Thursday , August 13 2026

एक सीट के लिए छह दावेदार! जानिए सरकारी कॉलेज में एडमिशन पाने का पूरा गणित और नियम

बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (DElEd 2026) प्रवेश परीक्षा के परिणाम आने के बाद अब काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी रफ्तार में है। इस बार के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि राज्यभर के शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल डीएलएड की कुल सीटों के मुकाबले कई गुना ज्यादा छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं, जिससे स्थिति यह बन गई है कि एक सिंगल सीट के लिए औसतन छह उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।

कुल सीटें और सफल अभ्यर्थियों का पूरा समीकरण

बिहार के विभिन्न सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में दो वर्षीय डीएलएड कोर्स के तहत कुल लगभग 30,700 सीटें उपलब्ध हैं। इसके विपरीत, प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों उम्मीदवारों में से करीब 1.65 लाख से अधिक छात्र सफलतापूर्वक उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। सीटों की सीमित संख्या और पास होने वाले अभ्यर्थियों की भारी संख्या को देखते हुए ही यह आंकलन सामने आया है कि प्रत्येक सीट के लिए लगभग 6 उम्मीदवार अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा का स्तर इस बार काफी ऊंचा रहने वाला है।

सरकारी कॉलेजों में सीट हासिल करने का क्या है नियम?

हर अभ्यर्थी की पहली पसंद कम फीस और बेहतर सुविधाओं वाले सरकारी कॉलेज होते हैं। बोर्ड के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले सरकारी कॉलेजों की सीटों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। सरकारी संस्थानों की सीटें पूरी तरह भर जाने के बाद ही निजी (Private) कॉलेजों के लिए अलॉटमेंट लिस्ट जारी की जाएगी। जिन छात्रों के अंक बेहतरीन और मेरिट लिस्ट में ऊपर होंगे, उन्हें ही पहले चरण में सरकारी कॉलेजों में सीट आवंटित की जाएगी।

काउंसलिंग और कॉलेज चॉइस फिलिंग में बरतें सावधानी

सफल अभ्यर्थियों को अपनी पसंद के कॉलेजों का चयन बहुत ही सूझबूझ के साथ करना होगा। ऑनलाइन काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों को अपनी रैंक और आरक्षण के नियमों को ध्यान में रखते हुए संस्थानों के विकल्प (College Priority) भरने होते हैं। यदि आपके अंक अच्छे हैं, तो सूची में सबसे पहले सरकारी कॉलेजों का विकल्प चुनें और उसके बाद ही प्राइवेट कॉलेजों को जगह दें। बोर्ड द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी करें ताकि मनचाहे कॉलेज में दाखिले का मौका हाथ से न निकले।