जियो की लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार में महा-उलटफेर

भारतीय शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर होने जा रहा है। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio Infocomm) के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ (IPO) और शेयर बाजार में लिस्टिंग की खबरों ने दलाल स्ट्रीट से लेकर वैश्विक निवेशकों के बीच तहलका मचा दिया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जैसे ही रिलायंस जियो की शेयर बाजार में औपचारिक एंट्री होगी, देश के कॉर्पोरेट मार्केट कैप (Market Capitalization) का पूरा समीकरण रातों-रात बदल जाएगा। जियो की लिस्टिंग के साथ ही मुकेश अंबानी का रिलायंस ग्रुप सालों से शीर्ष पर काबिज टाटा ग्रुप (Tata Group) को पछाड़कर भारत का सबसे मूल्यवान यानी नंबर-1 बिजनेस ग्रुप बन जाएगा। आइए एक निष्पक्ष ग्राउंड रिपोर्टर और आर्थिक विश्लेषक की नजर से समझते हैं कि आखिर इस महा-लिस्टिंग के पीछे का गणित क्या है और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

दलाल स्ट्रीट और कॉर्पोरेट विशेषज्ञों के अनुसार, रिलायंस जियो की अनुमानित मार्केट वैल्यूएशन लगभग 100 अरब डॉलर से लेकर 110 अरब डॉलर (लगभग 8.5 लाख करोड़ रुपये से 9.2 लाख करोड़ रुपये) के बीच आंकी जा रही है। वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) का कुल मार्केट कैप पहले से ही भारतीय शेयर बाजार में शीर्ष कंपनियों में शामिल है, लेकिन इसमें जियो और रिलायंस रिटेल का मूल्य भी RIL के तहत ही जुड़ा हुआ है। जब जियो एक स्वतंत्र और अलग कंपनी के रूप में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध होगी, तो इसका वैल्यूएशन सीधे तौर पर रिलायंस ग्रुप के कुल मार्केट कैप में एक नया मील का पत्थर जोड़ेगा। इसके बाद रिलायंस समूह की कुल बाजार वैल्यू इतनी तेजी से उछलेगी कि यह देश के अन्य सभी कॉर्पोरेट घरानों को काफी पीछे छोड़ देगी।

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में टाटा ग्रुप देश का सबसे बड़ा और वैल्यूएबल बिजनेस घराना बना हुआ है, जिसके अंतर्गत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाइटन जैसी लगभग तीन दर्जन से अधिक लिस्टेड कंपनियां आती हैं। टाटा ग्रुप की सभी लिस्टेड कंपनियों का कुल संयुक्त मार्केट कैप लगभग 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। दूसरी ओर, रिलायंस ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप भी इस आंकड़े के बेहद करीब बना हुआ है। वित्तीय विशेषज्ञों का स्पष्ट आकलन है कि जियो की लिस्टिंग से रिलायंस ग्रुप के मार्केट कैप में जो अतिरिक्त और प्रत्यक्ष उछाल आएगा, वह सीधे तौर पर इसे टाटा ग्रुप के कुल मार्केट कैप से काफी आगे निकाल देगा। यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की एक ऐसी घटना होगी, जो दशकों बाद सत्ता और मूल्य के संतुलन को पूरी तरह बदल देगी।

आखिर रिलायंस जियो को इतनी बड़ी वैल्यूएशन मिलने के पीछे की असली वजह क्या है? इसका सीधा जवाब है जियो का विशाल सब्सक्राइबर बेस, 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार और उसका मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम। आज जियो के पास 47 करोड़ से भी अधिक सक्रिय मोबाइल ग्राहक हैं, जो देश की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, जियो केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि जियो सिनेमा, जियो फाइबर, क्लाउड सर्विसेज और हाल ही में घोषित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर यह एक ग्लोबल टेक-जायंट बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक जैसे गूगल (Google) और मेटा (Meta) पहले ही जियो प्लेटफॉर्म्स में बड़ा निवेश कर चुके हैं। यही वजह है कि घरेलू और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक जियो के आईपीओ का लंबे समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

जियो की इस महा-लिस्टिंग का असर केवल रिलायंस या टाटा ग्रुप तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका व्यापक असर पूरे भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिलेगा। इस मेगा आईपीओ से प्राइमरी मार्केट में लिक्विडिटी का एक नया सैलाब आएगा और वैश्विक संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारत में निवेश कई गुना बढ़ जाएगा। आम निवेशकों के लिए यह देश की सबसे तेजी से बढ़ती डिजिटल कंपनी में सीधे भागीदार बनने का एक सुनहरा और ऐतिहासिक अवसर होगा। इसके साथ ही, रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों को भी इस लिस्टिंग का सीधा और बड़ा वित्तीय फायदा वैल्यू अनलॉकिंग (Value Unlocking) के रूप में मिलेगा। निष्कर्ष के तौर पर कहा जाए तो जियो की यह लिस्टिंग न सिर्फ मुकेश अंबानी को कॉर्पोरेट जगत का बेताज बादशाह बनाएगी, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के डिजिटल भविष्य को भी एक नई दिशा देगी।