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एशियाई खेलों के बीच भारत का मिशन ओलंपिक: खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने वर्ल्ड एक्वाटिक्स चीफ से की अहम बैठक

जापान के आइची-नागोया में 20वें एशियाई खेल 2026 के रोमांच के बीच भारत ने वैश्विक खेल पटल पर अपनी दीर्घकालिक रणनीति को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नागोया में वर्ल्ड एक्वाटिक्स के अध्यक्ष और ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के महानिदेशक कैप्टन हुसैन अल-मुसल्लम के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत में तैराकी, गोताखोरी (डाइविंग), वॉटर पोलो और अन्य जलीय खेलों के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना और देश के एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुंचाना रहा। खेल मंत्री की इस पहल को भारतीय खेल इतिहास में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि भारत अब केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित न रहकर उन विधाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है जहां पदकों की संख्या सबसे अधिक होती है।

भारत सरकार और खेल मंत्रालय का स्पष्ट विजन है कि भारत को दुनिया के शीर्ष खेल राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित किया जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जलीय खेलों में महारत हासिल करना सबसे बुनियादी आवश्यकता है। आधुनिक ओलंपिक खेलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तैराकी और डाइविंग जैसी एक्वाटिक्स स्पर्धाएं पदकों का सबसे बड़ा भंडार मानी जाती हैं। उदाहरण के तौर पर पेरिस ओलंपिक में एक्वाटिक्स स्पर्धाओं के तहत कुल 49 स्वर्ण पदकों समेत ढेरों पदक दांव पर लगे थे। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे शीर्ष खेल राष्ट्र अपनी समग्र पदक तालिका को मजबूत करने के लिए मुख्य रूप से एक्वाटिक्स पर ही निर्भर रहते हैं। भारत अब तक इन स्पर्धाओं में बड़े पदकों से दूर रहा है, लेकिन अब मंत्रालय ने तय किया है कि जब तक देश तैराकी और गोताखोरी में वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा पेश नहीं करेगा, तब तक ओलंपिक पदक तालिका के शीर्ष 10 में जगह बनाना संभव नहीं होगा।

बैठक के बाद खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत के राष्ट्रीय खेल महासंघों और संबंधित एशियाई खेल निकायों के बीच आपसी समन्वय को किस प्रकार नई ऊंचाई दी जाए, इस पर विस्तार से चर्चा हुई। इस कार्ययोजना का मुख्य जोर देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से उभरती हुई युवा प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें ग्रासरूट स्तर पर ही विश्वस्तरीय कोचिंग उपलब्ध कराने पर रहेगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि वर्ल्ड एक्वाटिक्स के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों को भारतीय अकादमियों से जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय प्रशिक्षकों के कौशल को भी निखारा जा सके। आधुनिक ट्रेनिंग तकनीक, बायोमैकेनिक्स और हाई-परफॉर्मेंस सेंटर्स की स्थापना के जरिए देश के युवा तैराकों को शुरुआती उम्र से ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

नागोया में हुई यह बैठक केवल खेलों के तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मायने भी हैं। भारत वर्ष 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों की मेजबानी की दौड़ में मजबूती से शामिल है और इसके साथ ही देश ने 2038 के एशियाई खेलों की मेजबानी के लिए भी अपनी आधिकारिक दिलचस्पी दिखाई है। ऐसे विशाल आयोजनों की मेजबानी का अधिकार हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों और ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया का समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। चूंकि कैप्टन हुसैन अल-मुसल्लम वर्ल्ड एक्वाटिक्स के प्रमुख होने के साथ-साथ ओसीए के डायरेक्टर जनरल भी हैं, इसलिए उनके साथ खेल मंत्री की यह सकारात्मक बातचीत भारत की मेजबानी की दावेदारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी समर्थन दिलाने में बेहद मददगार साबित होगी।

भारत में जलीय खेलों के विस्तार के लिए खेल मंत्रालय अब राज्यों और निजी खेल अकादमियों के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क तैयार करने पर काम कर रहा है। देश के प्रमुख महानगरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी विश्वस्तरीय ओलंपिक साइज स्वीमिंग पूल, तापमान नियंत्रित प्रशिक्षण केंद्र और अत्याधुनिक डाइविंग सुविधाएं स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। खेलो इंडिया योजना के तहत भी एक्वाटिक्स को प्राथमिकता वाले खेलों में शामिल कर पर्याप्त बजट और छात्रवृत्तियां आवंटित की जा रही हैं। खेल मंत्री और वर्ल्ड एक्वाटिक्स के बीच हुए इस विचार-विमर्श से आने वाले वर्षों में भारत के कई युवा तैराक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का नाम रोशन करने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे।