
भारत के ग्रामीण अंचलों में लोक मान्यताएं, परंपराएं और अटूट आस्था आज भी उतनी ही जीवंत हैं, जितनी सदियों पहले हुआ करती थीं। इसका एक बेहद अनूठा और दिलचस्प नजारा छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आया है। जहां इस सीजन में पर्याप्त बारिश न होने से चिंतित किसानों ने अच्छी फसल और सूखे की आशंका से मुक्ति पाने के लिए बकायदा बैंड-बाजे और पूरी रस्मों-रिवाजों के साथ मेंढक और मेंढकी का विवाह संपन्न कराया।
दिलचस्प बात यह है कि इस अनोखे पारंपरिक ब्याह के ठीक बीच मौसम विभाग (IMD) ने भी राज्य के अन्नदाताओं को बड़ी राहत दी है। करीब तीन दिनों की सुस्ती और थपेड़ों के बाद छत्तीसगढ़ में मॉनसून एक बार फिर पूरी तरह ‘सुपर एक्टिव’ हो गया है। आईएमडी के ताजा अनुमान के मुताबिक, अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से मध्यम वर्षा होने की प्रबल संभावना है।
शादी का बकायदा छपा कार्ड, बैंड-बाजे के साथ निकली ‘मेंढक की बारात’
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले खूंशी क्षेत्र में इस पारंपरिक और अनोखे विवाह का भव्य आयोजन किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई प्रतीकात्मक औपचारिकता या बच्चों का खेल नहीं था, बल्कि इसे एक वास्तविक मानवीय विवाह की तरह बेहद संजीदगी से मनाया गया।
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निमंत्रण पत्र: इस अनोखी शादी के लिए बकायदा निमंत्रण पत्र (शादी के कार्ड) छपवाए गए और आसपास के तमाम गांवों में बांटे गए।
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फेरे और रस्में: गुरुवार की शाम बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोक गीतों के साथ दूल्हे (मेंढक) की भव्य बारात निकाली गई। इसके बाद हिंदू सनातन रीति-रिवाजों, सात फेरों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मेंढक-मेंढकी का ब्याह रचाया गया।
इंद्रदेव को प्रसन्न करने की है मान्यता: आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य रामनाथ सिंह ने बताया कि जब भी क्षेत्र में बारिश की खेंच होती है या सूखे जैसे हालात बनते हैं, तब यह प्राचीन लोक परंपरा निभाई जाती है। ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि मेंढक-मेंढकी के ब्याह की आवाज से वर्षा के देवता इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और तुरंत अमृत वर्षा करते हैं। विवाह के बाद पूरे क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए सामूहिक भोज (भंडारे) का भी आयोजन किया गया।
छत्तीसगढ़ में मानसून का स्टेटस: अब तक 17% कम बरसे बदरा
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीजन में छत्तीसगढ़ में उम्मीद के मुकाबले थोड़ी कम बारिश दर्ज की गई है:
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वास्तविक बारिश: प्रदेश में 1 जून से 8 जुलाई तक औसतन 239.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
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सामान्य बारिश: इस अवधि में राज्य में सामान्य तौर पर 286.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी।
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घाटा: इस लिहाज से देखा जाए तो राज्य में अब तक सामान्य के मुकाबले 17 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।
जिलावार बारिश का तुलनात्मक रिपोर्ट (1 जून से 8 जुलाई)
| श्रेणी / जिला | दर्ज की गई बारिश (मिमी) | सामान्य से तुलना (स्थिति) |
| सारंगढ़-बिलाईगढ़ | 450.7 मिमी | सर्वाधिक बारिश (सामान्य से 84% ज्यादा) |
| सामान्य से अधिक वर्षा वाले जिले | — | दंतेवाड़ा, मुंगेली, सक्ती, महासमुंद, रायपुर और जांजगीर-चांपा |
| सरगुजा | 144.4 मिमी | सबसे कम बारिश (सामान्य से 53% कम) |
| कम वर्षा वाले अन्य जिले | — | कांकेर (-48%), जशपुर (-43%), कोरिया (-36%), गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (-32%) |
मौसम के आगे के आसार: वज्रपात का अलर्ट और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी चार दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहेगा। इसके साथ ही उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तीव्र आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने की विशेष चेतावनी (येलो अलर्ट) जारी की गई है।
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आज का तापमान: राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में आज मुख्य रूप से घने बादल छाए रहेंगे। रायपुर में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
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जलभराव की चेतावनी: इससे पहले 4, 5 और 6 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के चलते रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी और गरियाबंद के कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी। कई रिहायशी कॉलोनियों में अभी भी जलभराव (Waterlogging) की समस्या बनी हुई है। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि अगले चार दिनों की नई बारिश से इन इलाकों में स्थिति एक बार फिर गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए प्रशासन और नागरिक पूरी तरह सतर्क रहें।
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