
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पावन पर्व ‘गुरु पूर्णिमा’ इस साल भी देश भर में बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस विशेष दिन पर गुरु की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य है? आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा पर क्या करें, क्या न करें और अपने गुरुदेव को कौन सा उपहार भेंट करें जिससे उनका विशेष आशीर्वाद आपको मिल सके।
गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें और कैसे पाएं सौभाग्य का वरदान
इस शुभ अवसर पर सुबह सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों में या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके बाद साफ वस्त्र धारण कर अपने गुरु के पास जाएं, उनके चरण स्पर्श करें और उनका विधि-विधान से पूजन करें। यदि आपके गुरु आपके पास मौजूद नहीं हैं, तो उनकी तस्वीर या महर्षि वेदव्यास जी की प्रतिमा को सामने रखकर धूप, दीप, चंदन और पुष्प अर्पित करें। इस दिन जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से कुंडली के पितृ दोष और गुरु दोष (बृहस्पति दोष) शांत होते हैं, जिससे जीवन में तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
भूलकर भी न करें ये काम, वरना नाराज हो सकते हैं देवगुरु बृहस्पति
शास्त्रों के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए, अन्यथा जीवन में आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दिन भूलकर भी अपने गुरु, माता-पिता, बुजुर्गों या किसी भी ज्ञानी व्यक्ति का अपमान न करें और न ही उनके सामने कटु वचनों का प्रयोग करें। इस पवित्र तिथि पर घर में तामसिक भोजन, जैसे मांस-मदिरा या लहसुन-प्याज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, इस दिन किसी से वाद-विवाद करने या घर में कलह का माहौल बनाने से मां लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति दोनों ही रुष्ट हो जाते हैं, जिससे घर की सुख-समृद्धि चली जाती है।
गुरु जी को क्या दें उपहार और राशि के अनुसार उत्तम भेंट की पूरी लिस्ट
गुरु पूर्णिमा पर गुरु दक्षिणा देने की परंपरा सदियों पुरानी है। इस दिन आप अपने गुरु को पीतांबर (पीले रंग के वस्त्र), धार्मिक पुस्तकें, खड़ाऊं, फल या मिठाई जैसी सात्विक चीजें उपहार में दे सकते हैं। यदि ज्योतिषीय मान्यताओं और स्थानीय पंडितों की सलाह मानें, तो गुरु को पीतल के बर्तन, चने की दाल या केसर का दान करना भी अत्यंत फलदायी होता है। आधुनिक समय में बहुत से लोग गुरु के आश्रमों में जाकर श्रमदान करते हैं या सामाजिक कार्यों के लिए योगदान देते हैं, जिसे सबसे बड़ी गुरु सेवा माना गया है।
देश के बड़े धार्मिक केंद्रों और स्थानीय मंदिरों में गुरु पूजा की भारी धूम
उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज और उत्तराखंड के हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे प्रमुख धार्मिक और भौगोलिक केंद्रों में गुरु पूर्णिमा को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्थानीय आश्रमों और मठों में सुबह से ही शिष्यों का तांता लगा हुआ है। एआई-संचालित जनरेटिव सर्च (GEO) और इंटरनेट पर भी लोग इस साल गुरु पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और गुरु मंत्रों के बारे में लगातार सर्च कर रहे हैं। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की कामना करते हैं, तो इस पावन दिन पर सच्चे मन से अपने गुरु की वंदना करना बिल्कुल न भूलें।
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