Tuesday , November 3 2026

इस बार भाई दूज 10 या 11 नवंबर को? जानिए सही तारीख

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक पर्व भाई दूज इस वर्ष पंचांगीय गणनाओं के चलते खासी चर्चा में है। दीपावली के ठीक दो दिन बाद आने वाले इस पावन पर्व को लेकर देश भर के परिवारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि भाई दूज का मुख्य त्योहार वास्तव में 10 नवंबर को मनाया जाएगा या फिर 11 नवंबर को। हिन्दू पंचांग और उदयातिथि के जानकारों के अनुसार, इस साल द्वितीया तिथि की शुरुआत और उसके समापन के समय को लेकर लोगों के मन में संशय है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष भाई दूज की सटीक और शास्त्र सम्मत तारीख कौन सी है, तिलक के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इस दिन किस विधि से भाई को तिलक करना फलदायी माना गया है।

#1. भाई दूज 2026 की सही तारीख: 10 या 11 नवंबर, जानिए पंचांग का सटीक गणित

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का आरंभ और समापन समय ही पर्व की सही तिथि तय करता है। इस वर्ष उदयातिथि और अपराह्ह व्यापिनी तिथि के आधार पर भाई दूज का पर्व 11 नवंबर 2026, बुधवार को मनाया जाना पूरी तरह से शास्त्र सम्मत और मान्य है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके माथे पर विजय तिलक लगाती हैं। पंचांग भेदों के कारण कुछ लोग इसे लेकर असमंजस में हैं, लेकिन धार्मिक अनुष्ठानों और अधिकांश विद्वानों के मत के अनुसार मुख्य भाई दूज का पर्व 11 नवंबर को ही मनाया जाएगा।

#1. भाई दूज 2026 पर तिलक करने का सबसे शुभ और उत्तम मुहूर्त

भाई दूज के दिन भाइयों को तिलक लगाने के लिए दोपहर का समय (अपराह्ह काल) सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। पंचांग के अनुसार 11 नवंबर को दोपहर के समय तिलक करने का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में यह दोपहर करीब 1 बजकर 09 मिनट से लेकर 3 बजकर 19 मिनट तक की अवधि का रहेगा। इस दो घंटे से अधिक की समयावधि के दौरान बहनें अपने भाइयों को तिलक कर सकती हैं। हालांकि विभिन्न शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में मामूली अंतर के कारण यह मुहूर्त स्थानीय समयानुसार थोड़ा बदल सकता है, लेकिन दोपहर का यह समय संपूर्ण देश के लिए सर्वोपरि माना गया है।

#1. भाई दूज की पारंपरिक पूजा विधि और तिलक करने के नियम

भाई दूज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन बहनें अपने घर के आंगन या लकड़ी के पाटे (चौकी) पर चावल के घोल या पिष्टक से चौक बनाती हैं। इसके बाद उस पर भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाया जाता है। सबसे पहले भाई की हथेली पर रोधी, कुमकुम, चंदन और अक्षत (चावल) का लेप लगाकर उस पर पान का पत्ता, सुपारी, फूल और थोड़े से पैसे रखे जाते हैं और कलावा बांधा जाता है। इसके पश्चात भाई के माथे पर विधिपूर्वक तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की प्रार्थना की जाती है। तिलक के बाद भाई को मीठा (मिठाई या गुड़-बताशा) खिलाया जाता है और बहन की रक्षा का संकल्प लिया जाता है।

#1. क्यों मनाया जाता है भाई दूज? जानिए धार्मिक कथा और इसका महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज को ‘यम द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है। कथा के अनुसार, सूर्यपुत्र यमराज ने अपनी बहन यमुना के बार-बार निमंत्रण देने पर कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन उनके घर जाकर भोजन किया था। यमुना ने अपने भाई का सत्कार कर उनके माथे पर तिलक लगाया था और उनके अमर होने का वरदान मांगा था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर या अपने घर पर पूरी श्रद्धा के साथ बहन के हाथ का बना भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसके जीवन में कभी अकाल मृत्यु या संकट का भय नहीं रहता। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूत करने का काम करता है।