
पाकिस्तान द्वारा अपने पहले चंद्र मिशन के रोवर का नाम देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के नाम पर ‘जिन्ना-1’ रखे जाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस बीच, देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और जाने-माने विचारक एमजे अकबर ने इस नामकरण पर एक तीखा और व्यंग्यात्मक तंज कसा है। एमजे अकबर ने कहा है कि यह पूरी दुनिया के लिए एक खतरे और चिंता की बात है, क्योंकि जिन्ना चांद पर भी जाकर अगर कोई पहला काम करेंगे, तो वह केवल विभाजन (बंटवारा) करने का ही होगा।
‘चांद पर भी विभाजन ही करेगा जिन्ना’
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने पाकिस्तान के इस लूनर मिशन पर खुलकर बात की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान का पहला मून मिशन, जिसे वे गर्व से ‘जिन्ना-1’ कह रहे हैं, वास्तव में दुनिया के लिए एक बुरी खबर साबित हो सकता है क्योंकि जिन्ना की वैचारिक सोच हमेशा से बांटने की रही है। गौरतलब है कि एक तरफ जहां 14 अगस्त को पाकिस्तान अपनी स्वतंत्रता की वर्षगांठ मनाता है, वहीं भारत के विभाजन और पाकिस्तान के निर्माण के पीछे मोहम्मद अली जिन्ना की भूमिका को लेकर भारत में हमेशा से तीखी आलोचना होती रही है।
क्या है पाकिस्तान का ‘जिन्ना-1’ मून मिशन?
गंभीर आर्थिक संकटों और कंगाली से जूझ रहा पाकिस्तान अंतरिक्ष के क्षेत्र में अब चीन के कंधे पर सवार होकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। चीन के आठवें चंद्र मिशन (Lunar Mission) के साथ पाकिस्तान अपने पहले रोवर ‘जिन्ना-1’ को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहा है। इस महत्वाकांक्षी मिशन को साल 2029 में लॉन्च किए जाने की योजना है। योजना के मुताबिक, चीन के सहयोग से तैयार यह ‘जिन्ना-1’ रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर उतरकर अनुसंधान और कार्य करेगा।
‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’, शहबाज शरीफ को दो टूक जवाब
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर दिए गए बयान और गीदड़भभकियों का भी एमजे अकबर ने करारा जवाब दिया। शहबाज शरीफ ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा था कि पाकिस्तान के पानी की हर बूंद एक ‘रेड लाइन’ है और अगर नई दिल्ली इस संधि पर सही रास्ते पर नहीं आती है तो उसे सीधा जवाब दिया जाएगा।
इस पर पलटवार करते हुए एमजे अकबर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को सिंधु नदी के पानी की बूंद-बूंद की तो चिंता है, लेकिन उन्हें भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद के कारण बहे भारतीय नागरिकों और जवानों के खून की हर एक बूंद का हिसाब देना होगा। अकबर ने दो टूक अंदाज में कहा कि भारत का रुख बिल्कुल साफ है और जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
क्या है सिंधु जल संधि का मौजूदा विवाद?
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए एक भीषण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया था। इसके ठीक अगले दिन यानी 23 अप्रैल 2025 को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए भारत ने सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। भारत सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया था कि जिन परिस्थितियों और माहौल में यह संधि हुई थी, वे अब पूरी तरह बदल चुकी हैं और आतंकवाद व बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
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