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क्या बच्चे के नाम से Demat Account खुल सकता है? शेयरों में Trading संभव है या नहीं; जानिए SEBI के अनिवार्य नियम

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) और डिपॉजिटरी संस्थाओं (CDSL और NSDL) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग बच्चों के नाम पर डीमैट अकाउंट पूरी तरह खोला जा सकता है। आज के दौर में बहुत से अभिभावक अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए कम उम्र से ही इक्विटी में निवेश शुरू करना चाहते हैं। सेबी का कानून नाबालिग को सिक्योरिटीज (शेयर और म्यूचुअल फंड) का वास्तविक मालिक (Beneficial Owner) बनने की इजाजत देता है। हालांकि, कानूनन एक नाबालिग व्यक्ति किसी भी प्रकार के वित्तीय अनुबंध (Financial Contract) में सीधे हस्ताक्षरकर्ता नहीं हो सकता, इसलिए बच्चे के डीमैट खाते को खोलने और उसका संचालन करने का पूरा अधिकार उसके कानूनी या प्राकृतिक अभिभावक (Natural Guardian – माता/पिता या कोर्ट द्वारा नियुक्त अभिभावक) के पास होता है।

यह सवाल अक्सर अभिभावकों को भ्रमित करता है कि क्या बच्चे के डीमैट अकाउंट से रोजाना शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग की जा सकती है। इसका सीधा जवाब है—बिल्कुल नहीं। सेबी के नियमों के मुताबिक नाबालिग के खाते में ट्रेडिंग को लेकर सख्त सीमाएं तय की गई हैं:

  • सेकेंडरी मार्केट में सीधे खरीदारी नहीं: माइनर ट्रेडिंग अकाउंट से स्टॉक एक्सचेंज के जरिए सीधे किसी कंपनी के शेयर नहीं खरीदे जा सकते।

  • इंट्राडे और F&O पर पूर्ण प्रतिबंध: नाबालिग के खाते से किसी भी प्रकार की इंट्राडे ट्रेडिंग (Day Trading), फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या मार्जिन ट्रेडिंग की सख्त मनाही है।

  • शेयर बेचने की सीमित अनुमति: केवल वही शेयर बेचे जा सकते हैं जो पहले से बच्चे के डीमैट खाते में जमा हैं।

  • बिक्री का पैसा बच्चे के खाते में: शेयर बेचने से मिलने वाली पूरी राशि केवल बच्चे के लिंक्ड बैंक अकाउंट में ही क्रेडिट होगी, अभिभावक के निजी खाते में नहीं।

जब बाजार से सीधे शेयर खरीदना प्रतिबंधित है, तो बच्चे के डीमैट खाते में शेयर जोड़ने के लिए सेबी ने वैध रास्ते तय किए हैं:

  • आईपीओ (IPO) में आवंटन: अभिभावक बच्चे के पैन कार्ड और बैंक खाते के जरिए आईपीओ में आवेदन कर सकते हैं। अलॉटमेंट मिलने पर शेयर सीधे बच्चे के डीमैट में आ जाते हैं।

  • उपहार (Gifting / Off-Market Transfer): माता-पिता, रिश्तेदार या कोई भी व्यक्ति अपने डीमैट खाते से डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप (DIS) या ऑनलाइन ‘CDSL Easiest’ के जरिए बच्चे को शेयर गिफ्ट कर सकता है।

  • कॉर्पोरेट एक्शन्स: बोनस शेयर, स्टॉक स्प्लिट या राइट्स इश्यू के जरिए मिलने वाले अतिरिक्त शेयर सीधे खाते में जुड़ते हैं।

  • विरासत (Inheritance): वसीयत या उत्तराधिकार के माध्यम से मिलने वाले शेयर भी इस खाते में ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

बच्चे के नाम पर डीमैट अकाउंट खोलने के लिए अभिभावक को अपने ब्रोकर के पास ऑफलाइन या ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होता है। इसके लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  1. नाबालिग के दस्तावेज:

    • जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) या 10वीं का सर्टिफिकेट

    • बच्चे का पैन कार्ड (Minor PAN Card अनिवार्य है)

    • बच्चे के नाम का बैंक खाता (Minor Savings Account)

    • पासपोर्ट साइज फोटो

  2. अभिभावक (Guardian) के दस्तावेज:

    • अभिभावक का पैन कार्ड और आधार कार्ड (पते का प्रमाण)

    • अभिभावक की केवाईसी (KYC) और हस्ताक्षर

    • अभिभावक-बच्चे के रिश्ते का प्रमाण

जैसे ही बच्चा 18 वर्ष की आयु पूरी कर वयस्क (Major) बन जाता है, वह माइनर डीमैट अकाउंट स्वतः निष्क्रिय (फ्रीज) हो जाता है। इसके बाद अभिभावक का अधिकार समाप्त हो जाता है। खाते को दोबारा सक्रिय करने के लिए युवा निवेशक को अपने नाम से नए सिरे से फुल केवाईसी (Fresh KYC) करानी होती है। नया हस्ताक्षर और बैंक विवरण अपडेट होने के बाद यह खाता एक सामान्य वयस्क डीमैट और ट्रेडिंग खाते में बदल जाता है, जिसके बाद निवेशक खुद अपनी मर्जी से शेयर खरीदने, बेचने और ट्रेडिंग करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हो जाता है।

आयकर अधिनियम के तहत जब तक बच्चा 18 वर्ष से कम उम्र का है, तब तक उसके डीमैट खाते में मिलने वाले लाभांश (Dividend) और शेयरों की बिक्री पर होने वाले कैपिटल गेन्स (LTCG / STCG) की आय अभिभावक (माता या पिता में से जिसकी आय अधिक हो) की कुल आय में जोड़ दी जाती है (Clubbing of Income)। हालांकि धारा 10(32) के तहत प्रति बच्चा ₹1,500 प्रति वर्ष तक की मामूली छूट का प्रावधान है। 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद टैक्स देनदारी पूरी तरह से बच्चे की स्वतंत्र आय पर आधारित हो जाती है।