
बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के पूर्व पति और देश के जाने-माने उद्योगपति संजय कपूर (Sunjay Kapur) से जुड़े 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित पारिवारिक संपत्ति विवाद में एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ आया है। भारत की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने इस मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि कपूर परिवार के आंतरिक मतभेदों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाए जाने के मजबूत आसार नजर आ रहे हैं। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों के सकारात्मक रुख को देखते हुए संकेत दिए हैं कि लंबे समय से अदालतों में उलझा यह हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट और पारिवारिक झगड़ा जल्द ही एक सर्वसम्मति वाले समझौते पर खत्म हो सकता है।
जस्टिस की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब परिवार के सदस्य आपस में बैठकर बात करने और कानूनी लड़ाई को खत्म करने के लिए तैयार हैं, तो अदालत को उन्हें सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने का पूरा मौका देना चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी के बाद ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली देश की प्रमुख दिग्गज कंपनियों में शुमार ‘सोना ग्रुप’ (Sona Group / Sona Comstar) के स्वामित्व से जुड़े इस भारी-भरकम संपत्ति विवाद के शांत होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
30,000 करोड़ रुपये का बिजनेस साम्राज्य: जानें क्या है सोना ग्रुप का यह पूरा कानूनी विवाद
यह पूरा मामला ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के बड़े नाम स्वर्गीय डॉ. सुरिंदर कपूर (Dr. Surinder Kapur) द्वारा स्थापित ‘सोना ग्रुप’ की अकूत संपत्ति और शेयरों के बंटवारे से जुड़ा हुआ है। डॉ. सुरिंदर कपूर के निधन के बाद परिवार के सदस्यों के बीच कंपनी के मालिकाना हक, ट्रस्ट्स के कंट्रोल और पारिवारिक जायदाद के हिस्से को लेकर मतभेद शुरू हो गए थे। इस विवाद की मुख्य धुरी संजय कपूर, उनकी मां रानी कपूर (Rani Kapur) और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच संपत्ति के अधिकारों को लेकर अदालती जंग रही है।
लगभग 30,000 करोड़ रुपये के मूल्यांकन वाले इस औद्योगिक साम्राज्य में कई होल्डिंग कंपनियां, अंतरराष्ट्रीय ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और बहुमूल्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। रानी कपूर और परिवार के कुछ सदस्यों ने याचिका दायर कर आरोप लगाए थे कि संपत्ति के प्रबंधन और पारिवारिक ट्रस्टों के संचालन में नियमों की अनदेखी की गई, जबकि संजय कपूर पक्ष का तर्क रहा है कि सभी व्यावसायिक फैसले कंपनी कानूनों और बोर्ड के दिशानिर्देशों के तहत ही लिए गए हैं। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा, जहां अब दोनों पक्षों ने आपसी समझ से इसका अंतिम हल निकालने की इच्छा जताई है।
करिश्मा कपूर संग विवाह, 2016 में तलाक और मौजूदा पारिवारिक ताना-बाना
बिजनेस वर्ल्ड के इस बड़े विवाद का कनेक्शन बॉलीवुड से होने के कारण यह मामला हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहता है। उद्योगपति संजय कपूर ने साल 2003 में प्रसिद्ध अभिनेत्री करिश्मा कपूर से शादी की थी। हालांकि, शादी के कुछ वर्षों बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और वर्ष 2016 में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक (Divorce) ले लिया। करिश्मा और संजय के दो बच्चे- समायरा और कियान हैं। तलाक के समय बच्चों के पालन-पोषण, ट्रस्ट फंड्स और वित्तीय देनदारियों को लेकर करिश्मा और संजय के बीच अलग से सेटलमेंट पूरा हो चुका था।
करिश्मा से अलग होने के बाद संजय कपूर ने मॉडल व बिजनेसवुमन प्रिया सचदेव (Priya Sachdev) से शादी की। हालांकि, करिश्मा कपूर से जुड़ा पिछला सेटलमेंट पूरी तरह से अंतिम रूप ले चुका है, लेकिन संजय कपूर के पिता की वसीयत और सोना ग्रुप की कुल पारिवारिक संपत्तियों पर अधिकार को लेकर चल रहा वर्तमान मुकदमा उनकी मां रानी कपूर और परिवार के अन्य वारिसों के बीच का मुख्य विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही मध्यस्थता का उद्देश्य इसी पारिवारिक संपत्ति का स्थायी और न्यायसंगत बंटवारा करना है।
मध्यस्थता और सर्वसम्मत समझौते से कॉर्पोरेट जगत को मिलेगी बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यस्थता (Mediation) को बढ़ावा दिए जाने के फैसले से न केवल कपूर परिवार को वर्षों लंबी और खर्चीली अदालती प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह ‘सोना कॉमस्टार’ (Sona Comstar) जैसी शेयर बाजार में सूचीबद्ध बड़ी कंपनियों के निवेशकों के हित में भी होगा। कॉर्पोरेट विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़ी कंपनी के प्रमोटर परिवार में जारी अंदरूनी विवाद से निवेशकों का भरोसा डिगने का खतरा रहता है। यदि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में 30,000 करोड़ रुपये की इस जायदाद का शांतिपूर्ण विभाजन या समझौता हो जाता है, तो इससे कंपनी के गवर्नेंस और बाजार मूल्य पर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सर्वोच्च अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों को अगली सुनवाई की तारीख तक समझौते का अंतिम ड्राफ्ट तैयार करने और आपस में बैठकर शर्तों को अंतिम रूप देने का समय दिया है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े पारिवारिक संपत्ति विवादों में से एक का अंत शांतिपूर्ण तरीके से हो जाएगा।
girls globe