारी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की तरफ से जारी ताजा रेगुलेटरी एजेंडा में इस बात के संकेत दिए गए हैं कि सरकार एच-4 वीजा श्रेणी के उन लोगों को रोजगार अधिकार देने वाले नियमों से बाहर करने पर विचार कर रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह अभी केवल एक नीतिगत प्रस्ताव या ‘लॉन्ग-टर्म एक्शन’ के रूप में सूचीबद्घ किया गया है और रातों-रात मौजूदा वर्क परमिट को रद्द नहीं किया गया है। इसके बावजूद, इस खबर के सामने आते ही अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों और उन परिवारों के बीच डर का माहौल बन गया है जो अपनी दोहरी आय के भरोसे वहां अपने कर्ज, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों को मैनेज कर रहे हैं। यदि यह प्रस्ताव आगे चलकर अंतिम नियमों में बदल जाता है, तो सबसे ज्यादा असर उन भारतीय महिलाओं पर पड़ेगा जो अपनी उच्च शिक्षा के दम पर अमेरिका में शानदार करियर बना चुकी हैं और स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। एक ही वेतन पर निर्भर होने से परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों और इमिग्रेशन वकीलों का यह मानना है कि किसी भी नियम को बदलने या समाप्त करने के लिए एक लंबी संघीय विधायी प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसमें फेडरल रजिस्टर में प्रस्ताव प्रकाशित होने के बाद आम जनता और संबंधित पक्षों से टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं, और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाता है। इसके अलावा, इस तरह के विवादास्पद फैसलों को अमेरिकी अदालतों में कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है, जैसा कि पहले भी देखने को मिला है। वर्तमान में जिन लोगों के पास वैध एच-4 ईएडी कार्ड मौजूद हैं, वे बिना किसी बाधा के काम करना जारी रख सकते हैं और उनकी मौजूदा नौकरी पर तत्काल कोई संकट नहीं आया है। फिर भी, प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे अपने वीजा रिन्यूअल और कागजी कार्रवाई को समय पर पूरा रखें तथा अमेरिकी प्रशासन की तरफ से आने वाले हर एक आधिकारिक अपडेट पर पैनी नजर बनाए रखें ताकि किसी भी अनिश्चितता से सही समय पर निपटा जा सके।
girls globe