
दांतों को चमकदार, स्वस्थ और सांसों को ताजा बनाए रखने के लिए रोजाना सुबह और रात को ब्रश करना बुनियादी ओरल हाइजीन का हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस टूथब्रश से आप अपने मुंह की सफाई करते हैं, वह खुद कितना साफ और सुरक्षित है? डेंटिस्ट्स और माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के कई वैश्विक अध्ययनों में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गलत जगह पर रखा हुआ और महीनों पुराना टूथब्रश लाखों खतरनाक बैक्टीरिया, फंगस और वायरस का अड्डा बन सकता है। साफ करने के बजाय ऐसा टूथब्रश आपके मुंह में गंभीर संक्रमण, मसूड़ों की बीमारी और दांतों के क्षरण (Tooth Decay) का मुख्य कारण बन सकता है।
अधिकांश घरों में वाशबेसिन और टॉयलेट सीट एक ही बाथरूम में अगल-बगल होते हैं। जब टॉयलेट पॉट को बिना ढक्कन (Lid) बंद किए फ्लश किया जाता है, तो पानी के तेज दबाव से हवा में सूक्ष्म जलकण (Airborne Aerosol Droplets) फैलते हैं, जिन्हें ‘टॉयलेट प्लम’ (Toilet Plume) कहा जाता है। ये कण 6 से 8 फीट की दूरी तक हवा में तैरते हैं और सीधे वाशबेसिन पर खुले रखे टूथब्रश के ब्रिसल्स (Bristles) पर चिपक जाते हैं। इन कणों में ई. कोलाई (E. coli), स्टैफिलोकोकस और स्ट्रेप्टोकोकस जैसे संक्रामक बैक्टीरिया होते हैं, जो अगली सुबह ब्रश करते समय सीधे आपके मुंह के अंदर पहुंच जाते हैं।
बहुत से लोग जब तक टूथब्रश के ब्रिसल्स पूरी तरह टेढ़े या चपटे नहीं हो जाते, तब तक नया ब्रश नहीं खरीदते। लंबे समय तक एक ही ब्रश इस्तेमाल करने से दांतों को भारी नुकसान पहुंचता है:
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दांतों के इनेमल (Enamel) का घिसना: पुराने और सख्त ब्रिसल्स दांतों की बाहरी सुरक्षात्मक परत (इनेमल) को रगड़कर घिस देते हैं। इससे दांतों में ठंडा-गर्म पानी लगने यानी तेज सेंसिटिविटी (Tooth Sensitivity) की समस्या शुरू हो जाती है।
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मसूड़ों का पीछे हटना (Gum Recession): कड़े ब्रिसल्स से लगातार जोर लगाकर ब्रश करने से मसूड़ों में घाव, सूजन और खून बहने की दिक्कत (Gingivitis) हो जाती है। समय के साथ मसूड़े अपनी जगह छोड़ देते हैं, जिससे दांतों की जड़ें कमजोर होकर हिलने लगती हैं।
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प्लाक हटाने में अक्षमता: घिसे हुए और मुड़े हुए ब्रिसल्स दांतों के कोनों और पिछले हिस्से (Molars) तक नहीं पहुंच पाते, जिससे दांतों के बीच बैक्टीरिया और पीला प्लाक जमा होता रहता है।
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गीले ब्रश को प्लास्टिक कैप में बंद करके रखना: कई लोग सफाई के नाम पर गीले टूथब्रश पर तुरंत कैप चढ़ा देते हैं। नमी और अंधेरा फंगस व बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल बनाते हैं।
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सभी सदस्यों के टूथब्रश एक ही होल्डर में सटाकर रखना: परिवार के सभी टूथब्रशों के हेड जब आपस में छूते हैं, तो एक व्यक्ति के मुंह के बैक्टीरिया और फ्लू वायरस दूसरे व्यक्ति के ब्रश में आसानी से ट्रांसफर हो जाते हैं।
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बीमारी (सर्दी-जुकाम, वायरल या गले में इंफेक्शन) के बाद ब्रश न बदलना: फ्लू या वायरल फीवर से ठीक होने के बाद भी पुराने ब्रश का इस्तेमाल करने से री-इंफेक्शन (दोबारा संक्रमण) का खतरा रहता है।
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सख्त (Hard) ब्रिसल्स वाले ब्रश का चुनाव: अधिकांश लोग सोचते हैं कि सख्त ब्रश से दांत ज्यादा साफ होते हैं, जबकि यह दांतों की जड़ों को पूरी तरह नुकसान पहुंचाता है।
डेंटिस्ट्स और ओरल हेल्थ एक्सपर्ट्स आपके टूथब्रश को सुरक्षित रखने के लिए इन जरूरी बातों का पालन करने की सलाह देते हैं:
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हर 3 महीने में बदलें ब्रश: अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन (ADA) के अनुसार, टूथब्रश को हर 90 दिन (3 महीने) में या ब्रिसल्स के फैलते ही तुरंत बदल देना चाहिए।
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हमेशा ‘अल्ट्रा-सॉफ्ट’ या ‘सॉफ्ट’ ब्रिसल्स चुनें: दांतों और मसूड़ों की सुरक्षा के लिए हमेशा सॉफ्ट ब्रिसल्स वाले ब्रश का ही उपयोग करें और हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में 2 मिनट तक ब्रश करें।
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धूप और हवादार जगह पर रखें: इस्तेमाल के बाद ब्रश को बहते साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और उसे हमेशा सीधा (Upright Position) खुली हवा में सूखने दें।
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टॉयलेट फ्लश करते समय ढक्कन बंद करें: बाथरूम में फ्लश का बटन दबाने से पहले हमेशा कमोड का ढक्कन जरूर बंद करें और टूथब्रश को कमोड से कम से कम 6 फीट दूर रखें।
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गर्म पानी या माउथवॉश से सैनिटाइजेशन: हफ्ते में एक बार अपने टूथब्रश के हेड को 30 सेकंड के लिए एंटी-बैक्टीरियल माउथवॉश या हल्के गुनगुने पानी में डुबोकर रखें।
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