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एक्सपायरी डेट निकलने के बाद दवा खा ली तो क्या होगा? फार्मासिस्ट्स ने चेताया—’बेअसर’ होने से लेकर ‘जहर’ बनने तक का पूरा सच

अक्सर सिरदर्द, अचानक पेट दर्द, बुखार या एलर्जी होने पर लोग घर में रखे फर्स्ट-एड बॉक्स या पुरानी दवाइयों के डिब्बे से बिना देखे कोई भी गोली निकाल कर खा लेते हैं। बाद में जब खाली पत्ते (स्ट्रिप) पर नजर पड़ती है और पता चलता है कि दवा की ‘एक्सपायरी डेट’ (Expiry Date) कई महीने या साल भर पहले ही निकल चुकी थी, तो अचानक घबराहट होने लगती है। मन में सवाल कौंधने लगते हैं कि क्या यह दवा पेट में जाकर जहर बन जाएगी? क्या इससे लिवर या किडनी खराब हो जाएगी? फार्माकोलॉजिस्ट्स (औषधि विशेषज्ञों) और डॉक्टरों का कहना है कि एक्सपायरी डेट के बाद हर दवा तुरंत जहर नहीं बनती, लेकिन इसका असर दवा के प्रकार, उसके केमिकल फॉर्मूलेशन और उसे स्टोर करने के तरीके पर निर्भर करता है। फिर भी, इसे हल्के में लेना जानलेवा जोखिम साबित हो सकता है।

दवा निर्माण के नियमों (ड्रग रेगुलेशन) के अनुसार, एक्सपायरी डेट वह अंतिम तारीख होती है जिस दिन तक दवा निर्माता कंपनी उस दवा की 100 प्रतिशत सुरक्षा, शुद्धता और पूरी क्षमता (Potency) की कानूनी गारंटी देती है। इस तारीख को तय करने के लिए दवाइयों को प्रयोगशाला में अत्यधिक तापमान, नमी और रोशनी में रखकर उनके स्थायित्व (Stability Testing) की कड़ी जांच की जाती है। एक्सपायरी डेट पार होने का सीधा मतलब यह होता है कि इसके बाद दवा के रासायनिक तत्व टूटने (डिग्रेड होने) लगते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि अगले ही दिन दवा पूरी तरह जहरीली हो जाएगी, बल्कि इसका पहला और सबसे बड़ा असर यह होता है कि दवा की रोग से लड़ने की क्षमता तेजी से घटने लगती है।

एक्सपायर हो चुकी दवा लेने पर शरीर पर तीन मुख्य प्रकार के प्रभाव देखे जा सकते हैं:

  1. उपचार में विफलता (Loss of Efficacy): यह सबसे आम समस्या है। यदि आप सिरदर्द या तेज बुखार में एक्सपायर हो चुकी पैरासिटामोल या दर्द निवारक खाते हैं, तो हो सकता है कि वह दवा शरीर में कोई खास असर ही न दिखाए। आपको लगेगा कि दवा ले ली है, लेकिन बीमारी का लक्षण बदस्तूर बढ़ता रहेगा।

  2. पेट में विषाक्तता और गैस्ट्रिक समस्या: जब दवा के केमिकल घटक टूटते हैं, तो वे पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे अचानक जी मिचलाना (Nausea), उल्टी, तेज पेट दर्द, दस्त या सीने में जलन जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

  3. गंभीर टॉक्सिसिटी (विषाक्तता) और एलर्जिक रिएक्शन: कुछ दवाएं एक्सपायर होने के बाद हानिकारक केमिकल बाई-प्रोडक्ट्स में बदल जाती हैं। इनके सेवन से त्वचा पर लाल चकत्ते (Hives), सांस लेने में तकलीफ, चेहरे व होठों पर सूजन या लिवर और किडनी पर अतिरिक्त रासायनिक दबाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ दवाएं ऐसी होती हैं जिनकी एक्सपायरी डेट निकलने के बाद एक भी खुराक लेना मेडिकल इमरजेंसी में बदल सकता है:

  • एंटीबायोटिक्स (विशेषकर टेट्रासाइक्लिन समूह): टेट्रासाइक्लिन (Tetracycline) जैसी पुरानी एंटीबायोटिक्स एक्सपायर होने के बाद ‘फैंकोनी सिंड्रोम’ (Fanconi Syndrome) नामक गंभीर किडनी विकार का कारण बन सकती हैं, जिससे किडनी की नलियां स्थायी रूप से डैमेज हो सकती हैं। अन्य एंटीबायोटिक्स के बेअसर होने से बैक्टीरिया में दवा के प्रति प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) पैदा हो जाता है।

  • इंसुलिन (Insulin): डायबिटीज के मरीजों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला इंसुलिन एक नाजुक प्रोटीन होता है। एक्सपायरी के बाद यह बहुत तेजी से टूट जाता है। एक्सपायर इंसुलिन लेने से ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं होगी, जिससे मरीज डायबिटिक कीटोएसिडोसिस या कोमा जैसी जानलेवा स्थिति में जा सकता है।

  • दिल की दवाएं और नाइट्रोग्लिसरीन: दिल के मरीजों को एंजाइना (सीने में दर्द) के दौरान जीभ के नीचे रखी जाने वाली ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ बेहद अस्थिर होती है। एक्सपायर होने पर यह पूरी तरह प्रभावहीन हो जाती है और हार्ट अटैक के समय मरीज की जान बचाने में विफल हो सकती है।

  • आंखों के ड्रॉप्स (Eye Drops): आई ड्रॉप्स की शीशी खुलने के 30 दिन बाद या एक्सपायरी डेट के बाद उसमें लगे प्रिजर्वेटिव्स खत्म हो जाते हैं। ऐसी दवा में बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। इसे आंख में डालने से कॉर्निया में गंभीर फंगल इन्फेक्शन हो सकता है और आंखों की रोशनी तक जा सकती है।

  • तरल सिरप, सस्पेंशन और वैक्सीन: ठोस गोलियों (टैबलेट्स) की तुलना में लिक्विड सिरप, बच्चों के कफ सिरप और एंटीबायोटिक सस्पेंशन बहुत जल्दी दूषित और खराब होते हैं।

यदि आपने या परिवार के किसी सदस्य ने गलती से कोई एक्सपायर दवा खा ली है, तो घबराने के बजाय इन 4 व्यावहारिक कदमों को उठाएं:

  1. पैकेट चेक करें और समय नोट करें: तुरंत दवा के रैपर को देखें कि एक्सपायरी डेट कितने दिन या महीने पहले की थी (1 महीना पुराना जोखिम 2 साल पुराने जोखिम से काफी कम होता है)। दवा का नाम, बैच नंबर और खुराक नोट कर लें।

  2. जबरन उल्टी कराने की कोशिश न करें: कई लोग दवा बाहर निकालने के लिए गले में उंगली डालकर उल्टी करने की कोशिश करते हैं। डॉक्टरों के अनुसार ऐसा कभी न करें, क्योंकि इससे भोजन नली छिल सकती है या दवा फेफड़ों में जा सकती है।

  3. भरपूर सादा पानी पिएं: यदि दवा सामान्य पैरासिटामोल या विटामिन की गोली थी, तो तुरंत एक से दो गिलास सामान्य पानी पिएं ताकि दवा का कंसंट्रेशन पेट में डाइल्यूट (पतला) हो सके।

  4. लक्षणों पर 24 घंटे नजर रखें: यदि अगले 2 से 4 घंटे में अत्यधिक पसीना आना, चक्कर, उल्टी, पेट में तेज ऐंठन, सांस लेने में घरघराहट या शरीर पर खुजलीदार दाने दिखें, तो बिना देरी किए सीधे इमरजेंसी या डॉक्टर के पास जाएं और दवा का वह खाली पत्ता साथ ले जाना न भूलें।

घर की मेडिसिन किट को हर 3 से 6 महीने में साफ करना और पुरानी दवाइयों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करना ही इस अनचाहे खतरे से बचने का सबसे आसान उपाय है।