Tuesday , October 20 2026

क्या सुकन्या समृद्धि योजना में बेटी के 18 साल होने पर पूरा पैसा निकाल सकते हैं? जानिए क्या कहता है पोस्ट ऑफिस का नियम

भारत सरकार द्वारा बालिकाओं के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए शुरू की गई ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ (SSY) बेटियों के लिए सबसे लोकप्रिय और अधिक रिटर्न देने वाली लघु बचत योजनाओं में से एक है। वर्तमान में 8.2% की वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज दर और ‘ट्रिपल ई’ (EEE) टैक्स छूट के चलते करोड़ों अभिभावक अपनी बच्चियों के जन्म के तुरंत बाद डाकघर या अधिकृत बैंक शाखाओं में यह खाता खुलवाते हैं। लेकिन जब बेटी किशोरावस्था पार कर 18 वर्ष की आयु तक पहुंचती है, तो अधिकांश अभिभावकों के मन में निकासी के नियमों को लेकर एक बड़ा भ्रम रहता है।

कई माता-पिता यह मान बैठते हैं कि बेटी के बालिग होते ही यानी 18 वर्ष की उम्र पूरी होते ही सुकन्या खाते में जमा पूरा पैसा (ब्याज सहित मूलधन) एकमुश्त निकाला जा सकता है। यदि आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं, तो पोस्ट ऑफिस के राष्ट्रीय बचत नियमों को बारीकी से समझ लेना आवश्यक है। डाक विभाग और वित्त मंत्रालय के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, बेटी के 18 वर्ष के होने पर पूरे पैसे की एकमुश्त निकासी की अनुमति बिल्कुल नहीं मिलती है। इस उम्र में केवल शर्तों के अधीन आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) का प्रावधान है। आइए जानते हैं कि 18 साल पर कितना पैसा निकाला जा सकता है, इसके लिए क्या कागजात चाहिए और पूरा फंड कब मिलता है।

डाकघर सुकन्या समृद्धि खाता नियम, 2019 के अनुसार, खाताधारक बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर या 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद (जो भी पहले हो) खाते से केवल उच्च शिक्षा (Higher Education) के खर्चों को पूरा करने के लिए पैसे निकालने की छूट दी जाती है।

इस आंशिक निकासी की सीमा और शर्तें इस प्रकार हैं:

  • अधिकतम निकासी सीमा: आवेदन करने वाले वित्तीय वर्ष से ठीक पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में मौजूद कुल शेष राशि (Balance) का अधिकतम 50 प्रतिशत ही निकाला जा सकता है।

  • भुगतान का प्रारूप: यह 50% राशि या तो एकमुश्त निकाली जा सकती है या फिर शिक्षा की जरूरत के अनुसार 5 वर्षों की समान वार्षिक किस्तों में ली जा सकती है।

  • कॉलेज या संस्थान में दाखिले का प्रमाण अनिवार्य: केवल 18 साल की उम्र पूरी हो जाना निकासी का आधार नहीं बनता। इसके लिए किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान, यूनिवर्सिटी या कॉलेज में प्रवेश (Admission) का आधिकारिक दस्तावेज, फीस स्ट्रक्चर या एडमिशन लेटर डाकघर काउंटर पर जमा करना अनिवार्य होता है। निकासी की राशि संस्थान द्वारा मांगी गई वास्तविक फीस या 50% बैलेंस, दोनों में से जो भी कम हो, उतनी ही स्वीकृत की जाती है।

अक्सर अभिभावक यह सवाल पूछते हैं कि यदि वे 18 वर्ष की उम्र में बेटी का विवाह तय कर देते हैं, तो क्या खाता समय से पहले बंद (Premature Closure) करके पूरा पैसा निकाला जा सकता है?

डाक विभाग के नियमानुसार, यदि बालिका की आयु विवाह की कानूनी न्यूनतम उम्र यानी 18 वर्ष पूरी हो चुकी है और उसका वास्तविक विवाह हो रहा है, तो शादी के खर्च के लिए खाते को समय से पहले पूरी तरह बंद करने की अनुमति दी जाती है:

  1. समय सीमा का नियम: यह आवेदन विवाह की संभावित तारीख से 1 महीने पहले से लेकर विवाह संपन्न होने के 3 महीने बाद तक दिया जा सकता है।

  2. शपथ पत्र और आयु प्रमाण: बालिका का आयु प्रमाण पत्र और यह प्रमाणित करने वाला शपथ पत्र (Affidavit) देना अनिवार्य होता है कि विवाह की तिथि पर बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं है और वह नाबालिग नहीं है।

  3. पूरी राशि का भुगतान: इस विशेष परिस्थिति में खाते में जमा मूलधन और अर्जित पूरा ब्याज खाताधारक बालिका को भुगतान कर खाता स्थायी रूप से बंद कर दिया जाता है।

यदि उच्च शिक्षा के लिए केवल 50% पैसा निकाला गया है या कोई निकासी नहीं की गई है, तो सुकन्या समृद्धि योजना का खाता खाता खोलने की तारीख से ठीक 21 वर्ष (21 Years from the date of account opening) पूरे होने पर कानूनी रूप से मैच्योर होता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी अभिभावक ने अपनी बेटी के जन्म के समय वर्ष 2026 में 0 वर्ष की उम्र में यह खाता खुलवाया है, तो यह खाता वर्ष 2047 में (21 साल बाद) पूरी तरह परिपक्व होगा। उस समय बेटी की उम्र 21 वर्ष होगी। लेकिन यदि खाता तब खुलवाया गया जब बेटी की उम्र 7 वर्ष थी, तो खाता 21 वर्षों बाद यानी बेटी की 28 वर्ष की आयु में मैच्योर होगा (बशर्ते उसका विवाह उससे पहले न हुआ हो)।

चरण / नियम समयावधि / विवरण क्या निकासी संभव है?
अंशदान की अवधि (Deposit Period) खाता खोलने से लेकर 15 वर्ष तक केवल न्यूनतम ₹250 और अधिकतम ₹1.5 लाख प्रति वर्ष जमा करना अनिवार्य
वेटिंग पीरियड (Waiting Period) 15वें वर्ष से 21वें वर्ष तक (6 वर्ष) नया पैसा जमा नहीं करना होता, पूरे बैलेंस पर सरकार तय 8.2% ब्याज जोड़ती रहती है
18 वर्ष की आयु या 10वीं पास बालिका के बालिग होने पर उच्च शिक्षा के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के बैलेंस का 50% तक
18 वर्ष बाद वास्तविक विवाह विवाह से 1 माह पूर्व या 3 माह बाद तक 100% पूरा फंड (प्री-मैच्योर क्लोजर के तहत)
पूर्ण परिपक्वता (Full Maturity) खाता खोलने के 21 वर्ष पूरे होने पर 100% पूरा फंड ब्याज सहित टैक्स-फ्री

18 वर्ष की आयु का एक और बड़ा कानूनी पहलू यह है कि इस उम्र तक पहुंचते ही खाते के संचालन अधिकार स्वतः बदल जाते हैं। जब तक बेटी 18 साल की नहीं होती, तब तक खाते का संचालन अभिभावक (माता या पिता) द्वारा किया जाता है।

जैसे ही बेटी 18 वर्ष की होती है:

  • केवाईसी का अपडेशन: बेटी को अपने नजदीकी डाकघर या बैंक जाकर अपने व्यक्तिगत केवाईसी दस्तावेज (आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और हस्ताक्षर नमूना) जमा कराने होते हैं।

  • स्वामित्व हस्तांतरण: इसके बाद वह खाता पूरी तरह से बेटी के स्वतंत्र संचालन (Self-operated Account) में तब्दील हो जाता है। इसके बाद किसी भी प्रकार की आंशिक निकासी या मैच्योरिटी का पैसा सीधे बेटी के व्यक्तिगत बचत बैंक खाते में ही ट्रांसफर किया जाता है, माता-पिता के खाते में नहीं।

यदि आपकी बेटी 18 वर्ष की हो चुकी है और कॉलेज की पढ़ाई के लिए आपको 50% फंड की आवश्यकता है, तो डाकघर में इन स्टेप्स को फॉलो करें:

  1. डाकघर जाएं: जिस डाकघर शाखा में सुकन्या समृद्धि खाता चल रहा है, वहां बेटी के साथ उपस्थित हों।

  2. निकासी फॉर्म भरें: सुकन्या समृद्धि योजना का आंशिक निकासी फॉर्म (Withdrawal Form) प्राप्त करें और उसमें आवश्यक विवरण भरें।

  3. दस्तावेज संलग्न करें:

    • सुकन्या समृद्धि खाते की मूल पासबुक।

    • कॉलेज/यूनिवर्सिटी का वास्तविक एडमिशन ऑफर लेटर और फीस की आधिकारिक रसीद/मांग पत्र।

    • बेटी का आधार कार्ड और पैन कार्ड।

    • बेटी के नाम का बैंक पासबुक या कैंसिल्ड चेक (जिसमें पैसा ट्रांसफर होना है)।

  4. सत्यापन और भुगतान: पोस्टमास्टर द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद स्वीकृत 50% तक की राशि सीधे बेटी के खाते में एनईएफटी (NEFT) या चेक के माध्यम से हस्तांतरित कर दी जाती है।

वित्तीय योजनाकारों की सलाह है कि यदि आपके पास उच्च शिक्षा के खर्चों के लिए कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे लिक्विड फंड, पीपीएफ या एजुकेशन लोन) मौजूद है, तो सुकन्या समृद्धि खाते से 18 साल पर 50% पैसा निकालने से बचना चाहिए।

सुकन्या खाते पर मिलने वाला 8.2% का सॉवरेन और कंपाउंडेड ब्याज वर्तमान में किसी भी अन्य सरकारी योजना या बैंक एफडी से अधिक है। यदि आप इस पैसे को 21 वर्ष की पूरी मैच्योरिटी तक खाते में ही रहने देते हैं, तो चक्रवृद्धि ब्याज के प्रभाव से आखिरी के 5-6 वर्षों में आपका फंड बहुत तेजी से बढ़ता है और बेटी के करियर की शुरुआत या विवाह के समय एक विशाल टैक्स-फ्री पूंजी बनकर सामने आता है। इसलिए केवल वास्तविक जरूरत और फीस की कमी होने पर ही 18 साल की उम्र में आंशिक निकासी का विकल्प चुनें।