
2011 में रिलीज हुई इम्तियाज अली की फिल्म ‘रॉकस्टार’ का संगीत आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा है। फिल्म का हर गाना अपने आप में एक कहानी कहता है, लेकिन ‘कतिया करूं’ (Katiya Karoon) को लेकर दर्शकों के मन में हमेशा एक जिज्ञासा रही है। हर्षदीप कौर की मखमली आवाज में गाया गया यह गाना जितना सुनने में मीठा है, इसका अर्थ उतना ही गहरा और रूहानी है। आइए, रॉकस्टार के इस ब्लॉकबस्टर गाने के पीछे की छिपी हुई सच्चाई को जानते हैं।
63 साल पुराना है इस गीत का इतिहास
बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘कतिया करूं’ कोई मामूली फिल्मी गाना नहीं, बल्कि एक पारंपरिक पंजाबी लोकगीत (Punjabi Folk Song) है। ग्रामीण भारत की परंपराओं में महिलाएं चरखे पर सूत कातते हुए अपने प्रियतम के इंतजार में इसे गाया करती थीं। सिनेमा के पर्दे पर यह गाना पहली बार 1963 की फिल्म ‘पिंड दी कुड़ी’ में मशहूर गायिका शमशाद बेगम की आवाज में सुनाई दिया था। ए.आर. रहमान ने रॉकस्टार के लिए इसे एक आधुनिक और सूफी अंदाज में पुनर्जीवित किया।
क्या है ‘कतिया करूं’ के बोल का असली अर्थ?
गीतकार इरशाद कामिल ने जब रॉकस्टार के लिए इसे लिखा, तो उन्होंने इसके अर्थ को एक नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया। ‘सारी रातें कतिया करूं’ का अर्थ सिर्फ चरखा चलाना नहीं है। सूफी दर्शन के नजरिए से, इसका मतलब है कि एक प्रेमी पूरी रात अपने प्रियतम की याद में, उसके नाम का जाप करते हुए बिताता है।
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चरखा: सांस लेने की प्रक्रिया का प्रतीक, जो जीवन के अंत तक चलती रहती है।
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सूत कातना: प्रेमी का नाम बार-बार जपना, जिसे हम ‘नाम जपना’ या इबादत भी कहते हैं।
बागी और आजाद हीर का प्रतिबिंब
फिल्म ‘रॉकस्टार’ में ‘कतिया करूं’ का उपयोग हीर (नरगिस फाखरी) के किरदार की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किया गया था। यह गाना हीर के आजाद-ख्याल और बागी स्वभाव को दर्शाता है। गाने के जरिए दिखाया गया है कि कैसे हीर अपनी दबी हुई इच्छाओं और चाहतों को खुलकर अपनाना चाहती है। ए.आर. रहमान का संगीत और इरशाद कामिल के शब्द मिलकर इसे केवल एक प्रेम गीत नहीं, बल्कि आत्म-समर्पण और गहरी चाहत का एक रूपक बना देते हैं।
एक कल्ट गाना जिसने सबको झूमने पर मजबूर किया
भले ही फिल्म के अन्य गानों जैसे ‘नादान परिंदे’ या ‘कुन फाया कुन’ को बहुत लोकप्रियता मिली, लेकिन ‘कतिया करूं’ की अपनी एक अलग रूहानी चमक है। हर्षदीप कौर की गायकी ने इस गाने को अमर बना दिया। यदि आप भी इस गाने को गुनगुनाते हैं, तो अगली बार इसे सुनते समय इसके शब्दों में छिपे उस इंतजार और इबादत को महसूस जरूर करें, जो इस गीत को 63 साल से जीवंत बनाए हुए है।
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