ऑनलाइन गेमिंग पर ED की अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक: ‘RummyCulture’ ऐप की ₹1,906 करोड़ की संपत्ति अटैच, 3 करोड़ यूजर्स से ठगी का खुलासा

देश में ऑनलाइन असली पैसों (Real Money) वाले गेमिंग प्लेटफॉर्म्स और सट्टेबाजी जैसे ऐप्स के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। ED ने बहुचर्चित ‘RummyCulture’ ऐप चलाने वाली कंपनी Gameskraft Technologies Private Limited, उसके शेयरधारकों और सहयोगी कंपनियों के खिलाफ ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के तहत ₹1,906 करोड़ की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच (Freezed/Attached) कर लिया है।

जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने खिलाड़ियों को निष्पक्ष खेल का झांसा देकर और ऑटोमेटेड ‘बॉट्स’ (Bots) का इस्तेमाल करके लगभग 3 करोड़ यूजर्स से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है। आइए एक क्राइम और कॉर्पोरेट-पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि ED की इस बड़ी स्ट्राइक का पूरा सच क्या है।

1. अब तक कुल ₹2,401 करोड़ की संपत्ति पर शिकंजा

ED द्वारा अटैच की गई ₹1,906 करोड़ की नई संपत्तियों में बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड, इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल नोट्स के साथ-साथ कई महंगे फार्महाउस, रिहायशी और कमर्शियल प्रॉपर्टीज शामिल हैं।

  • पहले की कार्रवाई: इससे पहले शुरुआती छापेमारी में ED ने ₹495 करोड़ की चल संपत्ति फ्रीज की थी और ₹11 लाख नकद समेत 2.30 किलोग्राम सोने-हीरे के आभूषण जब्त किए थे।

  • कुल जब्ती: इस मामले में अब तक ED कुल ₹2,401 करोड़ की अवैध संपत्ति को फ्रीज या अटैच कर चुकी है।

2. बॉट्स का खेल और 10-15% का तगड़ा कमिशन: ऐसे होती थी ठगी

तेलंगाना में दर्ज कई एफआईआर (FIR) के आधार पर शुरू हुई इस जांच में ED ने पाया कि Gameskraft और RummyTime Technologies अपने मुख्य ऐप्स—RummyCulture, RummyTime, RummyPrime और Playship के जरिए अवैध नेटवर्क चला रही थीं:

  1. बॉट्स के जरिए धोखाधड़ी: कंपनियां खिलाड़ियों को शत-प्रतिशत सुरक्षित और असली खिलाड़ियों (Real Players) के साथ खेलने का भरोसा देती थीं। लेकिन हकीकत में आम यूजर्स के खिलाफ कंप्यूटर बॉट्स (Automated Programs) उतारे जाते थे, जिससे आम खिलाड़ी हमेशा मैच हार जाते थे और भारी आर्थिक नुकसान उठाते थे।

  2. 10 से 15% कमिशन: कंपनियां हर दांव (Stakes) पर 10% से 15% का भारी-भरकम कमिशन वसूलती थीं, जिससे उन्होंने अवैध रूप से अरबों रुपये का मुनाफा कमाया।

  3. बैन वाले राज्यों में अवैध पैठ: भारत भर में इन ऐप्स के करीब 3 करोड़ यूजर्स थे। इनमें से एक बड़ा हिस्सा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे उन राज्यों से था, जहां ऑनलाइन असली पैसों वाले गेम खेलने पर कानूनी प्रतिबंध है।

3. ग्राहकों को फंसाने के लिए खर्च किए ₹1,035 करोड़

ED की रिपोर्ट के अनुसार, नए लोगों को ऑनलाइन गेमिंग की लत लगाने और पुराने खिलाड़ियों को दोबारा जोड़ने के लिए बोनस, कैश रिवार्ड्स, रेफरल ऑफर, फ्री टूर्नामेंट्स, बल्क SMS और फोन कॉल्स का सहारा लिया गया।

इन प्रमोशनल अभियानों पर कंपनियों ने ₹1,035 करोड़ से ज्यादा पानी की तरह बहाए। इसके अलावा, जीत की राशि निकालने पर 5% से 10% तक ‘विड्रॉल फीस’ लगाई जाती थी और यूजर्स को अपने निकाले जा सकने वाले पैसों को जबरन गेम खेलने वाले ‘गेम कैश’ में बदलने के लिए उकसाया जाता था।

4. लाभांश (Dividend) और अचल संपत्तियों में लॉन्डर किया पैसा

खिलाड़ियों को चूना लगाकर कमाई गई इस काली कमाई (Proceeds of Crime) को वैध (White) बनाने के लिए शेयर बायबैक, डिविडेंड भुगतान, बॉन्ड्स, म्यूचुअल फंड्स और प्रमोटरों व उनके फैमिली ट्रस्टों के नाम पर लग्जरी अचल संपत्तियां खरीदकर ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ की गई। ED ने साफ किया है कि इस मामले में कई अन्य डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं और आगे भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।