एशियन गेम्स में 3 मेडल जीतने वाली 17 साल की कुमकुम क्यों मिलना चाहती हैं विराट कोहली से

भारतीय खेल जगत में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है और वह नाम है 17 वर्षीय युवा तीरंदाज कुमकुम मोहोद का। महाराष्ट्र के अमरावती जिले से ताल्लुक रखने वाली इस छोटी सी उम्र की बेटी ने हाल ही में संपन्न हुए एशियन गेम्स में अपने अचूक निशाने से ऐसा करिश्मा दिखाया है, जिसने पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। कुमकुम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का ऐसा लोहा मनवाया कि आज हर कोई उनकी काबिलियत की तारीफ कर रहा है। कम संसाधनों और छोटी उम्र में उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जहां तक पहुंचने के लिए खिलाड़ियों को वर्षों की कड़ी तपस्या करनी पड़ती है। उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद से ही देश के तमाम बड़े दिग्गजों और खेल प्रेमियों की निगाहें उन पर टिकी हुई हैं। एशियन गेम्स के महाकुंभ में भारतीय दल के लिए उनका यह सफर किसी परीकथा से कम नहीं रहा है, जिसने देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की एक नई प्रेरणा दी है।

सत्रह साल की उम्र में देश के नाम किए तीन ऐतिहासिक मेडल

खेल के सबसे बड़े मंचों में शुमार एशियन गेम्स में भाग लेना ही अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन महज 17 वर्ष की कच्ची उम्र में तीन-तीन पदक अपने गले में सजा लेना असाधारण साहस का परिचायक है। कुमकुम मोहोद ने तीरंदाजी प्रतियोगिता के रिकर्व इवेंट में अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर कुल तीन मेडल देश की झोली में डाले। उन्होंने अपने शानदार और सटीक निशानों से दो स्वर्ण यानी गोल्ड मेडल और एक रजत यानी सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस प्रकार उन्होंने कुल तीन पदकों की शानदार हैट्रिक लगाते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया। खास तौर पर महिलाओं की व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला तीरंदाज बन गई हैं, जिससे उनका यह रिकॉर्ड भारतीय तीरंदाजी इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय बन गया है। फाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया जैसी दिग्गज और पारंपरिक रूप से इस खेल में मजबूत मानी जाने वाली टीम की खिलाड़ी को रोमांचक शूट-ऑफ तक चले मुकाबले में शिकस्त देकर गोल्ड जीतना यह साबित करता है कि कुमकुम का मानसिक दबाव में भी गजब का नियंत्रण है।

क्यों भारतीय क्रिकेट के ‘किंग’ विराट कोहली से मिलना चाहती हैं कुमकुम?

अपनी इस ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ सफलता के बाद जब देश-विदेश के मीडिया ने कुमकुम मोहोद से उनके प्रेरणा स्रोत और भविष्य की इच्छाओं के बारे में पूछा, तो उन्होंने एक बहुत ही दिलचस्प और दिल को छू लेने वाला खुलासा किया। युवा सनसनी कुमकुम ने खुलकर बताया कि वह भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज और आधुनिक युग के ‘किंग’ कहे जाने वाले विराट कोहली से मिलने की तीव्र इच्छा रखती हैं। कुमकुम के अनुसार, विराट कोहली का खेल के प्रति समर्पण, उनका अटूट अनुशासन, मैदान पर कभी हार न मानने वाला आक्रामक रवैया और विकट से विकट परिस्थितियों में भी मैच को जिताने का जज्बा उन्हें अंदर तक प्रभावित करता है। एक युवा एथलीट के रूप में कुमकुम मानती हैं कि विराट कोहली का 17 साल से अधिक का लंबा और शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर किसी भी खिलाड़ी के लिए संघर्ष और सफलता का सबसे बड़ा जीवंत उदाहरण है। वह विराट कोहली की फिटनेस, उनकी जीवनशैली और देश के लिए सब कुछ झोंक देने वाली मानसिकता से बेहद प्रेरित हैं और जीवन में कम से कम एक बार उनसे मिलकर उनके खेल के अनुभवों को साझा करना चाहती हैं।

एशियन गेम्स में भारत का बढ़ता दबदबा और भविष्य की उम्मीदें

एशियन गेम्स का यह संस्करण भारतीय खेल इतिहास के लिहाज से बेहद खास और अभूतपूर्व रहा है, जहां देश के युवा खिलाड़ियों ने पारंपरिक खेलों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में भी अपनी बादशाहत साबित की है। कुमकुम मोहोद जैसी युवा प्रतिभाओं का उभरकर सामने आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब भारत का खेल ढांचा और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने की प्रक्रिया बेहद मजबूत हो चुकी है। तीरंदाजी जैसे तकनीकी और मानसिक एकाग्रता वाले खेल में दक्षिण कोरिया के एकाधिकार को तोड़कर भारत की बेटियों ने जो स्वर्ण पदक हासिल किए हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे। अमरावती से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का कुमकुम का यह सफर इस बात को पुनर्स्थापित करता है कि यदि पक्के इरादे और कड़ी मेहनत का साथ हो, तो उम्र या संसाधन कभी भी सफलता के आड़े नहीं आते हैं। पूरा देश अब इस बात की उम्मीद कर रहा है कि जल्द ही इस युवा तीरंदाज की मुलाकात उनके आदर्श विराट कोहली से होगी और यह मुलाकात भारतीय खेल जगत के दो अलग-अलग सितारों के बीच प्रेरणा का एक नया अध्याय लिखेगी।