क्या एकनाथ खडसे की बीजेपी में होगी ‘घर वापसी’? फडणवीस से दूरियां और तावड़े से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर पुराने दिग्गज नेता एकनाथ खडसे का नाम चर्चा के केंद्र में आ गया है। देवेंद्र फडणवीस के साथ मतभेदों के चलते बीजेपी छोड़ने वाले खडसे की हालिया मुलाकात पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े से हुई है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है कि क्या एकनाथ खडसे एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम सकते हैं? खासकर राज्य में ओबीसी राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच खडसे की संभावित वापसी को पार्टी के लिए एक बड़े रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

खडसे की वापसी: क्या है ओबीसी कार्ड का गणित?

एकनाथ खडसे महाराष्ट्र में ओबीसी समुदाय का एक कद्दावर चेहरा माने जाते हैं। जब उन्होंने बीजेपी छोड़ी थी, तो पार्टी को उत्तरी महाराष्ट्र (खानदेश) में एक बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। अब जबकि राज्य में आगामी चुनाव और संगठन की मजबूती पर जोर दिया जा रहा है, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को लगता है कि खडसे जैसे अनुभवी नेता की वापसी से ओबीसी वोटबैंक को फिर से एकजुट किया जा सकता है। फडणवीस के साथ उनके विवाद लंबे समय से रहे हैं, लेकिन तावड़े के साथ हुई इस मुलाकात को इस पुराने विवाद को सुलझाने की दिशा में एक ‘ब्रोकर’ प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

फडणवीस से विवाद बनाम तावड़े से मुलाकात

एकनाथ खडसे ने लंबे समय तक फडणवीस के साथ काम किया था, लेकिन बाद में गंभीर मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। हालांकि, अब बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि नाराज नेताओं को साथ लेकर चला जाए। विनोद तावड़े, जो खुद महाराष्ट्र की राजनीति को गहराई से समझते हैं, के साथ खडसे की गर्मजोशी से हुई बातचीत यह संकेत दे रही है कि पार्टी के भीतर ‘ऑपरेशन घर वापसी’ पर चर्चा शुरू हो चुकी है। अगर यह मुलाकात किसी निष्कर्ष पर पहुंचती है, तो यह महाराष्ट्र बीजेपी में एक बड़ा फेरबदल साबित हो सकता है।

पार्टी की अगली रणनीति क्या होगी?

सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने खडसे को फिर से मुख्यधारा में लाने का मन बना लिया है। सवाल यह है कि यदि खडसे वापस आते हैं, तो उनका फडणवीस खेमे के साथ तालमेल कैसे बैठेगा? खडसे के समर्थक लंबे समय से उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं। तावड़े के साथ हुई इस गुप्त मुलाकात ने उन सभी अटकलों को और तेज कर दिया है कि बीजेपी जल्द ही महाराष्ट्र में अपने ओबीसी चेहरों को मजबूत करने के लिए कोई बड़ा ऐलान कर सकती है। राज्य की सियासत पर नजर रखने वालों का मानना है कि खडसे की वापसी बीजेपी को न केवल संगठनात्मक रूप से मजबूती देगी, बल्कि विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा सकती है।