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चक्रवात ‘अर्नब’ ने छत्तीसगढ़ में मचाई हलचल, बस्तर से सरगुजा तक 12 जिलों में स्कूलों की छुट्टी; IMD का भारी बारिश और आंधी का रेड अलर्ट

बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) का कहर अब आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों से आगे बढ़कर मध्य भारत के राज्यों में साफ दिखाई देने लगा है। तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के दक्षिणी और मध्य हिस्से पूरी तरह घने बादलों की गिरफ्त में आ चुके हैं। चक्रवात के स्थल भाग में आगे बढ़ने के साथ ही राज्य के कई संभागों में तेज झोंकेदार तूफानी हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा बस्तर, रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कई जिलों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी करने के बाद शासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार और संबंधित जिला कलेक्टरों ने प्रभावित 12 जिलों में आज सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में तात्कालिक अवकाश घोषित कर दिया है।

मौसम विभाग की गंभीर चेतावनी और ग्रामीण व अंदरूनी इलाकों में नदी-नालों के उफान पर आने के खतरे को देखते हुए 12 संवेदनशील जिलों के जिला दंडाधिकारियों (कलेक्टरों) ने स्कूलों में छुट्टी के आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। जिन जिलों में शिक्षण संस्थान बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें शामिल हैं:

  • बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील जिले: बस्तर (जगदलपुर), सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर। इन इलाकों में पहाड़ी नालों और शबरी व इंद्रावती जैसी नदियों में तेजी से जलस्तर बढ़ने की आशंका है।

  • मध्य और मैदानी इलाके: धमतरी, गरियाबंद, बालोद, राजनांदगांव और महासमुंद। इन जिलों में तटीय ओडिशा से सटा होने के कारण लगातार तेज बारिश और आंधी का सीधा असर देखने को मिल रहा है।

कलेक्टरों ने सभी प्राचार्यों और स्कूल प्रबंधन को सख्त हिदायत दी है कि किसी भी बच्चे को स्कूल न बुलाया जाए। वहीं शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को मुख्यालय में उपस्थित रहकर आवश्यकता पड़ने पर राहत और बचाव कार्यों में आपदा प्रबंधन दल का सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, तूफान ‘अर्नब’ जमीन पर दाखिल होने के बाद धीरे-धीरे डीप डिप्रेशन में तब्दील हो रहा है, लेकिन इसके भीतर मौजूद भारी नमी और दबाव के चलते 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है।

  • कच्चे मकानों और टिन शेड को नुकसान: बस्तर और गरियाबंद के वनांचल क्षेत्रों में कच्चे मकानों, खपरैल और टिन की छतों के उड़ने का बड़ा जोखिम है।

  • सड़क संपर्क बाधित होने की आशंका: तेज आंधी के कारण राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर पुराने पेड़ों के गिरने और बिजली के तार टूटने से विद्युत आपूर्ति ठप हो सकती है।

  • नदी-नाले उफान पर: सुकमा और बीजापुर के कई रपटों और पुलियों पर पानी चढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जोड़ने वाले कई अंतरराज्यीय मार्गों पर आवागमन एहतियातन रोक दिया गया है।

राजधानी रायपुर समेत दुर्ग, भिलाई, बेमेतरा और बिलासपुर में भी सुबह से ही सूरज के दर्शन नहीं हुए हैं और लगातार बूंदाबांदी व रिमझिम बारिश जारी है। रायपुर मौसम केंद्र के अनुसार, दोपहर बाद से बारिश की तीव्रता में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। रायपुर और आसपास के निचले रिहायशी इलाकों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम ने कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं और जल निकासी पंपों को तैनात कर दिया है। खारुन नदी के तटीय गांवों में मुनादी कराकर लोगों को गहरे पानी के नजदीक न जाने की चेतावनी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने आपात बैठक कर सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।

  • राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और होमगार्ड की विशेष रेस्क्यू टीमों को बोट्स, लाइफ जैकेट और वुड-कटर मशीनों के साथ सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर और गरियाबंद में संवेदनशील स्थानों पर अग्रिम रूप से तैनात कर दिया गया है।

  • स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम (सांप के काटने की दवा), जरूरी जीवन रक्षक दवाएं और जेनरेटर बैकअप अनिवार्य रूप से चालू रखें।

  • जिला नियंत्रण कक्ष (District Control Rooms) को 24 घंटे एक्टिव कर दिया गया है और आम जनता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब तक कोई अत्यंत आवश्यक कार्य न हो, वे पक्के घरों से बाहर न निकलें। विशेष रूप से जलमग्न रपटों, पुलों और उफनते नालों को पार करने की बिल्कुल भी कोशिश न करें। वहीं किसानों को सलाह दी गई है कि खेतों में कटी हुई धान की फसल को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर तिरपाल से ढक कर रखें, ताकि बेमौसम मूसलाधार बारिश से सालभर की गाढ़ी मेहनत को नुकसान से बचाया जा सके।