
देश में पर्यावरण अनुकूल और प्रदूषण मुक्त हरित परिवहन (Green Mobility) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी नीतिगत कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने नेशनल परमिट प्रणाली के अंतर्गत संचालित होने वाले बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), हाइड्रोजन ईंधन आधारित वाहनों और प्राकृतिक गैस (CNG) से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की निर्धारित परिचालन आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त बढ़ोतरी का आधिकारिक प्रस्ताव रखा है। मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में संशोधन का मसौदा जारी कर दिया है। सरकार के इस क्रांतिकारी फैसले से देश भर के लाखों ट्रांसपोर्टर्स, ट्रक-बस फ्लीट ऑपरेटर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को भारी आर्थिक राहत मिलेगी, क्योंकि इससे स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों की परिचालन लागत (TCO) घटेगी और उनके शुरुआती भारी निवेश की भरपाई लंबे समय तक हो सकेगी।
12 से बढ़कर 17 और 15 से 20 साल: जानिए नए ड्राफ्ट में क्या है उम्र सीमा का फॉर्मूला?
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के रूल 88 (Rule 88) में मुख्य बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जो राष्ट्रीय परमिट प्रणाली के अंतर्गत आने वाले भारी और मध्यम वाणिज्यिक वाहनों की अधिकतम परिचालन आयु तय करता है। मौजूदा नियमों के तहत पारंपरिक डीजल और पेट्रोल से चलने वाले कमर्शियल वाहनों के लिए नेशनल परमिट प्राप्त करने की आयु सीमा श्रेणियों के आधार पर 12 वर्ष और 15 वर्ष निर्धारित है।
मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए मसौदे के अनुसार, केवल ग्रीन और क्लीन फ्यूल से चलने वाले वाहनों के लिए इस सीमा को 5 साल तक विस्तारित किया जा रहा है:
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12 साल की सीमा वाले वाहन: जिन श्रेणियों में वाहनों की अधिकतम परिचालन आयु 12 वर्ष थी, उसे अब पर्यावरण अनुकूल ईंधन (EV, Hydrogen, CNG) के लिए बढ़ाकर 17 साल करने का प्रस्ताव है।
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15 साल की सीमा वाले वाहन: जिन बहु-धुरी (Multi-axle) या विशिष्ट कमर्शियल वाहनों के लिए वर्तमान में 15 वर्ष की समय-सीमा लागू है, उन्हें अब 20 साल तक नेशनल परमिट पर चलाने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह 5 साल का अतिरिक्त लाभ केवल और केवल प्रदूषण मुक्त और वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों को ही मिलेगा, जबकि पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (डीजल/पेट्रोल) से चलने वाले पुराने वाहनों पर पूर्ववत सख्त समय-सीमा और व्हीकल स्क्रैपेज नियम लागू रहेंगे।
हर साल रिन्यूअल का झंझट खत्म: एक बार में मिलेगा 5 साल का नेशनल परमिट, VAHAN से जुड़ेगा डिजिटल सिस्टम
ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूती देने के लिए सरकार ने नेशनल परमिट जारी करने की व्यवस्था में भी एक बड़ा सुधार प्रस्तावित किया है। वर्तमान में वाहन मालिकों को हर साल नेशनल परमिट का नवीनीकरण (Annual Renewal) कराना पड़ता था, जिससे भारी कागजी कार्रवाई, दफ्तरों के चक्कर और समय की बर्बादी होती थी।
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5 साल का एकमुश्त परमिट: अब ट्रांसपोर्टर्स और वाहन मालिक अपनी सुविधा के अनुसार एक बार में सीधे 5 साल तक की अवधि के लिए नेशनल परमिट ऑथराइजेशन हासिल करने का विकल्प चुन सकेंगे।
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फीस का ढांचा: वार्षिक नेशनल परमिट शुल्क पूर्ववत ₹16,500 प्रति वर्ष ही रहेगा। यदि कोई आवेदक 5 साल के लिए एकमुश्त परमिट चुनता है, तो उसे कुल ₹82,500 का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करना होगा।
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कागजी कार्रवाई खत्म, डिजिटल इंटीग्रेशन: परमिट आवेदन (Form 46) और ऑथराइजेशन (Form 47) की पूरी प्रक्रिया को शत-प्रतिशत डिजिटल कर दिया जाएगा। केंद्रीय ‘वाहन’ (VAHAN) डेटाबेस के जरिए वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालते ही रजिस्ट्रेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा (Insurance), पीयूसी और टैक्स का डेटा स्वतः फेच हो जाएगा, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।
अस्थायी रजिस्ट्रेशन और चेसिस नियमों में भी बड़ा फेरबदल: ट्रांसपोर्टर्स को क्या होगा फायदा?
मंत्रालय ने नए भारी वाहनों के बॉडी निर्माण और डिलीवरी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए अस्थायी पंजीकरण (Temporary Registration) के नियमों में भी व्यावहारिक बदलाव किए हैं:
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बिना बॉडी वाली चेसिस के लिए 6 महीने की वैधता: यदि कोई ट्रांसपोर्टर केवल चेसिस (Chassis without body) खरीदता है और बॉडी निर्माण के लिए वर्कशॉप में भेजता है, तो उसका अस्थायी रजिस्ट्रेशन जारी होने की तिथि से 6 महीने तक मान्य रहेगा। यदि किसी अप्रत्याशित परिस्थिति के कारण निर्माण में देरी होती है, तो संबंधित आरटीओ आवेदन और शुल्क लेकर इसकी वैधता को 30-30 दिनों के लिए आगे बढ़ा सकेगा।
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कस्टमाइज्ड और अन्य राज्यों में पंजीकृत होने वाले वाहन: पूरी तरह से निर्मित ऐसे वाहन, जिन्हें विशेष कस्टमाइजेशन की जरूरत है या जिनका स्थायी पंजीकरण किसी दूसरे राज्य में कराया जाना है, उनके अस्थायी पंजीकरण की वैधता को 45 दिन किया जा रहा है।
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फॉर्म-20 में आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर अनिवार्य: वाहन मालिकों और डीलरों की सुरक्षा के लिए पंजीकरण फॉर्म में आधार से जुड़े मोबाइल नंबर और हाइपोथिकेशन (लोन/फाइनेंस) समझौते का खाता नंबर दर्ज करना अनिवार्य किया जाएगा।
ग्रीन मोबिलिटी और इलेक्ट्रिक ट्रकों को रफ्तार देने की रणनीति
नीति आयोग और उद्योग विशेषज्ञों की रिपोर्टों के अनुसार, भारी वाणिज्यिक वाहनों (Heavy Commercial Vehicles) के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन की स्वीकार्यता अभी भी काफी धीमी रही है। इलेक्ट्रिक ट्रकों और बसों की शुरुआती खरीद लागत (Upfront Cost) पारंपरिक डीजल वाहनों की तुलना में दोगुनी से तीन गुनी तक अधिक होती है।
ऐसे में 12 या 15 साल की सीमित उम्र में ऑपरेटरों के लिए कर्ज चुकाना और मुनाफा कमाना चुनौतीपूर्ण था। उम्र सीमा को 5 साल बढ़ाकर 17 से 20 साल करने से फ्लीट मालिकों को अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न (ROI) मिलेगा और बैंकों के लिए इन ग्रीन वाहनों को लंबी अवधि का आसान कर्ज देना अधिक सुरक्षित हो जाएगा।
30 दिनों में मांगे गए सुझाव: जल्द जारी होगा अंतिम गजट नोटिफिकेशन
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सीएमवीआर संशोधन के इस मसौदे को सार्वजनिक डोमेन में रखकर सभी हितधारकों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं (SIAM) और आम नागरिकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां (Objections & Suggestions) आमंत्रित की हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के उपरांत मंत्रालय अंतिम नियमों को आधिकारिक भारत के राजपत्र (The Gazette of India) में प्रकाशित करेगा, जिसके बाद यह ऐतिहासिक व्यवस्था देश भर में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी।
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