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‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें’: SIR विवाद पर भड़की कांग्रेस, 25 और 28 सितंबर को देशव्यापी आंदोलन का बड़ा एलान

भारत निर्वाचन आयोग के प्रशासनिक गलियारों में उपजा आंतरिक विवाद अब देश की मुख्यधारा की राजनीति का सबसे बड़ा और विस्फोटक मुद्दा बन चुका है। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली, निर्णयों और उनके द्वारा लिए गए एकतरफा प्रशासनिक फैसलों को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ सीधा आर-पार का मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का औपचारिक एलान करते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी, उनके फैसलों की न्यायिक जांच और उनकी गिरफ्तारी तक की मांग रख दी है, जिससे आने वाले दिनों में सड़क से लेकर संसद तक भारी टकराव के आसार बन गए हैं।

चुनाव आयोग के शीर्ष स्तर पर पैदा हुए इस गंभीर संस्थागत संकट के बाद कांग्रेस आलाकमान ने अपने कड़े तेवर साफ कर दिए हैं। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि जब लोकतंत्र की सबसे बुनियादी और निष्पक्ष मानी जाने वाली संस्था के भीतर ही गंभीर विसंगतियां सामने आ रही हों, तो इसे सामान्य मतभेद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कांग्रेस ने दो टूक मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके संवैधानिक पद से बर्खास्त किया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी मांग उठाई है कि ज्ञानेश कुमार के पूरे कार्यकाल के दौरान मतदाता सूची में किए गए तमाम तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों, जारी किए गए सर्कुलर और चुनाव प्रबंधन से जुड़े प्रत्येक निर्णय की एक स्वतंत्र, उच्चस्तरीय और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। कांग्रेस का साफ तौर पर आरोप है कि मतदाता सूची के साथ की गई छेड़छाड़ देश के मतदाताओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।

आंदोलन की विस्तृत कार्ययोजना साझा करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पार्टी का आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया। उन्होंने बताया कि इस देशव्यापी आंदोलन को दो सुनियोजित और बड़े चरणों में विभाजित किया गया है। आंदोलन के पहले चरण के तहत शुक्रवार, 25 सितंबर को देश भर की सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियां (PCC) अपने-अपने राज्यों की राजधानियों में स्थित राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों का विशाल स्तर पर घेराव करेंगी। वहीं, आंदोलन के दूसरे चरण के तहत सोमवार, 28 सितंबर को सभी जिला कांग्रेस कमेटियां (DCC) भारत के प्रत्येक जिले में कलेक्ट्रेट और जिला निर्वाचन कार्यालयों पर विशाल विरोध मार्च और प्रदर्शन आयोजित करेंगी। केसी वेणुगोपाल ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना ही होगा और उनके द्वारा थोपे गए सभी असंवैधानिक फैसले रद्द किए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इन मांगों पर ठोस अमल नहीं होता, तब तक पार्टी का यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान और लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे को चोट पहुंचाने वालों को जनता के सामने बेनकाब किया जा चुका है और देश की जनता को निष्पक्ष चुनावी न्याय मिलकर रहेगा।

इस पूरे राजनीतिक भूचाल की शुरुआत प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट के प्रकाशन से हुई। इस रिपोर्ट में आधिकारिक दस्तावेजों और अंदरूनी प्रक्रियाओं के हवाले से सनसनीखेज खुलासा किया गया कि तीन सदस्यीय भारत निर्वाचन आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के भीतर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े प्रशासनिक आदेशों और नीतिगत बदलावों को लेकर कम से कम 14 बार आधिकारिक रूप से अपनी गहरी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से चार महत्वपूर्ण आपत्तियां तो महज एक ही दिन में दर्ज की गई थीं। दोनों आयुक्तों ने आधिकारिक कार्यवृत्त में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था कि कई संवेदनशील नीतिगत फैसले, फॉर्म के प्रारूप में बदलाव और आधिकारिक निर्देश उनकी पूर्व सहमति या जानकारी के बिना ही सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तर से जारी कर दिए गए थे।

आयोग के दो वरिष्ठ सदस्यों द्वारा दर्ज कराई गई इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण हेतु उपयोग होने वाले ‘फॉर्म-6’ के साथ अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ने और मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण से जमीनी स्तर के अधिकारियों की स्वायत्तता सीमित होने जैसे गंभीर विषय शामिल थे। इस खुलासे के बाद से ही विपक्षी गठबंधन हमलावर है और इसे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता के साथ किया गया अक्षम्य समझौता करार दे रहा है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने बाद में एक सामान्य स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि एक बहु-सदस्यीय संस्था में विभिन्न विचारों का उभरना स्वाभाविक है और हाल के समय में शुरू की गई तमाम महत्वपूर्ण पहलों को आपसी सहमति से ही आगे बढ़ाया गया है। इसके विपरीत, विपक्षी दल इस दलील को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं और कांग्रेस के इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के आह्वान के बाद अब देश भर के राज्यों और जिला मुख्यालयों पर 25 और 28 सितंबर को भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिलेगा, जिससे चुनावी सुधारों और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर जारी राष्ट्रीय बहस और तेज हो गई है।