
आज के इस भागदौड़ भरे आधुनिक युग में गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या और लगातार घंटों तक कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत ने हमारे पाचन तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। सुबह की शुरुआत चाय के साथ और रात का खाना लेट नाइट हेवी डिनर के रूप में लेना आज के समय में आम बात बन गई है। यही वजह है कि आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति गैस, एसिडिटी, कब्ज, अपच और पेट फूलने यानी ब्लोटिंग (Bloating) की समस्या से त्रस्त नजर आता है। लोग थोड़ी सी भी तली-भुनी या भारी चीज खाते हैं, तो पेट में गुब्बारे की तरह हवा भरने लगती है और सीने में जलन होने लगती है। इस समस्या से राहत पाने के लिए लोग अक्सर तरह-तरह की दवाइयों, चूरन या एंटासिड का सहारा लेते हैं, लेकिन ये चीजें केवल कुछ समय के लिए ही राहत देती हैं। यदि आप भी पेट की इन दिक्कतों से हमेशा के लिए स्थायी रूप से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो हमारे प्राचीन योग विज्ञान में इसका एक अचूक और बेहद असरदार समाधान मौजूद है। योग गुरुओं और आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार, नियमित रूप से सिर्फ कुछ मिनट किया जाने वाला ‘पवनमुक्तासन’ आपके पाचन तंत्र को पूरी तरह दुरुस्त कर सकता है।
योग की दुनिया में ‘पवनमुक्तासन’ दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है—पहला ‘पवन’ जिसका अर्थ हवा या गैस है, और दूसरा ‘मुक्त’ जिसका अर्थ बाहर निकालना या छुटकारा पाना है, तथा ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा है। इस प्रकार, इस योगासन का सीधा सा मतलब है—वह योगासन जो पेट और आंतों में फंसी हुई अतिरिक्त गैस और हवा को शरीर से बाहर निकाल देता है। जब हम इस आसन को करते हैं, तो हमारे पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन अंगों में रक्त का संचार तेज हो जाता है और रुकी हुई गैस आसानी से रिलीज हो जाती है। पेट के निचले हिस्से और आंतों की बेहतरीन मालिश होने के कारण यह आसन उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो क्रोनिक कब्ज या गैस की समस्या से परेशान रहते हैं। आधुनिक जीवनशैली में जहां शारीरिक श्रम कम हो गया है और पेट की मांसपेशियां शिथिल पड़ जाती हैं, वहां पवनमुक्तासन उन मांसपेशियों में नई जान फूंकने का काम करता है।
किसी भी योगासन का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही तकनीक और विधि के साथ किया जाए। गलत तरीके से किया गया योगासन फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है, इसलिए इसे करने की सही प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
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चरण 1: योगा मैट या किसी साफ जमीन पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। आपके दोनों पैर आपस में मिले हुए होने चाहिए और हाथ शरीर के पास सीधे होने चाहिए।
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चरण 2: गहरी सांस अंदर लें और सांस छोड़ते हुए अपने दाहिने घुटने को मोड़कर अपनी छाती की तरफ लाएं।
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चरण 3: अब अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर दाहिने घुटने को मजबूती से पकड़ लें और उसे अपनी छाती और पेट के पास दबाएं।
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चरण 4: इसके बाद लंबी सांस छोड़ते हुए अपने सिर और कंधे को जमीन से ऊपर उठाएं और अपनी नाक या ठोड़ी (Chin) को दाहिने घुटने के छूने का प्रयास करें। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक सामान्य रूप से सांस लेते हुए रुकें।
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चरण 5: अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने सिर और पैर को वापस जमीन पर सीधा कर लें। इसी प्रक्रिया को अब अपने बाएं पैर से दोहराएं और फिर दोनों पैरों को एक साथ मोड़कर इस अभ्यास को पूरा करें।
जब हम भोजन करते हैं, तो कई बार पाचन क्रिया धीमी होने के कारण भोजन आंतों में सड़ने लगता है और उससे गैस पैदा होती है जो पेट में फंस जाती है। पवनमुक्तासन करने से पेट की अंदरूनी दीवार पर और विशेष रूप से बड़ी आंत (Colon) पर दबाव पड़ता है। यह दबाव पेट के अंदर दबी हुई हवा को नेचुरल तरीके से बाहर निकालने का रास्ता साफ करता है। इसके अलावा, यह आसन हमारे पेट के ‘अग्नि तत्व’ यानी पाचन अग्नि को प्रज्वलित करता है, जिससे खाया गया भोजन जल्दी और आसानी से पचने लगता है। जिन लोगों को अक्सर भारीपन, खट्टी डकारें आने की समस्या या पेट में मरोड़ उठती है, वे यदि सुबह खाली पेट या दोपहर के भोजन के कुछ घंटों बाद इस आसन को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो उन्हें कुछ ही दिनों में चमत्कारिक परिणाम देखने को मिलने लगते हैं।
पवनमुक्तासन केवल गैस और ब्लोटिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके नियमित अभ्यास से हमारे पूरे शरीर को अनगिनत स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और बैली फैट (कमर की चर्बी) को कम करने में भी बहुत मददगार साबित होता है। चूंकि इस अभ्यास के दौरान रीढ़ की हड्डी पर हल्का खिंचाव पड़ता है, इसलिए यह पीठ के निचले हिस्से यानी लोअर बैक पेन से राहत दिलाता है और रीढ़ की फ्लैक्सिबिलिटी को बढ़ाता है। इसके साथ ही, यह श्रोणि क्षेत्र (Pelvic Region) के अंगों को उत्तेजित करता है और प्रजनन अंगों से जुड़े विकारों को दूर करने में सहायता करता है। पेट साफ रहने से चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है, सुस्ती दूर होती है और पूरा शरीर दिनभर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है।
भले ही पवनमुक्तासन एक बेहद सुरक्षित और सामान्य योगासन है, फिर भी कुछ खास परिस्थितियों में इसे सावधानी के साथ करना चाहिए। जिन महिलाओं को गर्भावस्था (Pregnancy) का समय चल रहा हो या जिन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट या दर्द हो, हर्निया की शिकायत हो या हाल ही में पेट की कोई बड़ी सर्जरी हुई हो, उन्हें इस आसन को करने से बचना चाहिए या किसी योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। शुरुआत में इसे जबरदस्ती ज्यादा दबाव डालकर न करें, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार ही शरीर को स्ट्रेच करें। अपनी व्यस्त दिनचर्या में से केवल 10 से 15 मिनट निकालकर इस आसान योगासन को अपनी आदत बनाएं, और फिर देखें कि कैसे बिना किसी दवाई के आपका पेट हमेशा हल्का, स्वस्थ और पाचन तंत्र पूरी तरह दुरुस्त रहता है।
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