उत्तराखंड में ‘नारी शक्ति वंदन’ और परिसीमन पर रार: पहाड़ी सीटों के अस्तित्व पर संकट, मैदानी वर्चस्व बढ़ने के आसार

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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तराखंड की राजनीति में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) और आगामी परिसीमन (Delimitation) ने एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देहरादून दौरे में विपक्ष से सहयोग मांगे जाने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यह मुद्दा केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ बनाम मैदान की सियासी जंग बनता जा रहा है।

परिसीमन का गणित: क्यों डरे हुए हैं पहाड़ी क्षेत्र?

उत्तराखंड में परिसीमन का सबसे बड़ा आधार जनसंख्या को माना जा रहा है। यही वह बिंदु है जो पर्वतीय क्षेत्रों के राजनीतिक प्रभाव को कम कर सकता है:

सीटों की संख्या में इजाफा: माना जा रहा है कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा की सीटें 70 से बढ़कर 100 के पार पहुंच सकती हैं।

पहाड़ की सीटों में कमी: पलायन और कम जनसंख्या वृद्धि के कारण अल्मोड़ा, पौड़ी और चमोली जैसे पहाड़ी जिलों की विधानसभा सीटें घट सकती हैं।

मैदानी वर्चस्व: देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे मैदानी जिलों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में मैदान की 33 सीटें बढ़कर 45 से 50 तक पहुंच सकती हैं, जिससे सत्ता की चाबी पूरी तरह मैदानी जिलों के पास चली जाएगी।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: 33% आरक्षण का नया समीकरण

इस अधिनियम के लागू होने के बाद विधानसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। हालांकि, यह बदलाव अगले साल (2027) होने वाले विधानसभा चुनाव में लागू होने की संभावना कम है, लेकिन इसने सियासी दलों के भीतर महिला उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ा दी है।

पक्ष-विपक्ष के तीखे प्रहार

भाजपा: “कांग्रेस फैला रही है भ्रम”

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब संसद में इस बिल का समर्थन किया गया था, तो अब राज्य में विरोध क्यों? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस परिसीमन को लेकर पहाड़ की जनता के बीच बेवजह का डर और भ्रम पैदा कर रही है।

कांग्रेस: “जनसंख्या नहीं, भूगोल हो आधार”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:

आरक्षण इसी चुनाव (2027) से लागू हो, लेकिन वर्तमान 70 सीटों पर ही।

परिसीमन का आधार केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि विषम भौगोलिक परिस्थितियां होनी चाहिए। यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो पहाड़ के हक मारे जाएंगे और कांग्रेस इसके खिलाफ जनता के बीच जाएगी।