
आज के इस भागदौड़ भरे आधुनिक दौर में प्लास्टिक की पानी की बोतलें हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं। घर हो, ऑफिस का डेस्क, बच्चों का स्कूल बैग हो या फिर गाड़ी का कप होल्डर— हर जगह हमें प्लास्टिक की बोतलें आसानी से देखने को मिल मिल जाती हैं। वजन में काफी हल्की होने, बेहद किफायती और आसानी से उपलब्ध होने के कारण ज्यादातर लोग इन्हीं बोतलों का इस्तेमाल करना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। कई बार तो लोग बाजार से खरीदी गई सिंगल-यूज पानी की बोतल को भी महीनों तक बार-बार धोकर इस्तेमाल करते रहते हैं। यह आदत देखने में जितनी सामान्य और सुविधाजनक लगती है, उतनी ही यह हमारे शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक प्लास्टिक की बोतलों का लगातार इस्तेमाल हमारी सेहत को धीरे-धीरे गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
प्लास्टिक की बोतल में बार-बार पानी भरने की आदत क्यों है बेहद खतरनाक
बहुत से लोगों की यह आदत होती है कि वे एक बार इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक की बोतल को फेंकने के बजाय उसे लंबे समय तक बार-बार पानी भरकर इस्तेमाल करते रहते हैं। लगातार इस्तेमाल और सफाई के दौरान इन बोतलों की अंदरूनी और बाहरी सतह पर बेहद बारीक खरोंचें (माइक्रो स्क्रेच) पड़ने लगती हैं। ये खरोंचें इतनी सूक्ष्म होती हैं कि सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देतीं, लेकिन समय के साथ इनमें गंदगी, हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीव जमा होने लगते हैं। अगर इन बोतलों की रोज ढंग से सफाई न की जाए, तो ये खतरनाक बैक्टीरिया पानी के जरिए सीधे हमारे पेट में पहुंच जाते हैं और पाचन तंत्र को खराब करने के साथ-साथ कई तरह की संक्रामक बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
गर्मी और तेज धूप में रखी बोतल का पानी पीना सीधे जहर पीने के बराबर
अक्सर गर्मियों के मौसम में या सफर के दौरान लोग पानी की बोतलों को गाड़ी के अंदर, बैग में या फिर सीधे धूप वाली जगहों पर ही छोड़ देते हैं। जब प्लास्टिक की बोतलें सीधे तौर पर तेज धूप, हाई टेंपरेचर या अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आती हैं, तो प्लास्टिक के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल्स और तत्व धीरे-धीरे पिघलकर पानी में घुलने लगते हैं। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स लंबे समय तक धूप या गर्म कार के अंदर रखी प्लास्टिक की बोतलों का पानी पीने से सख्त मना करते हैं। ऐसा केमिकल युक्त पानी सीधे तौर पर हमारे शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है।
शरीर के अंगों पर पड़ता है बुरा असर और ढक्कन में पनपते हैं लाखों बैक्टीरिया
लगातार घटिया क्वालिटी की प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग करने से शरीर में अनचाहे और जहरीले केमिकल्स के पहुंचने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। हालांकि इसका सीधा असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि बोतल की क्वालिटी कैसी है और आप उसे किस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही, यदि बोतलों को रोजाना गर्म पानी या लिक्विड सोप से अच्छी तरह साफ न किया जाए, तो बोतल के ढक्कन और उसके मुंह वाले हिस्से (थ्रेड्स) में बहुत तेजी से फंगस और बैक्टीरिया का साम्राज्य फैल जाता है क्योंकि पानी पीते वक्त हमारे मुंह की लार भी वहां जमा होती है।
सेहत ही नहीं, हमारे पूरे पर्यावरण का भी गला घोंट रही हैं ये प्लास्टिक बोतलें
प्लास्टिक की इन बोतलों का जानलेवा असर सिर्फ हमारी व्यक्तिगत सेहत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी धरती और पर्यावरण को भी बुरी तरह तबाह कर रहा है। हर दिन दुनिया भर में करोड़ों की संख्या में प्लास्टिक की बोतलें कचरे में फेंक दी जाती हैं। चूंकि प्लास्टिक नॉन-बायोडिग्रेडेबल होता है, इसलिए ये बोतलें सैकड़ों सालों तक नष्ट नहीं होतीं और मिट्टी व पानी को प्रदूषित करती रहती हैं। यही प्लास्टिक बाद में माइक्रोप्लास्टिक के रूप में समुद्री जीवों और अंततः हमारे फूड चेन में शामिल होकर पूरी मानव जाति के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन रहा है।
खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आज ही अपनाएं ये बेहतरीन उपाय
अगर आप पूरी तरह से प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल बंद नहीं कर पा रहे हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां बरतकर इसके खतरों से बच सकते हैं। सबसे पहले तो अपनी बोतल को नियमित रूप से हर दिन अच्छी तरह धोना शुरू करें। बोतलों को कभी भी गर्म जगह, रसोई के चूल्हे के पास या सीधी धूप में लंबे समय तक न रखें। अगर आपकी प्लास्टिक की बोतल पर जरा सी भी खरोंचें दिखने लगें या उसका रंग और आकार बदलने लगे, तो उसे तुरंत कूड़ेदान में डाल दें। सबसे बेहतर और सुरक्षित विकल्प यह है कि आप प्लास्टिक को छोड़कर तांबे (कॉपर), स्टेनलेस स्टील या कांच (ग्लास) से बनी बोतलों का इस्तेमाल शुरू करें, जो सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए शत-प्रतिशत सुरक्षित हैं।
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