
वैश्विक कूटनीति के मंच से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के धुर विरोधी माने जाने वाले तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता एक साथ भारत के दौरे पर आ रहे हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इन नेताओं की एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है। वाशिंगटन और बीजिंग से लेकर पूरी दुनिया की नजरें इस रणनीतिक बैठकी पर टिक गई हैं, क्योंकि इस दौरे के पीछे जो बड़े मकसद छिपे हैं, उसने अमेरिकी प्रशासन की धड़कनें तेज कर दी हैं।
कौन हैं ट्रंप के ये 3 विरोधी और क्या है भारत आने का असली एजेंडा
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत आ रहे इन तीन वैश्विक नेताओं का ट्रंप प्रशासन और उनकी संरक्षणवादी (Protectionist) आर्थिक व विदेश नीतियों के साथ पुराना टकराव रहा है। इस दौरे का मुख्य एजेंडा वैश्विक व्यापार, रक्षा सहयोग और बहुपक्षीय संगठनों (Multilateral Organizations) में अमेरिकी एकाधिकार को चुनौती देना है। नई दिल्ली में होने वाली इस रणनीतिक चर्चा में यूक्रेन संकट, मिडल ईस्ट के बदलते हालात और ग्लोबल सप्लाई चेन पर ट्रंप की नीतियों से पैदा हुए असर पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। भारत इन नेताओं के साथ मिलकर एक संतुलित और मजबूत ग्लोबल पार्टनरशिप का नया खाका तैयार करना चाहता है।
पीएम मोदी के साथ इस खास बैठकी से क्यों परेशान है वाशिंगटन
अमेरिका के नीति निर्माताओं और व्हाइट हाउस के भीतर इस दौरे को लेकर एक अजीब सी बैचेनी साफ देखी जा सकती है। अमेरिका को डर है कि भारत के साथ इन देशों की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक मंच पर वाशिंगटन के रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव को कम कर सकती हैं। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में भारत लगातार एक स्वतंत्र विदेश नीति (Strategic Autonomy) पर चल रहा है, जहां वह रूस, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को अलग-अलग तराजू में तौलता है। ट्रंप के विरोधियों का भारत की धरती पर आकर रणनीतिक बात करना यह दिखाता है कि नई दिल्ली अब ग्लोबल डिप्लोमेसी का नया पावर सेंटर बन चुकी है।
भारत के इस बड़े कदम का एशिया और वैश्विक राजनीति पर क्या होगा असर
इस हाई-प्रोफाइल दौरे और द्विपक्षीय वार्ताओं का सीधा असर दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों पर पड़ने वाला है। भारत इस बैठक के जरिए दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी एक ब्लॉक या खेमे की राजनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ और वैश्विक स्थिरता की मजबूत आवाज है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में इस बैठक की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पीएम मोदी के साथ इन नेताओं की बातचीत के बाद अमेरिका और ट्रंप प्रशासन इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं।
girls globe