
अयोध्या के दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर निशाना साधा है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने सीधा और चुनौतीपूर्ण सवाल खड़ा किया कि क्या विपक्षी दल जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करवाने की हिम्मत दिखा पाएंगे? योगी आदित्यनाथ का यह बयान राज्य की राजनीति में नया उबाल लेकर आया है, जहाँ वे लगातार ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति के खिलाफ अपनी मुखरता बनाए हुए हैं।
हिंदुत्व और तुष्टिकरण की राजनीति पर प्रहार
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात तो करती है, लेकिन आस्था के मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों की खामोशी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग चुनावों के समय बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे अपनी धर्मनिरपेक्षता (Secularism) को केवल एक विशेष समुदाय तक ही सीमित क्यों रखते हैं? योगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भारतीय संस्कृति की सुरक्षा और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का सम्मान करना हर राजनीतिक दल की नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष केवल वोट बैंक की राजनीति में उलझा हुआ है।
अयोध्या से योगी का मिशन ‘डबल इंजन’
अयोध्या की पवित्र भूमि से सीएम योगी का यह बयान न केवल एक सियासी हमला है, बल्कि यह हिंदुत्व के एजेंडे को और अधिक धार देने की रणनीति भी है। उन्होंने अयोध्या के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग पहले अयोध्या का नाम लेने से कतराते थे, आज वे खुद को राम भक्त साबित करने की होड़ में हैं। योगी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश अब बदल चुका है और यहां ‘कानून का राज’ है, न कि तुष्टिकरण का। चुनावी मौसम की आहट के बीच, सीएम का यह तीखा बयान यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि भाजपा का मुख्य वैचारिक आधार (हिंदुत्व) पूरी तरह से केंद्र में रहे, जिससे आगामी चुनावों में विपक्षी दलों को घेरा जा सके।
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