चीनी एक्सपर्ट की रोंगटे खड़े करने वाली चेतावनी, 2 पुरानी भविष्यवाणियां सच होने के बाद दुनिया में हड़कंप

चीन के एक शीर्ष सामरिक विशेषज्ञ और रक्षा विश्लेषक ने पाकिस्तान को लेकर एक ऐसा दावा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र की नींद उड़ा दी है। बीजिंग के रणनीतिक हलकों में बेहद प्रतिष्ठित माने जाने वाले इस एक्सपर्ट का कहना है कि वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ा, आर्थिक रूप से पूरी तरह से खोखला और अंदरूनी गृहयुद्ध जैसे हालात से गुजर रहा पाकिस्तान दुनिया में पहला परमाणु हमला करने वाला देश बन सकता है। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि इस चीनी विशेषज्ञ की बीते सालों में की गई दो बड़ी भविष्यवाणियां पहले ही अक्षरशः सच साबित हो चुकी हैं। यही वजह है कि वाशिंगटन से लेकर नई दिल्ली और जिनेवा तक के रक्षा विशेषज्ञ इस चेतावनी को हल्के में नहीं ले रहे हैं।

चीनी विशेषज्ञ की भविष्यवाणी ने बढ़ाई अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता

बीजिंग स्थित सामरिक थिंक-टैंक से जुड़े इस रणनीतिकार ने अपने विस्तृत विश्लेषण में कहा है कि पाकिस्तान एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है, जहां से उसका वापसी का रास्ता बंद हो चुका है। आमतौर पर चीन और पाकिस्तान की दोस्ती को ‘हिमालय से ऊंची और समुद्र से गहरी’ कहा जाता है। ऐसे में खुद चीन के किसी जाने-माने रणनीतिकार द्वारा अपने ही सहयोगी देश की परमाणु मंशा पर इतना गंभीर सवाल उठाना बेहद असाधारण माना जा रहा है। इस विशेषज्ञ ने इससे पहले पाकिस्तान के आर्थिक डिफॉल्ट की दहलीज पर पहुंचने और दक्षिण एशिया में नए आतंकी गुटों के उभार की अचूक भविष्यवाणी की थी। अब उनकी तीसरी और सबसे भयावह भविष्यवाणी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान की परमाणु संपत्तियां वैश्विक शांति के लिए अब तक का सबसे बड़ा टाइम बम बन चुकी हैं।

आर्थिक कंगाली और राजनीतिक अराजकता का विस्फोटक मिश्रण

पाकिस्तान आज इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कर्ज और अन्य मित्र देशों की भीख पर टिकी है। महंगाई आसमान छू रही है, आम जनता सड़कों पर है और राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। सेना और नागरिक सरकार के बीच का टकराव हो या फिर विपक्षी नेताओं को जेल में डालने का दौर, पाकिस्तान का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। चीनी विशेषज्ञ का मानना है कि जब कोई देश पूरी तरह से आंतरिक मोर्चे पर विफल हो जाता है, तो वहां का नेतृत्व अपने वजूद को बचाने के लिए अति-राष्ट्रवाद और बाहरी खतरे का हौवा खड़ा करता है। ऐसे में अगर पाकिस्तान किसी बड़े सैन्य संकट में फंसता है, तो उसकी सेना अपनी हार के डर से उतावलेपन में परमाणु बटन दबाने का आत्मघाती कदम उठा सकती है।

‘फुल स्पेक्ट्रम डिट्रेंस’ और टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स का जानलेवा खेल

पाकिस्तान का परमाणु सिद्धांत दुनिया के अन्य देशों से काफी अलग और खतरनाक है। भारत जहां ‘नो फर्स्ट यूज़’ यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति का सख्ती से पालन करता है, वहीं पाकिस्तान ने कभी भी ऐसी किसी प्रतिबद्धता को नहीं स्वीकार किया। पाकिस्तान ने छोटे दायरे में तबाही मचाने वाले ‘तस्वीर’ यानी टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स विकसित किए हैं। इन कम दूरी की मिसाइलों को युद्ध के मैदान में सीधे अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया जाता है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की स्थिति में अग्रिम मोर्चे पर तैनात लोकल कमांडरों को इन हथियारों के इस्तेमाल की छूट दी जा सकती है, जिससे किसी भी पल अनियंत्रित परमाणु युद्ध छिड़ने का जोखिम सौ गुना बढ़ जाता है। चीनी रिपोर्ट में इसी बात को सबसे बड़ा खतरा बताया गया है।

आतंकी संगठनों के पास परमाणु कमांड पहुंचने का सबसे बड़ा खौफ

पाकिस्तान केवल आर्थिक रूप से ही बदहाल नहीं है, बल्कि वह आतंकवाद का गढ़ भी बना हुआ है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे संगठन लगातार पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं। सबसे भयानक आशंका यह जताई जा रही है कि यदि पाकिस्तान में कोई बड़ा तख्तापलट या आंतरिक विद्रोह होता है, तो ये परमाणु हथियार कट्टरपंथी धार्मिक तत्वों या चरमपंथी आतंकी गुटों के हाथ में लग सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो ये संगठन बिना किसी रणनीतिक सोच या परिणाम की परवाह किए बिना किसी भी देश पर पहला हमला करने से हिचकिचाएंगे नहीं। चीनी एक्सपर्ट ने इसी परिदृश्य को दुनिया के लिए सबसे खौफनाक सपना करार दिया है।

भारत की सख्त रणनीति और दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन

भारत हमेशा से पाकिस्तान के इस परमाणु ब्लैकमेल को भांप चुका है। भारत की थल सेना, वायुसेना और नौसेना पूरी तरह से सक्षम हैं और किसी भी दुस्साहस का माकूल जवाब देने के लिए तत्पर हैं। भारत की ‘कोल्ड स्टार्ट’ डॉक्ट्रिन और ‘सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ यह सुनिश्चित करती है कि अगर पाकिस्तान एक भी परमाणु मिसाइल दागने की गलती करता है, तो भारत का जवाबी हमला पाकिस्तान के वजूद को ही नक्शे से मिटा देगा। हालांकि, चीनी एक्सपर्ट का कहना है कि बदहाली के अंतिम दौर में खड़ा पाकिस्तान शायद इस जवाबी तबाही के खौफ को भी नजरअंदाज कर दे, क्योंकि उसके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।

क्या परमाणु संपत्तियों को टेकओवर करने का समय आ गया है?

इस सिहरा देने वाली भविष्यवाणी के बाद अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियों को पाकिस्तान की परमाणु संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर कोई सख्त कदम उठाना चाहिए। यदि पाकिस्तान गृहयुद्ध या पूर्ण आर्थिक विफलता की ओर बढ़ता है, तो उसकी परमाणु मिसाइलों को ‘न्यूट्रलाइज’ या ‘सिक्योर’ करना पूरी दुनिया की पहली प्राथमिकता बन जाएगा। चीनी विशेषज्ञ का यह दावा दुनिया भर के रक्षा मंत्रालयों के लिए एक बहुत बड़ी वेक-अप कॉल है, जो यह स्पष्ट करता है कि दक्षिण एशिया में शांति का धागा कितना कमजोर हो चुका है।