
वैश्विक ऊर्जा बाजार से भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना जताई जा रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स और ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स के ताजा अनुमानों के मुताबिक, आने वाले समय में ब्रेंट क्रूड फिसलकर 65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली यह संभावित गिरावट भारतीय सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित होने वाली है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद घरेलू शेयर बाजार में हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के शेयरों पर निवेशकों की नजरें टिक गई हैं, जहां भारी रिटर्न मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्यों $65 तक गिर सकता है कच्चे तेल का दाम
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई बड़े आर्थिक कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर चीन और अमेरिका में आर्थिक सुस्ती के चलते कच्चे तेल की मांग में लगातार कमी देखी जा रही है। इसके साथ ही, ओपेक प्लस (OPEC+) देशों के बाहर के उत्पादक जैसे अमेरिका, ब्राजील और गुयाना में कच्चे तेल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। बाजार में सप्लाई ज्यादा होने और मांग कमजोर रहने के इसी असंतुलन के कारण कमोडिटी एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि ब्रेंट क्रूड बहुत जल्द $65 के स्तर को छू सकता है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए एक बहुत बड़ा वरदान है।
HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में क्यों आएगी बंपर तेजी
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होता है, तो देश की सरकारी तेल कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होता है। एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी जैसी कंपनियां विदेशों से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन करती हैं और घरेलू बाजार में बेचती हैं। कच्चा तेल सस्ता होने से इन कंपनियों का रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) और मार्केटिंग मार्जिन दोनों बहुत मजबूत हो जाते हैं। वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि मार्जिन में सुधार होने से इन कंपनियों के शुद्ध मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी, जिससे इनके शेयरों में 69 फीसदी तक का दमदार रिटर्न देखने को मिल सकता है।
आम जनता और खुदरा निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने
कच्चे तेल में गिरावट का सीधा फायदा केवल कंपनियों को ही नहीं, बल्कि देश की आम जनता को भी मिल सकता है। अगर लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें $65 के आसपास बनी रहती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों के पास घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को कम करने का मौका होगा। ईंधन सस्ता होने से देश में माल ढुलाई की लागत घटेगी, जिससे खुदरा महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। वहीं, शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह एक बेहतरीन वैल्यू बाइंग (Value Buying) का मौका हो सकता है, क्योंकि इन सरकारी कंपनियों के शेयर इस समय आकर्षक वैल्यूएशन और अच्छे डिविडेंड यील्ड के साथ उपलब्ध हैं।
ब्रोकरेज हाउसेज का इन ऑयल स्टॉक्स पर क्या है रुख
दिग्गज ब्रोकरेज हाउसेज ने तेल कंपनियों के ताजा वित्तीय हालातों और कच्चे तेल के नए आउटलुक को देखते हुए अपनी रेटिंग्स में सुधार किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन तीनों सरकारी तेल कंपनियों में से हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के शेयरों में सबसे तेज रिकवरी और ग्रोथ देखने को मिल सकती है, क्योंकि इनका मार्केटिंग नेटवर्क बेहद मजबूत है। हालांकि, बाजार के जोखिमों को देखते हुए निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों और ओपेक देशों के अगले फैसलों पर भी नजर रखें, लेकिन मौजूदा ट्रेंड पूरी तरह से भारतीय ऑयल स्टॉक्स के पक्ष में नजर आ रहा है।
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