
बिहार के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने एनडीए खेमे में हलचल मचा दी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सीवान जिले की दरौली विधानसभा सीट से विधायक विष्णुदेव पासवान के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। आरोप है कि विधायक और उनके करीबियों द्वारा एक सरकारी ब्लॉक भवन के निर्माण कार्य को रोकने और 50 लाख रुपये की भारी-भरकम रंगदारी या फिर 3 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से स्थानीय पुलिस प्रशासन और राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है। आइए जानते हैं कि इस सनसनीखेज मामले के पीछे की पूरी सच्चाई और अंदरखाने की कहानी क्या है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीवान जिले के आंदर इलाके में एक सरकारी ब्लॉक भवन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था। इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभालने वाले संवेदक (ठेकेदार) विवेक कुमार सिंह ने स्थानीय थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। ठेकेदार का आरोप है कि लोजपा विधायक विष्णुदेव पासवान और उनके नुमाइंदों द्वारा लगातार निर्माण कार्य को बाधित किया जा रहा था। आरोप है कि उनसे 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई और यह धमकी दी गई कि अगर रकम नहीं पहुंचाई गई तो वे जान से हाथ धो बैठेंगे। इसके अलावा 3 प्रतिशत कमिशन की मांग को लेकर भी दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है। इस प्रकार की धमकियों और लगातार हो रही मानसिक प्रताड़ना के बाद पीड़ित ठेकेदार ने पुलिस से गुहार लगाई, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज कर लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीवान पुलिस ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के तुरंत एक्शन लिया है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए विधायक के कथित प्रतिनिधि अमित कुमार पासवान और साहेब हुसैन नाम के एक अन्य शख्स को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। ठेकेदार की ओर से पुलिस को यह भी बताया गया कि यह विवाद रातों-रात पैदा नहीं हुआ है, बल्कि इससे पहले भी 19 सितंबर और 21 सितंबर को उनके स्टाफ के साथ मारपीट की गई थी और धमकियां दी गई थीं। इन तमाम घटनाओं के पुख्ता सबूत और पुराने सनहा व मामलों के आधार पर पुलिस अब इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र के हर एक पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
दूसरी तरफ, जब इस पूरे मामले में लोजपा (रा.) विधायक विष्णुदेव पासवान से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी रंगदारी और कमीशनखोरी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विधायक का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद, मनगढ़ंत और उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने की एक गहरी साजिश हैं। विधायक पक्ष का यह भी तर्क है कि उन्होंने तो खुद आंदर में चल रहे सरकारी भवन निर्माण कार्य में हो रही भारी अनियमितताओं और धांधली की शिकायत उच्च स्तर पर की थी तथा इसकी आधिकारिक जांच के लिए विभाग को पत्र लिखा था। उनका दावा है कि जब उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और गुणवत्ता की जांच की मांग की, तो भ्रष्ट तत्वों ने उल्टा उनके खिलाफ इस तरह की झूठी FIR की चाल चल दी। बहरहाल, पुलिस दोनों पक्षों के बวानों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है।
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