
भारतीय वायु सेना (IAF) के शीर्ष नेतृत्व में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने की दिशा में एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने आधिकारिक तौर पर वायु सेना के नए उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ) के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है। सैन्य रणनीतियों के माहिर और एक बेहद अनुभवी फाइटर पायलट के रूप में पहचाने जाने वाले एयर मार्शल दीक्षित की इस नई भूमिका से भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमताओं और आधुनिकीकरण के अभियानों को एक नई धार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शानदार सैन्य सफर और चुनौतीपूर्ण मिशनों के रणनीतिकार
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का भारतीय वायु सेना में अब तक का सफर बेहद गौरवशाली और बेमिसाल रहा है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के छात्र रहे एयर मार्शल दीक्षित को दिसंबर 1986 में वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था। अपने करीब चार दशकों के शानदार करियर के दौरान उनके पास मिराज-2000 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों को उड़ाने का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वे एक ‘क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर’ होने के साथ-साथ ‘प्रायोगिक टेस्ट पायलट’ भी रहे हैं, जिन्होंने विभिन्न अग्रिम मोर्चों पर वायु सेना के कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन्स और कमांड्स का सफल नेतृत्व किया है।
नए वाइस चीफ के सामने आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण का बड़ा लक्ष्य
वायु सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के कंधों पर कई बड़ी और अहम जिम्मेदारियां होंगी। वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों और हवाई युद्ध के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए भारतीय वायु सेना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी हथियारों, ड्रोन तकनीक और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों (जैसे तेजस मार्क-1ए और एएमसीए) से लैस करना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इसके साथ ही, चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर वायु सेना की तैयारियों को चौबीसों घंटे चाक-चौबंद रखना और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर कूटनीतिक समन्वय स्थापित करना भी उनकी नई रणनीतिक योजना का मुख्य हिस्सा होगा।
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