क्वांट से लेकर निप्पॉन इंडिया के इन म्यूचुअल फंड्स ने लंबी अवधि में निवेशकों को दिया बंपर रिटर्न

भारतीय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह का अभूतपूर्व बूम देखने को मिला है, उसने आम मध्यमवर्गीय नागरिकों के निवेश करने के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। बैंक की फिक्सड डिपॉजिट (FD) और पारंपरिक बचत योजनाओं को पीछे छोड़ते हुए आज देश का आम निवेशक सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) के जरिए अपनी छोटी-छोटीचचतों को शेयर बाजार में लगाकर भविष्य के लिए करोड़ों का फंड तैयार कर रहा है। म्यूचुअल फंड्स में जब भी लंबी अवधि (Long-term Wealth Creation) के शानदार प्रदर्शन की बात आती है, तो कुछ खास फंड हाउस और स्कीमों के नाम सबसे ऊपर जुबान पर आते हैं। देश के वित्तीय विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों ने पिछले 5 से 10 वर्षों के ऐतिहासिक रिटर्न, अल्फा जेनरेशन और जोखिम प्रबंधन (Risk Management) के आधार पर देश के टॉप 5 ऐसे एसआईपी फंड्स की सूची तैयार की है जिन्होंने अपने निवेशकों को वाकई मालामाल कर दिया है। क्वांट म्यूचुअल फंड (Quant Mutual Fund) से लेकर निप्पॉन इंडिया (Nippon India) और टाटा व पराग पारिख जैसी दिग्गज फंड हाउस की इन स्कीमों ने निवेशकों के पैसे को कई गुना बढ़ा दिया है। आइए आज विस्तार से जानते हैं कि वे टॉप 5 एसआईपी फंड्स कौन-से हैं और उन्होंने लंबी अवधि में निवेशकों को कितना शानदार रिटर्न दिया है।

किसी भी वित्तीय सलाहकार से जब यह पूछा जाता है कि शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से कैसे बचा जाए और सबसे सुरक्षित तरीके से बड़ा फंड कैसे बनाया जाए, तो उनका एक ही जवाब होता है—लंबी अवधि की एसआईपी। जब आप हर महीने एक निश्चित राशि (चाहे वह 500 रुपये हो या 5000 रुपये) किसी अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगातार निवेश करते हैं, तो आपको ‘रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ (Rupee Cost Averaging) और ‘कंपाउंडिंग’ (Power of Compounding) यानी चक्रवृद्धि ब्याज का दोहरा फायदा मिलता है। बाजार जब गिरता है, तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार उठता है, तो आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू तेजी से बढ़ती है। यही वजह है कि पिछले एक दशक में भारत में एसआईपी का मासिक आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये को पार कर चुका है। आज छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक के युवा निवेशक अपनी पहली नौकरी लगते ही एसआईपी शुरू कर देते हैं। आइए अब उन टॉप 5 फंड्स के बारे में जानते हैं जिन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से निवेशकों के बीच अपनी एक अलग धाक जमाई है।

इस सूची में सबसे पहला और सबसे चर्चित नाम क्वांट स्मॉल कैप फंड का आता है। इस फंड ने पिछले कुछ वर्षों में अपने अनूठे और आक्रामक निवेश मॉडल (Predictive Analytics & Dynamic Management) के दम पर निवेशकों को हैरान करने वाला रिटर्न दिया है। स्मॉल कैप कैटेगरी में आने वाला यह फंड उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है जिनमें विकास की अपार संभावनाएं होती हैं। जिन निवेशकों ने इस फंड में 5 से 7 साल पहले एसआईपी शुरू की थी, उनके पैसे कई गुना हो चुके हैं। हालांकि, स्मॉल कैप फंड्स में जोखिम (Volatility) थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन जिन लोगों का नजरिया लंबा होता है, उनके लिए यह फंड हमेशा से वेल्थ क्रिएटर साबित हुआ है।

देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय स्मॉल कैप फंड्स में शुमार निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फंड ने लंबी अवधि में निवेशकों का जबरदस्त भरोसा जीता है। इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) देश में सबसे बड़ा है। फंड मैनेजर की सूझबूझ और मजबूत स्टॉक सिलेक्शन के चलते इस स्कीम ने लगातार अपने बेंचमार्क इंडेक्स को पछाड़ा है। लंबी अवधि की एसआईपी के जरिए जिन निवेशकों ने इस फंड में अनुशासन के साथ निवेश किया, उन्होंने न सिर्फ अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा किया बल्कि शानदार मुनाफा भी कमाया।

यदि कोई निवेशक ऐसा फंड तलाश रहा है जो बाजार की गिरावट में कम गिरे और तेजी में अच्छा मुनाफा दे, तो पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड का नाम सबसे पहले आता है। यह फंड वैल्यू इन्वेस्टिंग के सिद्धांतों पर काम करता है और भारतीय बाजारों के साथ-साथ अल्फा और विदेशी कंपनियों (जैसे अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट आदि) में भी निवेश करने की खूबी रखता है। फ्लेक्सी कैप कैटेगरी का यह फंड अपने संतुलित पोर्टफोलियो और बेहतरीन रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न के कारण निवेशकों के बीच बेहद पसंदीदा बना हुआ है। लंबी अवधि की एसआईपी के लिए इसे सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद फंड माना जाता है।

चूंकि आधुनिक दौर डिजिटल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक का है, इसलिए तकनीकी सेक्टर के फंड्स ने भी निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया है। टाटा डिजिटल इंडिया फंड ने आईटी सेक्टर के शेयरों में निवेश कर निवेशकों को लंबी अवधि में मालामाल किया है। हालांकि सेक्टर फंड्स में जोखिम थोड़ा अधिक होता है, क्योंकि वे एक ही इंडस्ट्री पर निर्भर होते हैं, फिर भी टेक क्रांति के इस दौर में इन फंड्स ने एसआईपी के जरिए निवेशकों को शानदार सीएजीआर (CAGR) रिटर्न दिया है।

किसी भी टॉप-परफॉर्मिंग फंड में एसआईपी शुरू करने से पहले निवेशकों को अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) और निवेश के लक्ष्यों (जैसे बच्चों की शिक्षा, रिटायरमेंट या घर खरीदना) का आकलन जरूर कर लेना चाहिए। पिछले साल का शानदार रिटर्न इस बात की गारंटी नहीं होता कि भविष्य में भी वैसा ही रिटर्न मिलेगा, इसलिए हमेशा डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाकर ही निवेश करना समझदारी है।