
आज के दौर में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए एजुकेशन लोन एक बेहतरीन जरिया है, लेकिन जानकारी के अभाव में ली गई जल्दबाजी आपकी पूरी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकती है। अक्सर छात्र और उनके अभिभावक लोन एग्रीमेंट के बारीक अक्षरों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में एक बड़े वित्तीय संकट का कारण बनता है। यदि आप सही प्लानिंग और सावधानी के साथ कदम नहीं उठाते हैं, तो यह लोन आपकी जिंदगीभर की बचत को निगल सकता है। आइए जानते हैं वो 4 बड़ी गलतियां जो आपको लोन लेते समय भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
गलत स्कीम का चुनाव करना
सबसे पहली बड़ी गलती है—लोन स्कीम का चुनाव बिना पूरी रिसर्च के करना। कई बार छात्र बैंक की सलाह या एजेंट के झांसे में आकर उस लोन स्कीम को चुन लेते हैं जिसमें ब्याज दरें तो कम दिखती हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस और अन्य छुपे हुए शुल्क बहुत ज्यादा होते हैं। लोन लेने से पहले हमेशा विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों, उनकी लोन चुकाने की शर्तों और बैंक की प्रतिष्ठा की तुलना ऑनलाइन जरूर करें। एक छोटा सा अंतर भी आपको लंबी अवधि में लाखों रुपये का नुकसान करवा सकता है।
को-लेटरल और बीमा पर ध्यान न देना
दूसरी गलती है लोन के साथ दिए जाने वाले बीमा और को-लेटरल (Collateral) की शर्तों को गंभीरता से न लेना। कई बार लोग लोन तो ले लेते हैं, लेकिन उसके साथ जरूरी बीमा (Insurance) कवर नहीं करवाते, जो संकट के समय परिवार के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। साथ ही, को-लेटरल के रूप में अपनी संपत्ति गिरवी रखते समय यह सुनिश्चित करें कि आपके पास उसे वापस छुड़ाने का स्पष्ट प्लान है। जल्दबाजी में दी गई गारंटी या संपत्ति के कागज बाद में कानूनी और मानसिक तनाव का सबब बन सकते हैं।
मोरेटोरियम पीरियड का गणित न समझना
तीसरी और सबसे घातक गलती है मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) को न समझना। छात्र सोचते हैं कि पढ़ाई खत्म होने तक उन्हें कोई पैसा नहीं देना है, लेकिन इस दौरान चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) तेजी से बढ़ता रहता है। यदि आप पढ़ाई के दौरान ही लोन का कुछ हिस्सा या ब्याज चुकाना शुरू कर देते हैं, तो कर्ज का बोझ काफी कम हो जाता है। वहीं, जो लोग इस अवधि को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं, उन पर डिग्री मिलने तक भारी-भरकम ब्याज का पहाड़ खड़ा हो जाता है, जिसे चुकाना नामुमकिन सा हो जाता है।
रीपेमेंट प्लान (Repayment Plan) की अनदेखी
चौथी और आखिरी गलती है—लोन चुकाने की समय-सीमा (Tenure) का गलत चुनाव करना। कई लोग ईएमआई (EMI) कम रखने के चक्कर में 15 से 20 साल का लंबा लोन कार्यकाल चुन लेते हैं, जिसका असर यह होता है कि आप मूलधन (Principal) से ज्यादा तो ब्याज बैंक को चुका देते हैं। हमेशा अपनी भविष्य की कमाई और करियर की संभावनाओं को ध्यान में रखकर लोन चुकाने का कार्यकाल तय करें। जितनी जल्दी आप लोन चुकाएंगे, उतनी ही ज्यादा ब्याज की बचत होगी और आप कर्ज मुक्त होकर अपने करियर की नई उड़ान भर पाएंगे।
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