कानपुर: ‘मैं हार गया, पापा जीत गए’, 23 साल के वकील ने कोर्ट की 5वीं मंजिल से कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में बयां किया बचपन का दर्द

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Kanpur Suicide Case News: कानपुर की कचहरी से एक ऐसी खबर आई है जिसने समाज और पेरेंटिंग के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर कोर्ट में अपने पिता के साथ वकालत करने वाले 23 वर्षीय युवा वकील प्रियांशु ने कोर्ट बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। मौत को गले लगाने से पहले प्रियांशु ने दो पन्नों का एक बेहद भावुक और दर्दनाक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने बचपन से झेले गए मानसिक और शारीरिक टॉर्चर की दास्तां बयां की है।

“6 साल की उम्र में जूस पीने पर निर्वस्त्र कर घर से निकाला”

प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में बचपन की उन यादों को साझा किया है जो उसके मन पर गहरे जख्म छोड़ गई थीं। उसने लिखा, “जब मैं मात्र 6 साल का था, तब मैंने बिना पूछे फ्रिज से आम का जूस निकाल लिया था। इस मामूली बात पर मुझे कपड़े उतारकर घर से बाहर निकाल दिया गया था।” उसने नोट में लिखा कि माता-पिता को सख्त होना चाहिए, लेकिन इतना भी नहीं कि बच्चे का दम घुटने लगे।

हर कदम पर दबाव और अपमान का साया

सुसाइड नोट के मुताबिक, प्रियांशु की पूरी जिंदगी डर और दबाव के साए में गुजरी। उसने आरोप लगाया कि उसे छोटी-छोटी बातों पर अक्सर धमकाया जाता था।

जबरन फैसले: उसे कक्षा 9 में कंप्यूटर साइंस लेने के लिए मजबूर किया गया और 10वीं के अंकों को लेकर डराया गया।

सार्वजनिक अपमान: पड़ोसियों के सामने उसे नीचा दिखाया जाता था, जिससे उसका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था।

नौकरी की धमकी: वकालत के दौरान भी उसे बार-बार घर और काम से निकालने की धमकियां दी जाती थीं।

‘मेरे पिता को मेरे शरीर को छूने न दें’

सुसाइड नोट का आखिरी हिस्सा किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है। प्रियांशु ने अपनी अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए लिखा, “मेरे पापा को मेरे शरीर को छूने न दें। मैं नहीं चाहता कि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई हो, क्योंकि मैं अपने परिवार को मुश्किल में नहीं डालना चाहता।” उसने आगे लिखा, “मैं कामना करता हूँ कि ऐसा पिता किसी को न मिले। मैं हार गया, पापा जीत गए, उन्हें बधाई।”

पेरेंट्स के लिए एक कड़ा संदेश

अपनी जान देने से पहले प्रियांशु ने दुनिया के सभी माता-पिता से एक भावुक अपील की। उसने लिखा कि बच्चों पर उतना ही दबाव डालें जितना वे सह सकें। लगातार मिल रहे मानसिक दबाव के कारण वह इस कदर टूट चुका था कि उसे अपनी जिंदगी जीने का कोई मतलब नजर नहीं आ रहा था। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ गई है।

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