
सनातन परंपरा में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) या ‘व्यास पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर चारों वेदों के रचयिता और महान ऋषि महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। यह दिन अपने आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षकों और माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर होता है।
गुरु पूर्णिमा तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई की शाम 06:18 बजे से होगी और इसका समापन 29 जुलाई की रात 08:05 बजे होगा। उदयातिथि के नियम का पालन करते हुए गुरु पूर्णिमा का मुख्य पर्व 29 जुलाई (बुधवार) को ही मनाया जाएगा।
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शुभ पूजा मुहूर्त (29 जुलाई): सुबह 05:41 बजे से सुबह 09:05 बजे तक (स्नान, दान और गुरु पूजन के लिए उत्तम)
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अमृत मुहूर्त: सुबह 07:22 बजे से सुबह 09:04 बजे तक
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अभिजीत/विजय मुहूर्त: दोपहर 02:43 बजे से दोपहर 03:37 बजे तक
कुंडली से ‘गुरु दोष’ दूर करने के 5 अचूक उपाय
यदि आपकी कुंडली में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) कमजोर स्थिति में हैं या ‘गुरु दोष’ बना हुआ है, तो इसके कारण शिक्षा, विवाह, धन और करियर में लगातार बाधाएं आती हैं। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए सबसे फलदायी माना जाता है। इस दिन ये 5 उपाय अवश्य करें:
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पीली वस्तुओं का दान करें:
गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद किसी गरीब, जरूरतमंद या मंदिर में चने की दाल, हल्दी, बेसन, केसर, केले और पीले वस्त्रों का दान करें। इससे देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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गुरु मंत्र का जाप करें:
इस दिन ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ या ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः’ मंत्र का 108 बार तुलसी या हल्दी की माला से जाप करें। इससे मन शांत होता है और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है।
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केसर या हल्दी का तिलक लगाएं:
गुरु पूर्णिमा से शुरुआत करके प्रतिदिन नाभि, माथे और दोनों कानों के पीछे केसर या शुद्ध हल्दी का तिलक लगाएं। ऐसा करने से भाग्य का साथ मिलने लगता है और मान-सम्मान बढ़ता है।
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केले के वृक्ष की पूजा:
इस दिन जल में थोड़ी सी हल्दी और चने की दाल मिलाकर केले के पेड़ की जड़ में अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर 7 बार परिक्रमा करें। यह उपाय विशेष रूप से शीघ्र विवाह और दांपत्य सुख के लिए रामबाण माना जाता है।
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बजुर्गों और गुरुजनों का आशीर्वाद लें:
गुरु पूर्णिमा के दिन अपने असली गुरु, शिक्षकों और घर के बड़े-बुजुर्गों (माता-पिता, दादा-दादी) के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें पीले वस्त्र या मिठाई भेंट करें। शास्त्रों के अनुसार, जीवित गुरुओं का आदर करने से बड़ा कोई ज्योतिषीय उपाय नहीं है।
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